Latest Updates
-
Jitiya Vrat 2026: कब है जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत? जानें सही तारीख, और नहाय-खाय से लेकर पारण तक का समय -
लाखों में बिकती है दुनिया की सबसे महंगी कॉफी, लेकिन बनाने का प्रोसेस जानकर फ्री में भी पीने से करेंगे तौबा! -
पाम ऑयल क्या होता है और इसे खाने से क्या नुकसान होते हैं? जानिए इससे शरीर पर क्या असर होता है -
October 2026 Vrat Tyohar List: नवरात्रि, दशहरा से करवा चौथ तक, यहां देखें व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट -
जुबिन नौटियाल बने पापा, पत्नी ने दिया बेटे को जन्म, गणेश चतुर्थी पर घर आया नन्हा मेहमान -
'मन की बात' में PM मोदी ने बताया क्यों इतना खास है आंवला, जानिए इसके 5 जबरदस्त फायदे और सेवन का सही तरीका -
World Heart Day 2026: क्रॉनिक स्ट्रेस बन सकता है हार्ट अटैक और स्ट्रोक की वजह, डॉक्टर से जानें बचाव के तरीके -
Pitru Paksha 2026: गया जी के इस मंदिर में जिंदा लोग खुद करते हैं अपना पिंडदान, बेहद अनोखी है मान्यता -
दिल को हेल्दी रखते हैं ये 5 योगासन, हार्ट अटैक से बचने के लिए आज से ही बना लें रूटीन का हिस्सा -
World Heart Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व हृदय दिवस? जानें इसका इतिहास, महत्व और इस साल की थीम
National Engineers Day 2026: 15 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है इंजीनियर्स डे? जानिए इसका इतिहास और महत्व
National Engineers Day 2026: हर साल 15 सितंबर को देशभर में नेशनल इंजीनियर्स डे मनाया जाता है। यह दिन भारत के महान इंजीनियर और भारत रत्न से सम्मानित सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती को समर्पित है। इंजीनियर्स डे के लिए 15 सितंबर की तारीख इसलिए चुनी गई, क्योंकि इसी दिन साल 1861 में सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म कर्नाटक के चिक्काबल्लापुर जिले के मुद्देनहल्ली गांव में हुआ था। इंजीनियरिंग और देश के विकास में उनके महत्वपूर्ण योगदान के कारण उन्हें आज भी भारत के प्रमुख इंजीनियरों में गिना जाता है। सर एम। विश्वेश्वरैया को आधुनिक मैसूर के निर्माण और विकास में उनकी अहम भूमिका के लिए याद किया जाता है। उनके काम और योगदान को सम्मान देने के लिए उनके जन्मदिन को इंजीनियर्स डे के रूप में मनाने की शुरुआत साल 1968 में हुई। तब से हर वर्ष 15 सितंबर को देश के इंजीनियरों के योगदान और उनकी भूमिका को सम्मानित किया जाता है।

नेशनल इंजीनियर्स डे के लिए 15 सितंबर ही क्यों चुना गया?
15 सितंबर को इंजीनियर्स डे मनाने की वजह सिर्फ सर एम। विश्वेश्वरैया की जयंती नहीं है, बल्कि इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उनके असाधारण काम भी इसके पीछे बड़ी वजह हैं। उनके योगदान को तीन प्रमुख हिस्सों में समझा जा सकता है।
देश के महान इंजीनियरों में शामिल थे सर विश्वेश्वरैया
सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया ने इंजीनियरिंग के साथ-साथ अर्थव्यवस्था, प्रशासन और देश के विकास से जुड़े क्षेत्रों में भी काम किया। वह योजनाबद्ध तरीके से विकास करने में विश्वास रखते थे। उनका मानना था कि विज्ञान हमें ज्ञान देता है, जबकि इंजीनियरिंग उस ज्ञान को वास्तविक काम में बदलती है। उनके इसी सोच और काम करने के तरीके ने उन्हें देश के प्रमुख इंजीनियरों में जगह दिलाई।
जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण में अहम काम
सर विश्वेश्वरैया ने पानी के बेहतर इस्तेमाल और बाढ़ से बचाव के लिए कई महत्वपूर्ण काम किए। साल 1903 में उन्होंने 'ब्लॉक सिस्टम' तैयार किया, जो पानी के स्तर को नियंत्रित करने वाला ऑटोमेटिक फ्लडगेट सिस्टम था। इसे सबसे पहले पुणे के खड़कवासला जलाशय में इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा, मैसूर में कृष्णा राजा सागर यानी KRS बांध के निर्माण में भी उनकी अहम भूमिका रही। उस दौर में इसे एशिया के बड़े जलाशयों में गिना जाता था। हैदराबाद को मूसी नदी की बाढ़ से बचाने के लिए उस्मान सागर और हिमायत सागर जैसे जलाशयों के निर्माण तथा विशाखापत्तनम बंदरगाह को समुद्री कटाव से बचाने की व्यवस्था में भी उनके योगदान को याद किया जाता है।
आधुनिक मैसूर के विकास में बड़ी भूमिका
साल 1912 से 1918 के बीच मैसूर के दीवान के रूप में काम करते हुए विश्वेश्वरैया ने शिक्षा, उद्योग और विकास से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाया। उनके प्रयासों से मैसूर को एक विकसित और व्यवस्थित राज्य के रूप में आगे ले जाने की कोशिश हुई। इसी योगदान के कारण उन्हें 'फादर ऑफ मॉडर्न मैसूर' भी कहा जाता है। उनके योगदान को देखते हुए साल 1955 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। इससे पहले ब्रिटिश सरकार ने उन्हें 'नाइट' की उपाधि दी थी, जिसके बाद उनके नाम के साथ 'सर' लगाया जाने लगा।
इंजीनियर्स डे का महत्व
आज इंजीनियरिंग का क्षेत्र तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और डिजिटल इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत दुनिया के करीब 20 प्रतिशत चिप डिजाइन इंजीनियरों का घर है और AI स्किल के मामले में भी देश की स्थिति मजबूत है। ऐसे समय में 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को पूरा करने में इंजीनियरों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। इसलिए 15 सितंबर सिर्फ सर विश्वेश्वरैया की जयंती याद करने का दिन नहीं, बल्कि देश के विकास में योगदान देने वाले इंजीनियरों के काम को सम्मान देने का अवसर भी है।



Click it and Unblock the Notifications
