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Pitru Paksha 2025: कब करें षष्ठी और सप्तमी का श्राद्ध? पितृ तर्पण के लिए नोट कर लें सही तारीख
Pitru Paksha 2025: 7 सितंबर 2025 से पितृपक्ष शुरू हो गए हैं। हिंदू धर्म में पितृपक्ष का बहुत अधिक महत्व होता है जिसे श्राद्ध और कनागत भी कहा जाता है। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करते हैं और तर्पण करते हैं। कुछ लोग पंडित जी को बुलाकर पिंडदान करते हैं तो कुछ लोग खुद घर पर ही अपने पितरों का श्राद्ध कर लेते हैं। वहीं कुछ लोग काशी-गया या हरिद्वार जाकर श्राद्ध कर लेते हैं। वैसे तो आमतौर पर 16 श्राद्ध होते हैं लेकिन इस बार एक श्राद्ध घट रहा है और 15 श्राद्ध ही हैं।
ऐसे में लोगों को इस बात का कंफ्यूजन है कि इस बार षष्ठी और सप्तमी का श्राद्ध कब है। अगर आप भी इस दिन अपने पितरों का श्राद्ध करते हैं तो जान लीजिए षष्ठी और सप्तमी के श्राद्ध की सही तारीख।
कब है षष्ठी और सप्तमी का श्राद्ध?
हर किसी को षष्ठी और सप्तमी के श्राद्ध को लेकर कंफ्यूजन है कि किस दिन कौन सा श्राद्ध पड़ रहा है? हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार षष्ठी और सप्तमी का श्राद्ध एक ही दिन पड़ रहा है। 13 सितंबर को दोनों श्राद्ध किए जाएंगे। दरअसल, इस बार एक श्राद्ध घट रहा है, इसलिए एक साथ दो श्राद्ध पड़ रहे हैं। सुबह से षष्ठी तिथि है और दोपहर को सप्तमी तिथि लग जाएगी।

पहले श्राद्ध से आखिर तक की लिस्ट
1. प्रतिपदा श्राद्ध- 8 सितंबर
2. द्वितीया श्राद्ध- 9 सितंबर
3. तृतीया श्राद्ध- 10 सितंबर
4. चतुर्थी श्राद्ध- 11 सितंबर
5. पंचमी श्राद्ध- 12 सितंबर
6. षष्ठी श्राद्ध- 13 सितंबर
7. सप्तमी श्राद्ध- 13 सितंबर
8. अष्टमी श्राद्ध- 14 सितंबर
9. नवमी श्राद्ध- 15 सितंबर
10. दशमी श्राद्ध- 16 सितंबर
11. एकादशी श्राद्ध- 17 सितंबर
12. द्वादशी श्राद्ध- 18 सितंबर
13. त्रयोदशी श्राद्ध- 19 सितंबर
14. चतुर्दशी श्राद्ध- 20 सितंबर
15. सर्व पितृ अमावस्या श्राद्ध- 21 सितंबर
श्राद्ध के लिए आवश्यक सामग्री (Shradh Samagri List)
पूजन एवं तर्पण सामग्री
तिल (काले तिल)
गंगा जल
कुश (तर्पण और आसन हेतु)
अक्षत (चावल)
पुष्प (गेंदे या अन्य सुगंधित फूल)
दूर्वा घास
पान, सुपारी
लौंग, इलायची
धूप, अगरबत्ती
दीपक और घी
नैवेद्य एवं भोजन सामग्री
दूध, दही, घी
गुड़, शहद
फल (केला, अमरूद, नारियल आदि)
साग, सब्जियां (सात्विक)
खीर, पूड़ी, कचौरी, दाल आदि
मिठाई (लड्डू, पेड़ा इत्यादि)
अन्न (पके हुए चावल)
पितृ तर्पण के लिए सामग्री
पत्तल/दोना
लौटा/कलश
अर्घ्य पात्र
काले तिल मिश्रित जल
दक्षिणा (पंडित के लिए)
रुई की बाती।



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