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सावन सोमवारी को निकली महाकाल की चौथी सवारी, चार स्वरूप में आये नजर
Ujjain Mahakal Sawari: सावन मास की शुरुआत 4 जुलाई से हो चुकी है और इस महीने की आखिरी तारीख 31 जुलाई, सोमवार को श्रावण का चौथा सोमवार है।
वैसे तो पूरे महीने को हिंदू धर्म में बेहद शुभ माना जाता है, लेकिन चौथे सोमवार को बेहद खास माना जाता है क्योंकि इस दिन प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल की चार सवारी एक बड़े जुलूस के साथ निकाली जाती है।

भगवान शिव के भक्त इस दिन को बहुत धूमधाम और उत्साह के साथ मनाते हैं और वे इस दिन भगवान महाकाल के चार रूपों के दर्शन कर सकते हैं। अवंतिकानाथ अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, गरुड़ रथ पर शिवतांडव और नंदी पर उमा महेश के रूप में सवार होकर शहर में भ्रमण करते हैं।
सवारी निकलने से पहले भगवान चंद्रमौलेश्वर की विधिवत पूजा की जाती है। इस अनुष्ठान के बाद, सवारी शाम 4:00 बजे महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होती है। धूमधाम के साथ इस शाही यात्रा का आयोजन होता है। पालकी में विराजमान भगवान चंद्रमौलेश्वर को मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवान सलामी देते हैं। फिर चंद्रमौलेश्वर नगर भ्रमण पर निकलते हैं।
इस यात्रा के लिए पारंपरिक मार्ग अपनाया जाता है, इसलिए सवारी महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बख्शी बाजार और कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंचती है। यहीं पर भगवान की पूजा-अर्चना की जाती है और क्षिप्रा नदी के पवित्र जल से उनका अभिषेक किया जाता है। इसके बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक खाती मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार, गुदरी बाजार होते हुए पुन: महाकालेश्वर मंदिर पहुंचती है।
साल के इस समय में जब सावन का महीना जारी है, तब भक्तों की भरी भीड़ उज्जैन पहुंचती है। दुनिया भर से शिव भक्त महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। भक्त इस दिन भस्म आरती का भी इंतजार करते हैं जो तड़के होती है।
इस दिन मंदिर के दरवाजे सुबह 2:30 बजे खुलते हैं और पुजारी राजाधिराज भगवान महाकाल को जल चढ़ाते हैं और फिर सदियों पुराने रीति-रिवाजों का पालन करते हुए पूजा करते हैं। फिर उन्हें दूध, दही, शहद, चीनी और फलों के रस जैसी सभी शुभ सामग्रियों से स्नान कराया जाता है। इसके बाद भगवान को भांग, सूखे मेवे, अबीर, गुलाल, चंदन आदि से सजाया जाता है और फिर भस्म आरती की जाती है। साथ ही पूरे दिन भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया जाता है।
भगवान महाकाल की सवारी का सीधा प्रसारण आप महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के फेसबुक पेज पर देख सकते हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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