Ratha Saptami 2025: रथ सप्तमी पर ना करें ये काम, सूर्य देव हो जाएंगे नाराज; जानें क्‍या करें और क्या नहीं?

रथ सप्तमी व्रत, जो 7 फरवरी को मनाया जाएगा, सूर्य देव की उपासना का महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के लिए सूर्य देव की पूजा की जाती है। इसे अचला सप्तमी भी कहते हैं।

पौराणिक मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव अपने रथ को सात घोड़ों के साथ उत्तर-पूर्व दिशा में बढ़ाते हैं। इस दिन शास्‍त्रों में कुछ चीजें न करने की मनाही है। इसके अलावा कहते है इस दिन नमक भी नहीं खाना चाह‍िए? आइए जानते हैं इस दिन क्‍या करना चाह‍िए और क्‍या नहीं?

Ratha Saptami 2025

इस दिन क्‍या करना चाह‍िए?

रथ सप्तमी के दिन कुछ शुभ कार्य किए जा सकते हैं, जो व्रत के प्रभाव को बढ़ाते हैं। सूर्योदय से पूर्व स्नान करें, और यदि संभव हो तो गंगा स्नान करें, नहीं तो गंगाजल मिलाकर स्नान करें। सूर्य देव की पूजा करें और रथ सप्तमी व्रत की कथा सुनें। विधिपूर्वक सूर्य देव की आराधना करें। घी का दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है, इससे भाग्य प्रबल होता है और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। घर के मुख्य द्वार पर आम और अशोक के पत्तों से तोरण लगाएं, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो।

इस दिन मीठे व्‍यंजन खाएं

माघ मास की सप्तमी तिथि को मीठा भोजन करके सूर्य देव की उपासना करने से व्यक्ति को निरोगी जीवन, करियर में उन्नति, और अधिकारियों से अच्छे संबंध मिलते हैं। सूर्य देव की पूजा और नमक का त्याग करने से चर्मरोग और मृत्यु के बाद उत्तम लोक प्राप्त होता है।

इस दिन क्‍या नहीं करना चाह‍िए?

रथ सप्तमी के दिन कुछ विशेष कार्यों से बचना चाहिए, ताकि व्रत का पूरा लाभ प्राप्त हो सके।
- सबसे पहले, क्रोध और कलह से बचें और घर में शांति बनाए रखें, साथ ही किसी भी प्रकार के विवाद से दूर रहें।
- नॉनवेज और शराब का सेवन न करें, इस दिन शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण करें और तामसिक भोजन से परहेज करें। घर का माहौल सकारात्मक और शांतिपूर्ण बनाए रखें, नकारात्मकता से बचें।
- ब्रह्मचर्य का पालन करें, क्योंकि इस दिन संयम का विशेष महत्व है। कुछ धार्मिक - मान्यताओं के अनुसार, इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए, ताकि व्रत का उद्देश्य पूरा हो और आत्मिक शांति मिले।

रथ सप्तमी 2025 शुभ मुहूर्त

रथ सप्तमी 2025 के लिए शुभ मुहूर्त स्नान के लिए सुबह 5:23 बजे से 7:08 बजे तक रहेगा। सप्तमी तिथि 4 फरवरी को सुबह 4:37 बजे शुरू होगी और 5 फरवरी को रात 2:30 बजे समाप्त होगी। इस दिन गंगा स्नान की परंपरा भी है।

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