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क्या खूब सारा पैसा कमाने वाले लोग ही कहलाते हैं कामयाब? जानें प्रेमानंद महाराज जी का जवाब
Kya Paisa Kamane Wala Hi Qamyab Hota Hai: प्रेमानंद महाराज जी एक प्रखर प्रवक्ता है। उनके सोशल मीडिया पर करोड़ों फॉलोअर हैं। महाराज जी की बातों को देश ही नहीं अपितु विदेशों में भी विशेष तौर पर सुना जाता है सत्संग के दौरान महाराज जी अपने भक्तों के सवालों का जवाब अवश्य ही देते हैं।
हाल ही में महाराज जी से एक सेवक ने सवाल पूछा कि क्या बहुत ज्यादा धन दौलत कमाने वाला इंसान ही सफल कहलाता है? आइए जानते हैं महाराज जी ने क्या उत्तर दिया:
क्या बहुत ज्यादा धन दौलत कमाने वाला इंसान ही सफल होता है?

प्रेमानंद महाराज जी अपने मधुर वाणी से इस सवाल का जवाब देते हुए कहा ऐसे कैसे लोग मान लेते हैं कि धन ही सफलता है आप गलत राह पर आ गए हैं। प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि धन अगर प्रधान रूपी ज्ञान प्रदान करें तो व्यक्ति राक्षस स्वभाव के हो जाएंगे । धन दौलत की प्रधानता व्यक्ति की मनुष्यता खत्म कर देती हैं। प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि जिसका लक्ष्य धन दौलत होगा वह लालची तथा असुरी प्रवृत्ति का होगा। एक दानव उनके अंदर दिखाई देगा।
बन जाता है राक्षस
प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि एक राक्षस वह होता है जो सिर्फ धन दौलत की चाह रखता है और सुख सुविधाओं की खोज करता है। सुख सुविधाओं से जोड़कर जीवन का पोषण उनका मुख्य बिंदु होता है। चाहे व्यक्ति कोई भी हो उसके अंदर एक असुर ही नजर आएगा।
इंसान के मन में वहम
महाराज जी के कथन मुताबिक व्यक्ति को इस बात को जरा सा भी अपने दिमाग में नहीं रखना चाहिए कि धन दौलत से व्यक्ति को सुख तथा प्रसन्नता प्राप्त होगी। यह बहुत बड़ा वहम है।
व्यक्ति के जीवन में कर्तव्य तथा धर्म का पालन करने के लिए सबसे बड़े हथियार स्वरूप सम्मान रहना चाहिए। जो व्यक्ति का मान सम्मान है वह सभी सुख सुविधाओं से सुसज्जित है।
धर्म को महत्व देने वाले
प्रेमानंद महाराज जी ने कहा है कि जिस व्यक्ति के जीवन में धर्म ही मुख्य बिंदु है उनके जीवन में सुख सुविधाओं की किसी भी प्रकार के कमी नहीं रहेगी। धर्म के रास्ते पर चलने वाले व्यक्तियों के कदमों पर हर संभव सुख सुविधा प्राप्त होती है।
पैसों के पीछे भागना खतरनाक
महाराज जी कहते हैं कि धन बहुत बेकार चीज है। इसकी लालसा करना एक मूर्खता के बराबर है क्योंकि यह राक्षस गुण को जन्म देता है। महाराज जी के मुताबिक धन की लालसा से व्यक्ति अपने भाई को भी मार डालता है। संपूर्ण दुनिया में सारा खेल धन दौलत का है। इसके कारण लाखों लोग बुरी राह पर चल देते हैं।
सही मार्ग से कमाया धन
प्रेमानंद महाराज जी के मुताबिक सर्वप्रथम व्यक्ति को धर्म को प्रधानता देनी चाहिए। उसके पश्चात अर्थ और फिर कार्य तथा अंतिम में मोक्ष को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्मपूर्वक धन की प्राप्ति होनी चाहिए जिससे व्यक्ति एक सकुशल जिंदगी तथा सरल सहज मानवता पूर्वक अपना जीवन यापन कर सके।
भगवान को श्रेय
प्रेमानंद महाराज जी ने अपनी मधुर वाणी में कहा कि चिंता, शोक, अशांति बिना भगवान के चरणों का सहारा लिए नष्ट नहीं होती। आपके जीवन में अगर भगवान का सहारा है तो जीवन में किसी भी प्रकार की समस्या ही नहीं होगी।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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