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Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, वरना अधूरा रह जाएगा व्रत
Nirjala Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी को सबसे कठिन लेकिन पुण्यदायी व्रतों में से एक माना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन श्रद्धालु बिना जल और अन्न ग्रहण किए उपवास रखते हैं। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा, व्रत और दान का फल कई गुना अधिक मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत करने से सभी एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। इस बार निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पूजा-पाठ के साथ-साथ व्रत के नियमों का पालन करना भी बेहद जरूरी होता है। इसलिए श्रद्धालुओं को कुछ ऐसी गलतियों से बचने की सलाह दी जाती है, जो व्रत के पुण्य को प्रभावित कर सकती हैं। तो आइए, जानते हैं कि निर्जला एकादशी के दिन कौन सी 5 गलतियां नहीं करनी चाहिए -

जल ग्रहण करने से बचें
जैसा कि नाम से ही साफ है कि निर्जला एकादशी का व्रत बिना जल के रखा जाता है। इसलिए इस दिन भूलकर भी अन्न या जल का सेवन न करें, वरना व्रत खंडित हो सकता है। हालांकि गर्भवती महिलाएं, बीमार व्यक्ति और बुजुर्ग लोग अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही व्रत रखें।
अन्न और चावल का सेवन न करें
एकादशी व्रत में अन्न का सेवन वर्जित माना गया है। विशेष रूप से चावल न खाने की सलाह दी जाती है। इसलिए निर्जला एकादशी के दिन चावल से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।
तुलसी दल न तोड़ें
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व होता है, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन तुलसी दल तोड़ने से मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु नाराज होते हैं। इसलिए पूजा के लिए आवश्यक तुलसी दल एक दिन पहले ही तैयार कर लेना उचित माना जाता है।
तामसिक चीजों से दूर रहें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी पर तामसिक भोजन और नशीले पदार्थों का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए। एकादशी के दिन मांसाहार, लहसुन, प्याज, शराब और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। निर्जला एकादशी को आत्मसंयम, भक्ति और शुद्धता का पर्व माना जाता है।
क्रोध और नकारात्मक विचारों से बचें
निर्जला एकादशी का व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि मन और व्यवहार की शुद्धता का भी प्रतीक माना जाता है। इसलिए इस दिन क्रोध, विवाद, कटु वचन और नकारात्मक सोच से दूर रहें। श्रद्धालुओं को भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करते हुए शांत और सकारात्मक मन बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए।



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