Latest Updates
-
Mother's Day 2026 पर मां को दें प्यार भरा सरप्राइज, आपके लिए लाए हैं 1,000 से कम में ये 5 गिफ्ट आइडियाज -
गर्मी में बीपी हाई और लो क्यों होता है? डॉ. शालिनी सिंह सोलंके से जानें कारण व बचाव के 5 जरूरी टिप्स -
हार्ट अटैक और गैस के दर्द में कैसे फर्क पहचानें? इन संकेतों को नजरअंदाज करना हो सकता है घातक -
Milind Soman World Record: 60 की उम्र में यूरोप से अफ्रीका तक तैरकर रचा इतिहास, जानें मिलिंद का फिटनेस सीक्रेट -
Nurses Day 2026: सलाम उन योद्धाओं को जो दर्द में मुस्कान बांटते हैं, नर्स डे पर इन संदेशों से कहें थैंक्यू -
Aaj Ka Rashifal, 6 May 2026: राशियों की लगेगी लॉटरी, वृश्चिक को मिलेगा अटका धन और कुंभ का चमकेगा भाग्य -
Hantavirus Outbreak: बीच समंदर क्रूज पर फैला हंतावायरस, 3 की मौत; जानें कैसे फैलता है यह वायरस? -
Met Gala 2026: सोने की साड़ी और हीरे जड़ा ब्लाउज पहन रेड कार्पेट पर उतरीं ईशा अंबानी, बनाने में लगे 1200 घंटे -
Bada Mangal 2026 Upay: ज्येष्ठ के पहले बड़े मंगल पर करें ये आसान उपाय, हनुमान जी दूर करेंगे सभी संकट -
39 की उम्र में शादी करने जा रही हैं हुमा कुरैशी? जानें कौन है उनका होने वाला दूल्हा
Periods Me Pradosh Vrat: पीरियड में प्रदोष व्रत करना शुभ या अशुभ, जानें क्या है नियम?
Periods Me Pradosh Vrat : हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। हर महीने की त्रयोदशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है, जो शुक्ल और कृष्ण पक्ष दोनों में आता है। भक्त इस दिन उपवास रखते हैं और शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करते हैं।
लेकिन अक्सर महिलाओं के मन में यह प्रश्न उठता है कि मासिक धर्म (पीरियड्स) के दौरान प्रदोष व्रत रखना शुभ होता है या अशुभ? इस विषय पर धार्मिक और सामाजिक दृष्टिकोण अलग-अलग हो सकते हैं।

धार्मिक मान्यताएं
परंपरागत रूप से हिंदू धर्म में पीरियड्स के दौरान महिलाओं को पूजा-पाठ, व्रत या धार्मिक कार्यों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। इसके पीछे मुख्य रूप से स्वच्छता और आराम की भावना जुड़ी हुई थी, क्योंकि प्राचीन काल में महिलाओं को इस समय विश्राम की आवश्यकता मानी जाती थी और सुविधा के साधन सीमित थे।
कुछ ग्रंथों के अनुसार, इस दौरान महिला का शरीर अशुद्ध नहीं बल्कि शुद्धिकरण की प्रक्रिया से गुजर रहा होता है। ऐसे में व्रत रखने को लेकर कोई स्पष्ट निषेध नहीं है। हालांकि, अधिकांश परंपराएं पीरियड्स में पूजा और व्रत से दूरी बनाए रखने की सलाह देती हैं।
क्या करें?
यदि कोई महिला पीरियड्स में है और प्रदोष व्रत का पालन करना चाहती है, तो वह मानसिक रूप से व्रत का संकल्प कर सकती है। मतलब वह दिनभर उपवास रख सकती है, परंपरागत पूजा के स्थान पर भगवान शिव का स्मरण, मंत्र जप या ध्यान कर सकती है। इससे श्रद्धा भी बनी रहती है और धार्मिक नियमों का सम्मान भी होता है। इसके अलावा घर में किसी अन्य सदस्य के से पूजा करवा सकती हैं। व्रत में कथा पाठ करने और सुनने से भी व्रती को व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
निष्कर्ष
वर्तमान समय में कई विद्वान और आध्यात्मिक गुरुओं का मानना है कि भगवान के लिए मन की शुद्धता अधिक महत्वपूर्ण है, न कि शारीरिक अवस्था। ऐसे में यदि कोई महिला श्रद्धा और आस्था से व्रत रखना चाहती है, तो वह रख सकती है। यह पूरी तरह से व्यक्ति की आस्था और सुविधा पर निर्भर करता है।



Click it and Unblock the Notifications