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Sawan Pradosh Vrat 2026: सावन के पहले सोमवार पर 6 साल बाद बन रहा है बेहद शुभ संयोग! जानें पूजा का शुभ मुहूर्त
Sawan Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। यह व्रत हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। महादेव का प्रिय महीना सावन भी शुरू हो चुका है। आज सावन माह के कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि और सोमवार है। ऐसे में, आज सावन का पहला सोम प्रदोष है, जिसे इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, 6 साल बाद सोम प्रदोष व्रत और सावन सोमवार का संयोग बन रहा है। ऐसे में, इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। आइए जानते हैं प्रदोष व्रत की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि के बारे में -

सावन प्रदोष व्रत तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 10 अगस्त 2026, सोमवार को सुबह 8 बजे से होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 11 अगस्त 2026, मंगलवार को 4 बजकर 55 मिनट पर होगा। चूंकि प्रदोष व्रत हमेशा प्रदोष काल में आने वाली त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है, इसलिए इस बार प्रदोष व्रत 10 अगस्त 2026 को रखा जाएगा।
सोम प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त
सावन सोम प्रदोष व्रत पर पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 7 बजकर 05 मिनट से लेकर रात 09 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में पूजा करना शुभ और फलदायी होता है।
प्रदोष व्रत का महत्व
प्रदोष व्रत, भगवान शिव की पूजा और उपासना के लिए विशेष शुभ माना जाता है। सावन में प्रदोष व्रत आने से इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही, भोलेनाथ की कृपा से सभी मनोकामनाओं पूरी होती हैं। जो लोग अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र, संतान सुख और आर्थिक लाभ की कामना करते हैं, उनके लिए यह व्रत विशेष रूप से लाभकारी होता है।
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
इसके बाद व्रत का संकल्प लें और सुबह के समय भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें।
शाम को प्रदोष काल में एक लकड़ी की चौकी पर भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
इसके बाद भगवान शिव के का पंचामृत से अभिषेक करें और फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं।
शिव जी को बेलपत्र, शमीपत्र, भांग, धतूरा, सफेद पुष्प, फल, धूप, दीपक और सफेद चंदन आदि अर्पित करें।
पूजा के दौरान "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जप करें
इस दिन शिव-पार्वती को सफेद मिष्ठान या सफेद वस्तुओं का भोग लगाएं।
इसके बाद प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें।
अंत में घी के दीपक से आरती करें और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए भगवान से प्रार्थना करें।



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