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Pankaj Udhas Funeral: पंकज उधास का अंतिम संस्कार आज, जानें श्मशान से लौटते समय पीछे मुड़कर क्यों नहीं देखते?
Pankaj Udhas Last Rites: बॉलीवुड इंडस्ट्री का जगमगाता हुआ सितारा अब अपनी चमक नहीं बिखेर पाएगा। लोगों के दिलों में ख़ास मकाम रखने वाले पंकज उधास जी ने 26 फरवरी 2024 को अंतिम सांसे ली और 27 जनवरी को वो पंचतत्व में विलीन हो जाएंगे।
पंकज उधास के निधन की खबर से पूरे देश में शोक की लहर है। पंकज उधास की बेटी नायाब उधास ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरियर उनके अंतिम संस्कार से जुड़ी जानकारी शेयर की है।

सोशल मीडिया पर पोस्ट की गयी जानकारी में बताया गया है कि, "पद्मश्री पंकज उधास की प्रेमपूर्ण स्मृति में, बहुत भारी मन से, हम आपको लंबी बीमारी के कारण 26 फरवरी 2024 को उनके निधन की सूचना देते हुए दुखी हैं. अंतिम संस्कार मंगलवार, 27 फरवरी को दोपहर 3 से 5 बजे तक होगा, स्थान: हिंदू श्मशान, वर्ली (मुंबई) लैंडमार्क ऑपोजिट, फोर सीजन्स: डॉ. ई म्यूज़ रोड. वर्ली, उधास परिवार."
हिंदू रीति रिवाज के साथ पंकज उधास अपनी अंतिम यात्रा पर निकलेंगे। शास्त्रों में अंतिम संस्कार से जुड़े कुछ ख़ास नियम बताये गए हैं, जिन्हें आज भी फॉलो किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि श्मशान घाट से लौटते समय कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। आइये जानते हैं इसकी वजह:
पीछे मुड़कर न देखना

शास्त्रों में बताया गया है कि शरीर अग्नि में भष्म होने के पश्चात पंच तत्वों में विलीन हो जाता है। मगर आत्मा को न कोई मार सकता है और न ही अग्नि जला सकती है। आत्मा देह के जल जाने के बाद भी मौजूद रहती है और अपनी अंतिम यात्रा भी देखती है। ऐसा माना जाता है अपने कर्मों के आधार पर आत्मा स्वर्ग या नरक में चली जाती है और कुछ व्यक्तियों की आत्मा इसी धरती पर भटकती रहती है।
अपने परिजनों के पास भटकती है आत्मा
पुराणों की मानें तो मृत्यु के बाद भी कुछ लोगों की आत्मा का अपने परिवार के सदस्यों के साथ मोह बना रहता है। परिवार के साथ आत्मा के मोहग्रस्त होने पर वह उनके आसपास ही भटकती रहती है। ऐसे में मृतक को मृत्यु के बाद भी मुक्ति नहीं मिल पाती है।
शव दाह संस्कार करके आत्मा को यह जताया जाता है कि अब जीवित लोगों और अपने परिवार से संबंध तोड़ने का समय आ गया है। मोह के बंधन को इस अग्नि के साथ जलाकर अपनी आगे की यात्रा पर निकलो।
इसलिए पीछे देखने से किया जाता है माना
गरुड़ पुराण के मुताबिक दाह संस्कार के बाद व्यक्ति की आत्मा मोह वश अपने घर लौटना चाहती है। वह फिर से अपने परिवार के पास वापस लौटना चाहता है। शवदाह के बाद श्मशान से लौटते वक्त पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। इससे आत्मा का मोहभंग होता है और उसके अंतिम सफर में परेशानी आती है। आत्मा के लिए अपने परिवार को रोता-बिलखता छोड़कर आगे के सफर पर निकल पाना बहुत कष्टकारी हो जाता है।
ऐसा भी माना जाता है कि अंतिम संस्कार से लौटते वक्त पीछे मुड़कर देखने से मृतक की आत्मा अपने परिजनों के साथ-साथ पीछे-पीछे वापस आती है या फिर वो जीवित व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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