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क्या होती है तरावीह की नमाज? जानें महिलाओं और पुरुषों के लिए 20 रकात और दुआ पढ़ने का सही तरीका
Taraweeh ki Dua Ka Tarika in Hindi: 19 फरवरी 2026 को रमजान का चांद नजर आने के साथ ही मस्जिदों और घरों में इबादत का दौर शुरू हो गया है। ईशा की फर्ज नमाज के बाद पढ़ी जाने वाली 'नमाज-ए-तरावीह' इस मुबारक महीने की रूह है। 'तरावीह' शब्द अरबी के 'राहत' (Tarwiha) से बना है, जिसका अर्थ है 'आराम करना'। चूंकि इस नमाज में हर चार रकात के बाद कुछ देर बैठकर तस्बीह पढ़ी जाती है और आराम किया जाता है, इसलिए इसे तरावीह कहा जाता है।
अल्लाह के रसूल (स.अ.व) ने फरमाया है कि जो शख्स रमजान की रातों में ईमान और सवाब की नियत के साथ खड़ा होकर तरावीह पढ़ता है, अल्लाह उसके पिछले तमाम गुनाहों को माफ कर देता है। आइए जानते हैं, ईशा के बाद पढ़ी जाने वाली इस 20 रकात नमाज का सही तरीका, नियत और वो खास दुआ जो इस इबादत को मुकम्मल बनाती है।

तरावीह की नमाज क्या है और इसका महत्व? (Importance of Taraweeh)
तरावीह केवल एक नमाज नहीं, बल्कि अल्लाह के कलाम (कुरान) को सुनने और दिल में उतारने का जरिया है। यह सुन्नत-ए-मुअक्कदा है, जिसे रमजान की रातों में पढ़ना हर मुसलमान के लिए बहुत बड़ी बरकत का कारण बनता है। पुरुषों के लिए इसे मस्जिद में जमात के साथ पढ़ना बेहतर है, जबकि महिलाएं इसे घर की पाकीजगी में अदा कर सकती हैं।
ईशा के बाद ही क्यों पढ़ी जाती है तरावीह?
तरावीह का वक्त ईशा की फर्ज नमाज के बाद शुरू होता है और फज्र (सहरी) के वक्त तक रहता है। चूंकि यह 'कियाम-उल-लैल' (रात की इबादत) का हिस्सा है, इसलिए इसे रात के अंधेरे में शांति के साथ पढ़ा जाता है। इसे ईशा के साथ जोड़ना सुन्नत है ताकि दिन भर के रोजे के बाद रात खुदा की याद में गुजरे।
3. तरावीह की नियत करने का सही तरीका (Niyat ka Tarika)
नमाज शुरू करने से पहले दिल में पक्का इरादा (नियत) करना जरूरी है:
पुरुषों के लिए: "नियत की मैंने दो रकात नमाज सुन्नत तरावीह, अल्लाह तआला के वास्ते, पीछे इस इमाम के (यदि मस्जिद में हैं), मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ, अल्लाहु अकबर।"
महिलाओं के लिए: "नियत करती हूं मैं दो रकात नमाज सुन्नत तरावीह की, अल्लाह तआला के वास्ते, मुंह मेरा काबा की तरफ, अल्लाहु अकबर।"
20 रकात पढ़ने का आसान तरीका (20 Rakat Step-by-Step)
तरावीह की नमाज कुल 20 रकात होती है, जिसे 2-2 रकात करके पढ़ा जाता है।
हर 2 रकात के बाद सलाम फेरें।
हर 4 रकात (2+2) पूरी होने पर बैठें और 'तरावीह की तस्बीह' पढ़ें।
यदि आप घर पर पढ़ रहे हैं, तो कुरान के आखिरी पारे की 10 छोटी सूरतों (सूरह फील से सूरह नास तक) को दोहराकर भी नमाज मुकम्मल कर सकते हैं।
तरावीह की खास दुआ (Taraweeh ki Dua in Hindi)
हर चार रकात के बाद इस दुआ को पढ़ना सवाब और सुकून का सबब है:
"सुब्हान ज़िल मुल्कि वल् मलकूति, सुब्हान ज़िल इ़ज़्ज़ति वल् अ़ज़मति वल् हयबति वल् कु़दरति वल् किब्रिया-इ वल् जबरूत। सुब्हानल् मलिकिल् हय्यिल्लज़ी ला यनामु वला यमूत। सुब्बूहुन् कु़द्दूसुर् रब्बुना व रब्बुल मला-इ़कति वर्रूह। अल्लाहुम्मा अजिरना मिनन्नार, या मुजीरु या मुजीरु या मुजीर।"
उर्दू में तरावीह की दुआ (Taraweeh ki Dua in Urdu)
سبحان ذي الملك و الملكوت سبحان ذي العزة و الجبروت سبحان الحي الذي لا يموت
سبحان الذي خضعت لعظمته الرقاب سبحان الذي ذلت لجبروته الصعاب سبحان رب الأرباب مسبب الأسباب
سبحان خالق الخلق من تراب سبحان الذي في السماء عرشه و في الأرض سلطانه
سبحان الذي لا تراه في الدنيا العيون و لا تخالطه الظنون
इंग्लिश में तरावीह की दुआ (Taraweeh ki Dua in English)
Subhana zil mulki wal malakut. Subhana zil izzati wal azmati wal haibati wal qudrati wal kibriya ay wal jabaroot. Subhanal malikil hayyil lazi la yanaamo wala yamato subbuhun quddusun rabbuna wa rabbul malaikati war ruh-allahummaajirna minan naar ya mujiro ya mujiro ya mujeer.
किन परिस्थितियों में दी गई है छूट? (Exemptions)
दीन-ए-इस्लाम में इबादत को बोझ नहीं बनाया गया है। इन हालातों में तरावीह छोड़ी जा सकती है या बैठकर पढ़ी जा सकती है:
गंभीर बीमारी: यदि खड़े होने या झुकने से सेहत बिगड़ने का डर हो।
अत्यधिक कमजोरी या बुढ़ापा: जो लोग खड़े होकर नहीं पढ़ सकते, वे बैठकर पढ़ सकते हैं।
सफर: यदि मुसाफिर बहुत थका हुआ हो और नमाज पढ़ने की स्थिति में न हो।
महिलाओं के लिए मुकम्मल गाइड (Guide for Women)
महिलाओं के लिए घर पर तरावीह पढ़ना उत्तम माना गया है। वे अपनी सुविधा के अनुसार कुरान की छोटी सूरतों के साथ 20 रकात पूरी करें। यह नमाज उनके घर में बरकत और शांति लाती है।



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