Latest Updates
-
Restaurant Style Kadai Sabzi Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसी चटपटी और मसालेदार सब्जी -
Blue Moon 2026: 31 मई को आसमान में दिखेगा दुर्लभ 'ब्लू मून'; जानिए इसकी खासियत, कहां और कैसे देखें -
Hindi Journalism Day: 30 मई को ही क्यों मनाया जाता है हिंदी पत्रकारिता दिवस? जानें इस दिन का इतिहास और महत्व -
Kumaoni Sweet Bal Mithai Recipe: घर पर बनाएं उत्तराखंड की पारंपरिक और स्वादिष्ट मिठाई -
महिलाओं के लिए वरदान से कम नहीं है हलीम के बीज, अनियमित पीरियड्स समेत इन 5 समस्याओं को कर सकते हैं दूर -
गर्मियों में पसीने से होने वाली 5 कॉमन स्किन प्रॉब्लम्स, एक्सपर्ट से जानें इन समस्याओं से बचने के घरेलू उपाय -
World Digestive Health Day: क्यों मनाया जाता है विश्व पाचन स्वास्थ्य दिवस? जानें इस दिन का महत्व और इतिहास -
Grandma Style Aloo Baingan Recipe: दादी के हाथों जैसा चटपटा और लाजवाब स्वाद -
क्या ज्यादा तनाव लेने से ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है? AIIMS न्यूरोसर्जन ने बताई सच्चाई -
June 2026 Vrat Tyohar: निर्जला एकादशी से लेकर वट पूर्णिमा तक, जून के महीने में आएंगे ये प्रमुख व्रत-त्योहार
Ram Navami 2023: डिजिटल युग में भी प्रासंगिक है रामायण के ये सन्देश जो बदल देंगे आपका जीवन
ये प्रश्न कई बार पूछा जाता है कि रामायण से हमें क्या शिक्षा मिली? तो इसका जवाब है कि वैसे देखा जाये तो पूरा रामायण ही शिक्षा का भण्डार है और इसके हर छंद में ज्ञान समाहित है। वो ज्ञान जो हम अपने दैनिक जीवन में अमल कर सकते हैं उसके बारे में हम आपको बताते हैं।

धर्म का पालन
सबसे पहले तो इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि राम मर्यादा पुरषोत्तम हैं। कठिन से कठिन परिस्थिति आने पर भी इन्होंने धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा। हमेशा अपने मर्यादा का पालन किया।
इन्होंने अपने चाहने वालों को भी चाहे वो भाई लक्ष्मण हो या भक्त हनुमान, सबको यही शिक्षा दी कि धर्म का मार्ग श्रेष्ठ है और मर्यादा का पालन करते रहना चाहिए। इसी का परिणाम था कि उन्होंने महा बलशाली रावण को भी परास्त कर दिया।
कर्म करना

एक चौपाई तुलसीदास ने लिखी है कि "होइहे सोयी जो राम रूचि रखा" अर्थात होगा वही जो ईश्वर चाहेंगे। ईश्वर चाहेंगे तो सब कुछ हो सकता है और श्री राम तो खुद भगवान् थे तो फिर उन्होंने वनवास क्यों स्वीकार किया? रावण से क्यों युद्ध किया? इसके पीछे एक महत्वपूर्ण सन्देश है कि अपना कर्म करते रहना चाहिए और फल ईश्वर पर छोड़ देना चाहिए।
कर्म करते रहने से ही आगे का मार्ग प्रशस्त होता है। लेकिन कर्म करने से पहले संकल्पित होना जरुरी है। कृत संकल्प होकर कर्म किया जाये तो ईश्वर जरुर सफलता प्रदान करते हैं जैसे की बिना संसाधन के राम ने संसाधन से संपन्न रावण को परस्त कर दिया।
आचार पर नियंत्रण
अपने व्यवहार पर नियंत्रण रखें। क्रोध आने पर भी अपना मस्तिष्क ठंडा रखते हुए और अपने मर्यादा के अधीन होकर जो संयमित आचार रखता है वो यशश्वी होता है।
रावण की मृत्यु होने के बाद भी राम ने लक्ष्मण से कहा कि जाओ और रावण को नमस्कार करके उनसे ज्ञान प्राप्त करो।
विचारों में शुद्धता

