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Pitru Paksha Me Pind Daan: किसे करना चाहिए पितृ पक्ष में पिंडदान? पुत्र के न रहने पर कौन निभाता है ये रस्म
Pitru Paksha Me Pind Daan: नश्वर शरीर के मरने के बाद भी जीवात्मा जीवित रहती है क्योंकि हिन्दू धर्म में आत्मा अमर है इसका नाश नहीं होता है। ऐसा गीता में भगवान् श्री कृष्ण ने भी कहा है।
आत्मा लाखों योनियों में भ्रमण करती है और ये सिलसिला जारी रहता है जबतक की आत्मा को स्थायित्व यानी मोक्ष प्राप्त ना हो जाए। लेकिन मोक्ष प्राप्त होता कैसे हैं? एक ज्ञात मार्ग तो ये है की ईश्वर की भक्ति से मोक्ष प्राप्त होता है। लेकिन अगर ईश्वर की भक्ति ना कर पाए तो फिर उसकी मुक्ति कैसे होगी?

शास्त्रों की मानें तो मृत व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति उसका पुत्र दिला सकता है। इसलिए मृत्यु के पश्चात पुत्र द्वारा श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है। लेकिन अगर मृत व्यक्ति को पुत्र ना हो या उसको कोई संतान ना हो तो फिर मुक्ति कैसे मिलेगी? आइये इस पर जानकारी लें।
कौन कर सकता है पिंड दान?
पुत्र द्वारा श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वज को स्वर्ग की प्राप्ति हो सकती है। लेकिन अगर पुत्र ना हो तो अन्य रिश्तेदार भी ये कार्य कर सकते हैं। अगर कोई रिश्तेदार भी ना हो तो कोई पंडित भी श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान कर सकता है।
नियम के अनुसार पुत्र के ना होने पर पहला हक पत्नी का है। पत्नी भी श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान कर सकती है। अगर पत्नी भी ना हो तो भाई या कोई करीबी यह अनुष्ठान कर सकता है।
अगर मृत व्यक्ति को एक से ज्यादा संतान हो तो सबसे बड़ा बेटा ही पिंडदान कर सकता है। अगर बेटा जीवित ना हो तो पोता भी कर सकता है। विधिपूर्वक श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से आत्मा संतुष्ट होती है और संतुष्ट आत्मा को मुक्ति मिल जाती है। इसलिए आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में जिसे पितृ पक्ष भी कहते हैं, श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जरुर करना चाहिए।

पितृ प्रसन्न नहीं हैं तो फिर संतान के ऊपर पितृ दोष रहता है और उसके जीवन में उथल पुथल मची रहती है। पितृ प्रसन्न हुए तो फिर जीवन में शान्ति रहती है और सफलता प्राप्त होता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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