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Qurbani Ki Dua Aur Tarika: जिबह करने से पहले पढ़ी जाती है ये दुआ, जानें कुर्बानी से जुड़े जरूरी नियम
Qurbani Ki Dua Aur Tarika: ईद उल अज़हा, दुनिया भर के मुसलमानों द्वारा मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण धार्मिक अभ्यास है। यह पैगंबर इब्राहिम के विश्वास की परीक्षा की याद दिलाता है जब अल्लाह ने उनसे उनकी सबसे प्रिय चीज़ की कुर्बानी देने के लिए कहा था।
दृढ़ता दिखाने के लिए इब्राहिम ने अपने बेटे की कुर्बानी देने की तैयारी की, लेकिन अल्लाह ने हस्तक्षेप करते हुए उनके बेटे की जगह एक बकरे की कुर्बानी दे दी। हर साल बकरीद के मौके पर क़ुर्बानी दी जाती है। आइये इस लेख के माध्यम से जानते हैं कुर्बानी के समय कौन सी दुआ पढ़ी जाती है और इसका सही तरीका क्या है:

क्यों दी जाती है कुर्बानी? (Qurbani Kyu Dete Hain)
कुर्बानी के दिन, प्रतिभागी एक जानवर की कुर्बानी देते हैं। यह कार्य अल्लाह की इच्छा के प्रति समर्पण और विश्वास को दर्शाने के लिए किया जाता है। कुर्बानी एक महत्वपूर्ण घटना है जिसके माध्यम से लोग पैगंबर इब्राहिम की भक्ति और समर्पण को याद करते हैं।
कुर्बानी करने का सुन्नत तरीका (Qurbani Dene Ka Tarika)
कई मौकों पर ऐसा देखा गया है कि लोग कुर्बानी की नियत से जानवर तो ले आते हैं लेकिन उन्हें इसका सही तरीका मालूम नहीं होता है। कुर्बानी का सुन्नत तरीका यह कहता है कि ज़िबह करने वाला और ज़िबह होने वाला जानवर दोनों का रुख किब्ले की तरफ हो। यानी जब कुर्बानी के लिए जानवर को जमीन पर लिटाया जाए, तो इसका मुंह काबा शरीफ की तरफ होना चाहिए।
कुर्बानी के लिए कौन सी दुआ पढ़ी जाती है? (Qurbani Ki Dua)
कुर्बानी करने से पहले, एक खास दुआ पढ़ी जाती है, जिसे कुर्बानी की दुआ कहते हैं।
इन्नी वज्जहतु यलल्ल्जी फत रससमावती वल अरद हनिफव व मा अना मिनल मुशरिकिन इन्नास सलाती व नुसुकी व महया य व म माती लिल्लाहि रब्बिल आलमीन, ला शरीका लहू व बिजालिक उमिरतु व अना मिनल मुस्लिमीन अल्लाहुम्मा मिन क व लाक बिस्मिल्लाही अल्लाहु अकबर
Qurbani Ki Dua Hindi Meaning
मै अपना मुह उसके तरह किया जिसने आसमान और जमीन को पैसा किया, मै इब्राहीम अलैहिस्सलाम कि मिल्लत पर हूँ, जो हनीफ और मुस्लिम थे, मै मुशरिको में से नही हु, बेशक मेरी नमाज, मेरी कुर्बानी, मेरी जिन्दगी और मेरी मौत सब अल्लाह तल्ला के लिए है, उसका कोई शरीक नही, मुझे इस बात का हुक्म दिया गया है, और मै सब से पहले फरमा बरदार हूँ, ऐ अलह ये कुर्बानी तेरी तौफीक से है, और तेरे लिए है |
Qurbani Ki Dua In English
Inni Wajjhatu Yallaji Fat Rassmawati Wal Arad Hanifaw Wa Maa Ana Minal Mushrikin Innas Slati Wa Nusuki Wa Mahya Yaw A Ma Maati Lillahi Rabbit Aalmin, Laa Sharika Lahu Wa Bijaalik Umiratu Wa Anna Minal Muslimin Allahumma Min Ka Wa Laak Bismllahi Allahu Akabar
Qurbani Ke Baad Ki Dua In Hindi
"अल्लाहुमा तक्ब्ब्ल मिन्नी कमा तक्ब्ब्लता मिन खलिलेका इब्राहीम व हबिबेका मोहम्मद सलाहो अलैहि वसल्लम"
Qurbani Ke Baad Ki Dua In English
Allahuma takbbl minni kama takbblta min khlileka Ibrahim wa habibeka mohmmad salaho aliahi wasllam
क़ुर्बानी से जुड़े इन नियमों का रखें ख्याल
* पशु की आयु सही होनी चाहिए तथा उसका स्वास्थ्य अच्छा होना चाहिए। कमजोर या विकलांग पशु बलि के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
* कुर्बानी के पीछे की मंशा सवाब (अल्लाह से इनाम) होनी चाहिए, न कि व्यक्तिगत स्वाद या मांसाहार।
* बलि के बाद मांस को ढककर रखना चाहिए और उसके अवशेषों को ठीक से दबा देना चाहिए। खून और अवशेष नालियों में नहीं बहने देना चाहिए।
* बलि के औजार जैसे चाकू या खंजर खुले में नहीं छोड़े जाने चाहिए। बलि निजी तौर पर दी जानी चाहिए।
* ईद-उल-अजहा कुर्बानी के लिए सबसे बेहतर दिन है। अगर ईद पर कुर्बानी न कर पाएं तो अगले तीन दिनों में भी कुर्बानी की जा सकती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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