माता कैकयी की तरफ से अन्याय किये जाने के बाद भी राम के मन में माता कैकयी के विरुद्ध कोई मलिनता नहीं थी। इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि रावण के विरुद्ध भी राम के मन में कोई द्वेष या दुर्भावना नहीं थी, वो तो रावण के किये कुकर्मों की सजा देना चाहते थे इसलिए राम को युद्ध करना पड़ा।
विचारों में शुद्धता की वजह से ही राम ने विभीषण को अपना लिया और स्नेह देते हुए लंका की गद्दी सौंप दी। लंका के लोग भी राम का गुणगान करते रहे क्योंकि राम ने किसी स्त्री या बच्चे को नुकसान नहीं पहुंचाया। जो विचारों में शुद्धता रखता है वो लोकप्रिय होता है।
व्यवहार

रामायण हमें ये शक्षा देती हैं कि आपकी स्थिति कैसी भी हो चाहे आप राजकुमार हों या वनवास पाए युवक, सबके साथ आदर और स्नेह से व्यहवार करना चाहिए। हनुमान और सुग्रीव से मित्रता, केवट के चरण छूना, भरत के लिए आंसू बहाना, नगरवासियों के कल्याण के लिए त्याग, गुरुजनों की रक्षा के लिए राक्षसों से युद्ध, प्रजा के बीच सुचिता के लिए पत्नी तक को त्याग देना और मरने के बाद भी दुश्मन रावण का सम्मान करना, ये सब करने की वजह से ही राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है।
नीति

रामायण में कब किस स्थिति में किस तरह की नीति अपनानी चाहिए ये भी शिक्षा मिलती है। वनवास जाने से पहले भरत के लाख अनुरोध के बावजूद अपने साथ ना ले जाना ताकि राज्य का कामकाज चलता रहे, उधर सुग्रीव को भी अपनी पत्नी चाहिए थी और राम को भी तो दोनों ने राजनैतिक दोस्ती कर ली, फिर, विभीषण को शरण देना और अपने दुश्मन की युद्ध नीति की जानकारी ले लेना, युद्ध से पहले शांति दूत भेजना और वहां की सैन्य और भौगोलिक स्थिति का जायजा ले लेना। ये सब ऐसे उदाहरण हैं जो हमें ये सिखाते हैं की हमें सजग और शांत होकर नीति निर्माण करनी चाहिए ताकि सफलता प्राप्त हो।
रीति
"रघुकुल रीति सदा चलिए आई । प्राण जाय पर वचन न जाई" ये मशहूर चौपाई का हिस्सा आपने जरुर सुना होगा। हर व्यक्ति की अपनी एक वंश परंपरा होती है और उस व्यक्ति को अपनी परंपरा का निर्वहन जरुर करना चाहिए। ऐसा करने से उसके कुल की प्रतिष्ठा बढ़ती है और समाज में सम्मान होता है।

चाहे कैसी भी विषम परिस्थिति आई, राम ने अपने वंश परंपरा को नहीं तोडा। पिता की मृत्यु के बाद उनका तर्पण किया किन्तु लौट के अयोध्या नहीं आये। सीता माँ के सामने कई बार रावण ने राम का कटा हुआ सिर रखा लेकिन माँ सीता ने अपनी सतित्व से समझौता नहीं किया। लक्ष्मण अपने भाई की सेवा करते हुए शक्तिबाण से मूर्छित हो गये किन्तु अपने भाई का साथ नहीं छोड़ा। ये वंश परंपरा है जिसे रीति कहते हैं जिसको हमेशा धारण किये रहना चाहिए।
अपने स्वभिमान की रक्षा, वचन का पालन और अपने से बड़ो का सम्मान - ये कुछ ऐसे गुण थे जो श्री राम को आज भी प्रासंगिक बनाते हैं। हमें रामायण के इन संदेशो का अपने जीवन में पालन करना चाहिए।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications