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Rath yatra 2025: भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथ में क्या अंतर, जानें इसकी खासियत और महत्व
Rath yatra 2025: 26 जून 2025 से जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा शुरू होने जा रही है जिसकी तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस रथ यात्रा का धार्मिक दृष्टि से बहुत अधिक महत्व है, साथ ही इसकी भव्यता लोगों का दिल मोह लेती है। देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग भव्य रथ यात्रा में शामिल होने के लिए आते हैं।
भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ में सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर की ओर जाते हैं। रथ यात्रा का इतना महत्व है तो चलिए कुछ रथ के बारे में ही जान लेते हैं। जी हां, पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा में हर साल भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के लिए नए रथ बनाए जाते हैं।
यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसमें लकड़ी, नाप-तोल, दिशा, रंग और प्रतीकों का खास महत्व होता है। आइए जानते हैं इन रथों के नाम, विशेषताएं और उनके बीच क्या अंतर होता है।

1. कैसा होता है भगवान जगन्नाथ का रथ?
भगवान जगन्नाथ के रथ को नंदीघोष कहा जाता है। ये लाल और पीले रंग का होता है। जगन्नाथ के रथ के 18 पहिए होते हैं और इसकी ऊंचाई करीब 45 फीट होती है। क्या आप जानते हैं कि भगवान जगन्नाथ के ध्व्ज को क्या कहा जाता है? नहीं तो जान लें कि उनके ध्वज को कपिध्वज के नाम से जाना जाता है। रथ चालक दारुक होते हैं और रथ के रक्षक देवता गरूड़ होते हैं। इस रथ की खास बात ये है कि ये सबसे ऊंचा और बड़ा होता है।
2. कैसा होता है बलभद्र का रथ?
भगवान जगन्नाथ के भाई बलभद्र के रथ को तालध्वज कहते हैं जो लाल और हरे रंग का होता है। बलभद्र के रथ के पहिओं की संख्या 16 होती है और रथ की ऊंचाई करीब 44 फीट होती है। बता दें कि बलभद्र के झंडे को उन्मनी के नाम से जाना जाता है और रथ का चालक मतलि होता है। बलभद्र के रथ के रक्षक देवता वासुदेव होते हैं। बलभद्र के रथ की खास बात ये है कि यह भगवान के बड़े भाई का रथ है, सबसे पहले खींचा जाता है।

3. सुभद्रा का रथ कैसा होता है?
भगवान जगन्नाथ की बहन सुभद्रा के रथ को देवदलन रथ के नाम से जाना जाता है। ये रथ लाल और काले रंग का होता है। सुभद्रा के रथ के पहिओं की संख्या 14 होती है और इसकी ऊंचाई करीब 43 फीट होती है। सुभद्रा के रथ के झंडे का नाम नांदबिक होता है और अर्जुन इसका चालक होता है। रथ के रक्षक देवता त्रिविक्रम होते हैं। इस रथ की खास विशेषता ये है कि इसका आकार सबसे छोटा होता है और ये बीच में चलता है।

रथ निर्माण की खास बातें जो आप जान लें
कहां होता है रथों का निर्माण
बता दें कि भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथों का निर्माण मंदिर के सामने "रथखला" नामक जगह पर होता है।
खास होती है लकड़ी
इन रथों को बनाने के लिए लकड़ी खास जंगलों से लाई जाती है। पता हो कि इन रथों को बनाने के लिए साल और फलेसा की लकड़ी का उपयोग होता है।
शिल्पी
विशिष्ट परिवारों से ताल्लुक रखने वाले 'महरणा' और 'विश्वकर्मा' कारीगर ही रथों का निर्माण करते हैं।
कब से बनने लगते हैं रथ
जान लें कि पुरी रथ यात्रा की तैयारियां बहुत पहले से होने लगती है। इन रथों को बनाने की शुरुआत अक्षय तृतीया से शुरू हो जाती है।



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