क्या Papmochini Ekadashi के दिन बाल धो सकते हैं? जानें इस दिन क्या करें और क्या न करें

Papmochini Ekadashi 2026 Dos and Don'ts In Hindi: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और जब बात 'पापमोचिनी एकादशी' की हो, तो इसके नियम और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। इस बार 15 मार्च 2026. दिन रविवार को एकादशी का व्रत रखा जाएगा। माना जाता है कि इस दिन की गई एक छोटी सी गलती भी आपके कठिन व्रत के पुण्य को कम कर सकती है। अक्सर श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल उठता है कि क्या एकादशी के दिन बाल धोने चाहिए? या "क्या व्रत के दौरान नाखून काटना वर्जित है?

इसके साथ ही, कई महिलाएं इस दुविधा में रहती हैं कि क्या पीरियड्स (मासिक धर्म) के दौरान पापमोचिनी एकादशी का व्रत रखा जा सकता है? आज के इस विशेष लेख में हम शास्त्रों के अनुसार इन सभी सवालों के सटीक जवाब जानेंगे और समझेंगे कि एकादशी पर क्या करें और क्या न करें ताकि आपको भगवान विष्णु की पूर्ण कृपा प्राप्त हो सके।

क्या एकादशी के दिन बाल धोना शुभ है? (Hair Wash Rules on Ekadashi)

धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन बाल धोना वर्जित माना गया है। इसके पीछे कई तर्क दिए जाते हैं जैसे कि एकादशी पर शुद्धता के नियम का पालन करने को कहा जाता है। ऐसे में एकादशी पर 'क्षौर कर्म' (बाल काटना, नाखून काटना या दाढ़ी बनाना) की मनाही होती है। माना जाता है कि बाल धोने से सिर की त्वचा के रोमछिद्रों के जरिए सूक्ष्म जीव मर सकते हैं, जिससे अंजाने में हिंसा का पाप लगता है।

क्या कहता है ज्योतिष शास्त्र

धार्मिक मान्यता तो आपने जान ली वहीं ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि एकादशी के दिन चंद्रमा की स्थिति का मन और शरीर पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इस दिन सिर पर पानी डालना मानसिक शांति और व्रत की एकाग्रता में बाधा डाल सकता है।

कब धोएं बाल?

एकादशी चाहे कोई भी हो बाल धोने की मनाही होती है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि यदि अति आवश्यक हो तो कब धोएं बाल? शास्त्रों के अनुसार, यदि बाल धोना अनिवार्य हो, तो व्रत शुरू होने से एक दिन पहले यानी दशमी की रात को या फिर द्वादशी को बाल धोना सबसे उत्तम माना जाता है।

क्या पीरियड्स में रख सकते हैं पापमोचिनी एकादशी व्रत?

यह एक ऐसा प्रश्न है जो बहुत सी महिलाएं पूछती हैं कि क्या मासिक धर्म के दौरान एकादशी व्रत रख सकते हैं। जी हां, पीरियड्स के दौरान भी आप मन से व्रत रख सकती हैं। शारीरिक अशुद्धि के बावजूद मानसिक भक्ति में कोई बाधा नहीं होती। लेकिन इस दौरान आपको भगवान की मूर्तियों या पूजा सामग्री को स्पर्श नहीं करना चाहिए। आप दूर बैठकर मंत्रों का जाप (जैसे: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) कर सकती हैं और व्रत की कथा सुन सकती हैं। आप परिवार के किसी अन्य सदस्य से भगवान को भोग लगवाने और आरती करने का अनुरोध कर सकती हैं।

पापमोचिनी एकादशी पर 'क्या न करें' (Don'ts on Ekadashi)

चावल का त्याग: एकादशी पर चावल खाना सबसे बड़ा निषेध माना गया है।

तुलसी दल न तोड़ें: एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित है; पूजा के लिए एक दिन पहले ही पत्ते तोड़कर रख लें।

क्रोध और निंदा: इस दिन किसी की बुराई न करें और न ही झूठ बोलें।

दातून का प्रयोग: लकड़ी या दातून से दांत साफ करने के बजाय पानी से कुल्ला करना बेहतर माना जाता है ताकि पेड़ की टहनियों को नुकसान न हो।

एकादशी पर 'क्या करें' (Do's on Ekadashi)

दान-पुण्य: इस दिन सामर्थ्य अनुसार अन्न, जल या वस्त्र का दान करें।

रात्रि जागरण: यदि संभव हो, तो रात में भगवान विष्णु के भजनों का कीर्तन करें।

सात्विक भोजन: यदि आप निर्जला व्रत नहीं रख रहे हैं, तो केवल फलाहार ही ग्रहण करें।

FAQs
एकादशी के दिन चावल क्यों नहीं खाना चाहिए?

पौराणिक कथा के अनुसार, चावल में महर्षि मेधा का अंश माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से इस दिन चावल खाने से मन में चंचलता आती है और व्रत में एकाग्रता नहीं रह पाती।

BoldSky Lifestyle

Story first published: Saturday, March 14, 2026, 17:10 [IST]
Desktop Bottom Promotion