Latest Updates
-
Father's Day 2026 Shayari: उंगली पकड़कर चलना सिखाया...फादर्स डे पर पापा को भेजें ये दिल छू लेने वाली शायरियां -
Zero Oil Sprouts Cheela Recipe: वजन घटाने के लिए बनाएं हेल्दी और टेस्टी नाश्ता -
50+ Father's Day 2026 Wishes: जिसके सिर पर पिता का हाथ...फादर्स डे पर पापा को भेजें ये दिल छू लेने वाले मैसेज -
Aaj Ka Rashifal 21 June 2026: रविवार को इन 5 राशियों पर होगी धन वर्षा, सूर्य देव बदलेंगे आपका भाग्य -
Fried Onion Special Egg Do Pyaza Recipe: घर पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसा लाजवाब स्वाद -
International Yoga Day 2026 Quotes: योग दिवस पर इन 30+ कोट्स के जरिए प्रियजनों को दें स्वस्थ रहने का संदेश -
Tandoor Style at Home Paneer Tikka Recipe: अब घर पर पाएं होटल जैसा स्मोकी स्वाद -
Yoga Day 2026 Wishes In Sanskrit: नित्यं योगाभ्यासः...इन संस्कृत संदेशों से अपनों को दें योग दिवस की बधाई -
Father's Day 2026: किसी ने छोड़ी स्मोकिंग, तो कोई निभाता है नैपी ड्यूटी, ये हैं बॉलीवुड के Super Dads -
Simple Aromatic Peas Pulao Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसा खिला-खिला मटर पुलाव
Pitru Paksha Me Pind Daan: किसे करना चाहिए पितृ पक्ष में पिंडदान? पुत्र के न रहने पर कौन निभाता है ये रस्म
Pitru Paksha Me Pind Daan: नश्वर शरीर के मरने के बाद भी जीवात्मा जीवित रहती है क्योंकि हिन्दू धर्म में आत्मा अमर है इसका नाश नहीं होता है। ऐसा गीता में भगवान् श्री कृष्ण ने भी कहा है।
आत्मा लाखों योनियों में भ्रमण करती है और ये सिलसिला जारी रहता है जबतक की आत्मा को स्थायित्व यानी मोक्ष प्राप्त ना हो जाए। लेकिन मोक्ष प्राप्त होता कैसे हैं? एक ज्ञात मार्ग तो ये है की ईश्वर की भक्ति से मोक्ष प्राप्त होता है। लेकिन अगर ईश्वर की भक्ति ना कर पाए तो फिर उसकी मुक्ति कैसे होगी?

शास्त्रों की मानें तो मृत व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति उसका पुत्र दिला सकता है। इसलिए मृत्यु के पश्चात पुत्र द्वारा श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है। लेकिन अगर मृत व्यक्ति को पुत्र ना हो या उसको कोई संतान ना हो तो फिर मुक्ति कैसे मिलेगी? आइये इस पर जानकारी लें।
कौन कर सकता है पिंड दान?
पुत्र द्वारा श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वज को स्वर्ग की प्राप्ति हो सकती है। लेकिन अगर पुत्र ना हो तो अन्य रिश्तेदार भी ये कार्य कर सकते हैं। अगर कोई रिश्तेदार भी ना हो तो कोई पंडित भी श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान कर सकता है।
नियम के अनुसार पुत्र के ना होने पर पहला हक पत्नी का है। पत्नी भी श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान कर सकती है। अगर पत्नी भी ना हो तो भाई या कोई करीबी यह अनुष्ठान कर सकता है।
अगर मृत व्यक्ति को एक से ज्यादा संतान हो तो सबसे बड़ा बेटा ही पिंडदान कर सकता है। अगर बेटा जीवित ना हो तो पोता भी कर सकता है। विधिपूर्वक श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से आत्मा संतुष्ट होती है और संतुष्ट आत्मा को मुक्ति मिल जाती है। इसलिए आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में जिसे पितृ पक्ष भी कहते हैं, श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जरुर करना चाहिए।

पितृ प्रसन्न नहीं हैं तो फिर संतान के ऊपर पितृ दोष रहता है और उसके जीवन में उथल पुथल मची रहती है। पितृ प्रसन्न हुए तो फिर जीवन में शान्ति रहती है और सफलता प्राप्त होता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications