Latest Updates
-
Vinayak Chaturthi 2026: प्रद्युम्न विनायक चतुर्थी आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि -
Aaj Ka Rashifal 18 June 2026: गुरुवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी भगवान विष्णु की कृपा, जानें अपना भाग्य -
Dhaba Style Egg Curry Recipe: घर पर बनाएं ढाबे जैसी मसालेदार अंडा करी -
नसों की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं सोनू निगम, हो रहे MRI-CT स्कैन लेकिन फिर भी करेंगे लाइव परफॉर्म -
गर्मियों में कई समस्याओं के लिए रामबाण है लीची की तरह दिखने वाला ये फल, जानें इसके फायदे -
Lohri Special Energy Til Pinni Recipe: सर्दियों में शरीर को गर्म रखने का आसान तरीका -
International Men's Health Week: पुरुषों की फर्टिलिटी बढ़ा सकते हैं ये 5 योगासन, जानें अभ्यास का तरीका -
डायबिटीज के मरीजों को किशमिश खानी चाहिए या नहीं? जानें कैसे और कितना करें सेवन -
लंबे-घने और मजबूत बालों का सीक्रेट है मेथी, इन 3 तरीकों से हेयर केयर रूटीन में शामिल -
Eid Special Mutton Biryani Recipe: इस आसान तरीके से घर पर पाएं रेस्टोरेंट जैसा स्वाद
Phulera Dooj 2026: कब है फुलेरा दूज? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि
Phulera Dooj 2026: रंगों की होली से पहले फूलों की होली का त्यौहार ' फुलेरा दूज ' मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, फुलेरा दूज हर वर्ष फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। यह दिन भगवान श्री कृष्ण और राधारानी को समर्पित होता है। ब्रज क्षेत्र में इस दिन होली की शुरुआत होती है। इस खास अवसर पर भक्त मंदिरों में राधा-कृष्ण के साथ फूलों की होली खेलते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, फुलेरा दूज के दिन शुभ कार्य करने के लिए पंचांग या शुभ मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती है। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से राधा कृष्ण जी की पूजा करने से प्रेम और दांपत्य जीवन में आ रही समस्याएं दूर होती हैं। तो आइए, जानते हैं साल 2026 में फुलेरा दूज की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजन विधि के बारे में -

फुलेरा दूज 2026 डेट
वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि की शुरुआत 18 फरवरी को दोपहर 04 बजकर 57 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 19 फरवरी को दोपहर 03 बजकर 58 मिनट पर होगा। उदया तिथि की मान्यता के अनुसार फुलेरा दूज का पर्व 19 फारी की मनाया जाएगा।
फुलेरा दूज 2026 शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:14 बजे से 6:05 बजे तक
चर मुहूर्त: सुबह 11:10 बजे से 12:35 बजे तक
लाभ मुहूर्त: दोपहर 12:35 बजे से 2:00 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:12 बजे से 6:37 बजे तक
फुलेरा दूज का धार्मिक महत्व
फुलेरा दूज का पर्व भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के प्रेम से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रीकृष्ण ने राधा रानी और गोपियों के साथ फूलों की होली खेली थी। तभी से इस दिन को फुलेरा दूज के रूप में मनाया जाता है। इसे होली महोत्सव की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। ब्रज क्षेत्र में, विशेषकर मथुरा और वृंदावन में इस दिन मंदिरों को फूलों से सजाया जाता है और भक्त फूलों की होली खेलते हैं। इस दिन फूलों से श्रीकृष्ण और राधा रानी का श्रृंगार किया जाता है। शास्त्रों के मुताबिक इस दिन को सभी शुभ कार्यों के लिए अबूझ मुहूर्त माना जाता है। यानी इस दिन बिना पंचांग देखे, विवाह सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश और अन्य नए मांगलिक कार्यों की शुरुआत की जा सकती है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, जिन लोगों के विवाह में बाधा आ रही हो या वैवाहिक जीवन में किसी तरह की समस्या हो, उनके लिए इस दिन पूजा करना विशेष फलदाई होता है।
फुलेरा दूज पूजा विधि
इस दिन प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल को साफ करें और राधा-कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
रोली, कुमकुम, चंदन, अक्षत और धूप दीप से पूजन करें।
राधा रानी और श्रीकृष्ण को ताजे और सुगंधित फूल अर्पित करें।
इसके बाद राधा कृष्ण को अबीर-गुलाल चढ़ाएं।
इस दिन पूजा में सफेद मिठाई, पंचामृत और मिश्री का भोग अर्पित करें।
राधा कृष्ण मंत्रों का जप करें और आरती कर पूजा संपन्न करें।
पूजा के बाद प्रसाद वितरित करें और खुद भी ग्रहण करें।



Click it and Unblock the Notifications