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Sawan Pradosh Vrat 2025: सावन के पहले प्रदोष व्रत पर इन 3 चीजों से करें जलाभिषेक, दूर होंगे मंगल दोष
Sawan Pradosh Vrat 2025: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र और शुभ माना जाता है। खासकर इस दौरान पड़ने वाला प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) अत्यंत फलदायी होता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा विशेष रूप से उनके त्रिशक्ति रूप महादेव, त्रिपुरारी और नीलकंठ को प्रसन्न करती है। साल 2025 में सावन का पहला प्रदोष व्रत मंगलवार, 22 जुलाई को पड़ रहा है जिसे भौम प्रदोष कहा जाएगा और यह मंगल ग्रह से संबंधित सभी दोषों को दूर करने वाला माना जाता है।
जो भक्त इस दिन उपवास रखकर श्रद्धा से पूजन करते हैं, उन्हें शिव कृपा से उन्नति, सफलता और संकटों से मुक्ति प्राप्त होती है। आइए जानते हैं इस व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त, और भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए जलाभिषेक में प्रयोग की जाने वाली तीन विशेष चीजें।

प्रदोष व्रत का तिथि और मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल सावन का पहला प्रदोष व्रत 22 जुलाई दिन मंगलवार को है। कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भौम प्रदोष व्रत है जिसका आरंभ 22 जुलाई को सुबह 7 बजकर 5 मिनट पर होगा जो 23 जुलाई को सुबह 4 बजकर 39 मिनट कर रहेग। सूर्योदय में शुभ मुहूर्त होने की वजह से 22 जुलाई को प्रदोष व्रत रखा जाएगा।
प्रदोष व्रत का महत्व
प्रदोष व्रत हिंदू धर्म में एक अत्यंत पुण्यदायक और प्रभावशाली व्रत माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से भगवान शिव और मां पार्वती को समर्पित होता है और हर महीने के त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। जब यह व्रत सोमवार, मंगलवार या शनिवार को पड़ता है, तब इसका महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। 22 जुलाई 2025 को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष व्रत है। इस दिन व्रत रखने से और सच्चे मन से पूजा करने से पारिवारिक कलह, भूमि विवाद और कर्ज से मुक्ति मिलती है।

इन तीन चीजों से करें जलाभिषेक भोले बाबा होंगे प्रसन्न
1. कच्चा दूध
शिवलिंग पर कच्चा दूध अर्पित करने से मानसिक शांति मिलती है और वाणी में मधुरता आती है।
2. गंगाजल
गंगाजल से अभिषेक करने पर सभी पापों का क्षय होता है और जीवन में पवित्रता आती है।
3. शहद
शिवलिंग पर शहद चढ़ाने से संबंधों में मधुरता आती है और वैवाहिक जीवन में शांति बनी रहती है।
प्रदोष व्रत पूजन विधि
सुबह उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
शिवलिंग का दूध, जल, शहद से अभिषेक करें।
बेलपत्र, धतूरा, भस्म, चंदन और अक्षत अर्पित करें।
'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें और शिव चालीसा या प्रदोष व्रत कथा पढ़ें।
विधि-विधान से पूजा करें और दिनभर व्रत रखें।
प्रदोष व्रत की पूजा शाम के समय होती है इसलिए शाम को साफ कपड़े पहनकर पूजा-पाठ करें।



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