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Shani Jayanti 2023: शनिदेव की आंखों में क्यों नहीं देखना चाहिए, जानिए इसके पीछे की पौराणिक वजह
Shani Jayanti 2023: शनि देव भगवान सूर्य और छाया के पुत्र माने जाते हैं। इनकी पूजा करते समय नियमों का ध्यान रखना बेहद जरुरी होता है वरना शनिदेव क्रोधित हो जाते हैं। शनिदेव को क्रूर ग्रह माना जाता है, क्योंकि ये जिस भी जातक के कुंडली में ये विराजमान होते हैं, उसे बहुत कष्ट भुगतना होता है।
लेकिन शनिदेव की विधिवत पूजा करने से इन्हें प्रसन्न किया जा सकता है और कई कष्टों से मुक्ति पाई जा सकती है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि शनिदेव की मूर्ति की पूजा हमेशा मंदिरों में ही की जाती है!

शनिदेव की मूर्ति न तो कोई अपने घर में लाता है और न ही लोग पूजा करते समय उनकी आंखों को देखते हैं। आइए आपको बताते हैं ऐसा क्यों होता है? धार्मिक मान्यता है कि शनिदेव की आंखों में आंखें डालकर नहीं देखना चाहिए क्योंकि एक श्राप की वजह से वह जिस पर भी अपनी दृष्टि डालेंगे, उसे अवश्य ही कष्ट होगा।
उनकी नजरों से दूर रहने के लिए लोग उनकी मूर्ति को घर में नहीं रखते हैं। यही कारण है कि लोग शनिदेव की पूजा उनके सामने खड़े होकर या उनकी ओर सीधे देखते हुए नहीं करते हैं।
पत्नी से मिला श्राप है वजह
ब्रह्मपुराण के अनुसार इनके पिता ने चित्ररथ की कन्या से इनका विवाह कर दिया। इनकी पत्नी परम तेजस्विनी थी। एक रात वे पुत्र-प्राप्ति की इच्छा से इनके पास पहुंचीं, लेकिन शनिदेव तो ध्यान में निमग्न थे। पत्नी प्रतीक्षा करके थक गई। उसका ऋतुकाल निष्फल हो गया। इसलिए पत्नी ने क्रुद्ध होकर शनिदेव को शाप दे दिया
कि आज से जिसे तुम देख लोगे, वह नष्ट हो जाएगा। लेकिन बाद में पत्नी को अपनी भूल पर पश्चाताप हुआ, किंतु शाप के प्रतीकार की शक्ति उसमें न थी, तभी से शनि देवता अपना सिर नीचा करके रहने लगे। क्योंकि ये नहीं चाहते थे कि इनके द्वारा किसी का अनिष्ट हो। यही कारण है कि शनिदेव की नजर अशुभ मानी जाने लगी।
शनि की दृष्टि से कट गया था भगवान गणेश का सिर-
यह भी माना जाता है कि शनि की दृष्टि के कारण भगवान गणेश का सिर धड़ से अलग हो गया था। इसके पीछे एक कथा है कि जब देवी पार्वती ने अपने शरीर के मैल से अपने पुत्र गणेश को बनाया तो शिवलोक में एक उत्सव हुआ। सभी देवता उन्हें अपना आशीर्वाद देने आए लेकिन शनिदेव उन्हें देखे बिना ही वहां से लौटने लगे। तब देवी पार्वती ने भगवान शनि से पूछा कि क्या वह अपने पुत्र को देखे बिना वापस लौट जाएंगे।
भगवान शनि ने उनसे आग्रह किया कि उनका दर्शन करना शुभ नहीं है। तब माता पार्वती ने कहा कि हो सकता है कि आप मेरे पुत्र बनकर खुश न हों, लेकिन मेरी आज्ञा है कि आप इसे देखें और अपना आशीर्वाद दें। शनिदेव ने उनकी आज्ञा का पालन करने के लिए भगवान गणेश पर अपनी दृष्टि डाली और कहा जाता है कि शनिदेव की दृष्टि पड़ने के बाद ही भगवान गणेश का सिर कटने की घटना घटी, जिसके बाद भगवान गणेश को एक हाथी का सिर दिया गया और जल्द ही उन्हें गजानन नाम दिया गया।



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