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Shab-e-Qadr Ki Dua : शब-ए-कद्र पर कौन सी दुआ पढ़नी चाहिए, जानें नमाज अदा करने का तरीका
Laylat al-Qadr Ki Dua 2025 : रमजान का आखिरी अशरा अपने चरम पर पहुंचता है तो उसमें एक खास और मुकद्दस रात आती है, जिसे शब-ए-कद्र (Laylat al-Qadr) कहा जाता है। यह रात इस्लाम में सबसे ज्यादा अजीम (महान) और बरकतों से भरपूर मानी जाती है। इसी रात अल्लाह तआला ने कुरआन-ए-पाक को अपने आखिरी रसूल हजरत मुहम्मद मुस्तुफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर नाजिल फरमाया था। इस रात की इबादत का सवाब 83 साल और 4 महीने की इबादत के बराबर होता है।

शब-ए-कद्र की पहचान
हदीस के मुताबिक, शब-ए-कद्र को रमजान के आखिरी दस दिनों (21, 23, 25, 27, और 29वीं रातों) में तलाश करना चाहिए। इस रात को पहचानने के कुछ संकेत बताए गए हैं-
- इस रात आसमान खुला और साफ होगा।
- हल्की ठंडी हवा चलेगी, न ज्यादा गर्मी होगी और न ज्यादा ठंड।
- चाँदनी की रोशनी ज्यादा उजली लगेगी।
- सुबह का सूरज बिना तेज किरणों के निकलेगा।
शब-ए-कद्र की इबादत और नमाज
इस मुबारक रात में ज्यादा से ज्यादा इबादत, तिलावत, जिक्र और दुआएं करनी चाहिए। इस रात में पढ़ी जाने वाली खास नमाजें और इबादतें-
तहज्जुद की नमाज - आधी रात के बाद उठकर अल्लाह की रहमत मांगनी चाहिए।
सालातुल तस्बीह - यह खास नफ्ल नमाज है जो गुनाहों की माफी के लिए पढ़ी जाती है।
सालातुल हाजत - अपनी जरूरतों के लिए यह नमाज पढ़ी जाती है।
नफ्ल नमाज - 2, 4, 8, 12 या 20 रकात अदा की जा सकती हैं।
शब-ए-कद्र की खास दुआइस रात में अल्लाह से गुनाहों की माफी मांगने के लिए यह दुआ पढ़नी चाहिए-
अरेबिक में
اللّٰہُمَّ اِنَّکَ عَفُوْنَ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِی ۔
हिंदी में
"ए अल्लाह! तू माफ करने वाला है और तू माफ करना पसंद करता है, हमें माफ फरमा।"
इंग्लिश में
"Allahumma innaka afuwwun tuhibbbbul afwa fa'Afu anni."
निष्कर्ष
शब-ए-कद्र की रात एक नेमत और बरकत से भरी रात होती है। इस रात में किए गए हर नेक अमल का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। हमें इस मुबारक रात में खुदा से गुनाहों की माफी मांगनी चाहिए और अपनी दुआओं में पूरी इंसानियत के लिए भलाई की फरियाद करनी चाहिए।



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