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Shani Jayanti 2023 : औरतें शनि देव की पूजा कर सकती हैं या नहीं? शनिदोष दूर करने के लिए क्या करें महिलाएं
Shani Jayanti 2023 : शास्त्रों में शनि देव को कर्मों और न्याय का देवता माना गया है। शनि देव की पूजा से कुंडली में मौजूद शनि की महादशा, ढैय्या और साढ़े साती से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा शनि को क्रूर ग्रह भी माना जाता है इसलिए इनकी पूजा करते वक्त विशेष ध्यान रखना पड़ता है, खासकर महिलाओं को।
शनिपूजा को लेकर हमेशा से ये बहस का मुद्दा रहा है कि महिलाओं को शनिदेव की पूजा करनी चाहिए या नहीं? आइए जानते हैं कि कुंडली में शनि दोष होने पर महिलाएं कैसे करें इसका निवारण?
महिलाएं कर सकती है पूजा?
शनि देव की पूजा करते वक्त बेहद सावधानी रखनी होती है। पूजा के वक्त की गई एक गलती भी आपको संकट के घेरे में डाल सकता है। जहां तक बात महिलाओं द्वारा शनि देव की पूजा करने की है तो कुंडली में शनि की बुरी स्थिति से बचने के लिए उनकी आराधना कर सकती हैं। शनि की कुदृष्टि से निजात पाने के उपाय कर सकती हैं लेकिन कुछ नियमों को ध्यान में रखना जरुरी है।

इन बातों का रखें ध्यान
* महिलाएं जब शनि दोष या फिर शनि की महादशा से निजात पाने के लिए उनकी आराधना कर सकती है।
* शनि देव की पूजा करते वक्त महिलाओं को शनिदेव की मूर्ति को स्पर्श नहीं करना चाहिए, शास्त्रों की मानें तो ऐसा करने से महिलाओं पर शनि की नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव पड़ता है।
* शास्त्रों के अनुसार महिलाओं का शनि देव की मूर्ति पर तेल चढ़ाना भी वर्जित है।
शनि को प्रसन्न करने के लिए महिलाएं पीपल के पेड़ के नीचे तेल का दीपक लगाएं या फिर शनि मंदिर मेंदीपक लगा सकती हैं।
* शनि की कृपा पाने के लिए महिलाएं शनि मंदिर में शनि चालीसा का पाठ करने से शनिदोष जल्दी खत्म होता है।
* शनि दोष को शांत करने के लिए शनिवार के दिन महिलाओं को शनि से संबंधित चीजें जैसे सरसों का तेल, काले कपड़े, काले जूते, लोहे का बर्तन, काली उड़द, काला तिल का दान करना चाहिए।
क्यों महिलाएं नहीं चढ़ा सकती है शनिदेव को तेल?
महिलाएं शनिदेव को तेल नहीं चढ़ा सकती हैं? इसके पीछे की वजह दरअसल उनकी पत्नी द्वारा दिया गया श्राप है। ब्रह्मपुराण के अनुसार इनके पिता ने चित्ररथ की कन्या से इनका विवाह कर दिया। इनकी पत्नी परम तेजस्विनी थी। एक रात वे पुत्र-प्राप्ति की इच्छा से इनके पास पहुंचीं, लेकिन शनिदेव तो ध्यान में निमग्न थे। पत्नी प्रतीक्षा करके थक गई। उसका ऋतुकाल निष्फल हो गया। इसलिए पत्नी ने क्रुद्ध होकर शनिदेव को शाप दे दिया
कि आज से जिसे तुम देख लोगे, वह नष्ट हो जाएगा। लेकिन बाद में पत्नी को अपनी भूल पर पश्चाताप हुआ, किंतु शाप के प्रतीकार की शक्ति उसमें न थी, तभी से शनि देवता अपना सिर नीचा करके रहने लगे। क्योंकि ये नहीं चाहते थे कि इनके द्वारा किसी का अनिष्ट हो। यही कारण है कि शनिदेव की नजर अशुभ मानी जाने लगी। इसी कारण परंपरावश शनि देव की मूर्ति पर स्त्री को तेल नहीं चढ़ाना चाहिए, क्योंकि यह भय है कि कही शनिदेव की क्रूर दृष्टि किसी महिला पर पड़ गई, उसका अनिष्ट न हो जाएगां।



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