Latest Updates
-
बारिश के मौसम में सर्दी-खांसी और गले की खराश से हैं परेशान तो आजमाएं ये 5 घरेलू उपाय, मिलेगी तुरंत राहत -
Sawan 2026 Shivling Puja Vidhi: शिवलिंग पर सबसे पहले क्या चढ़ाना चाहिए? जानिए सावन में जलाभिषेक का सही तरीका -
Radhika Ambani Look: लंदन में Dior की सिंपल सी ड्रेस पहन छाईं राधिका अंबानी, लेकिन कीमत सुन उड़ जाएंगे आपके होश -
Sawan First Somwar 2026: सावन का पहला सोमवार आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और व्रत के जरूरी नियम -
Happy Sawan Somwar 2026 Wishes: शिव का नाम...सावन के पहले सोमवार पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामनाए संदेश -
बारिश के मौसम में तेजी से बढ़ रहा है वायरल फीवर का खतरा, जानिए लक्षण और बचाव के उपाय -
Friendship Day Wishes For Best Friend: इन संदेशों के जरिए बेस्ट फ्रेंड को दें फ्रेंडशिप डे की बधाई -
Happy Friendship Day 2026 Wishes: तेरी मेरी यारी...इन संदेशों के साथ दोस्तों को दें फ्रेंडशिप डे की शुभकामनाएं -
आगरा की अवनी गुप्ता ने Miss Supranational 2026 में बढ़ाया भारत का मान, कॉर्पोरेट जॉब छोड़ बनाई टॉप 12 में जगह -
सावन में भूलकर भी न करें इन चीजों का सेवन, एक्सपर्ट से जानें सावन में क्या खाएं और क्या नहीं
Shani Jayanti 2024: शनि देव की पत्नी ने ही क्यों दिया उन्हें श्राप, शनि की टेढ़ी दृष्टि से क्या है इसका संबंध
Shani Dev Ki Katha: शनि जयंती, हिन्दू धर्म के महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह पर्व हिन्दू कैलेंडर के मास ज्येष्ठ की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है। इस दिन भगवान शनि की पूजा और उनके आशीर्वाद का आदर्श किया जाता है।
भगवान शनि हिन्दू पंथ में एक प्रमुख देवता हैं, जो कर्मों के देवता के रूप में जाने जाते हैं। शनि जयंती के दिन लोग भगवान शनि की पूजा और अर्चना करते हैं। इस दिन लोग उनकी कृपा और आशीर्वाद की कामना करते हैं ताकि उनके कर्मों का फल सदैव उनके हित में हो।

इस वर्ष शनि जयंती का पावन पर्व बहुत जल्द आने वाला है। सनातन धर्म में शनि जयंती का बहुत ही अत्यधिक महत्व है। इस वर्ष शनि जयंती 6 जून दिन गुरुवार को है और इसके साथ ही 6 जून को ही वट सावित्री व्रत भी रखा जाएगा। शनि देव से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं। शनि जयंती के मौके पर जानते हैं कि आखिर शनि देव की पत्नी ने उन्हें किस कारण श्राप दे दिया था।
शनि देव को क्यों उनकी ही पत्नी ने दिया श्राप
ब्रह्म पुराण के मुताबिक शनिदेव बालपन से ही कृष्ण भक्त थे। भगवान शनि देव का विवाह चित्ररथ नामक स्त्री के साथ हुआ था। चित्ररथ बहुत सरल, सहज, ज्ञानी, प्रतिभाशाली तथा पतिव्रता स्वभाव की स्त्री थी। चित्ररथ पुत्र प्राप्ति के लिए भगवान शनि देव के पास पहुँची। उस समय भी शनि देव भगवान कृष्ण का ध्यान कर रहे थे। उस दौरान उन्होंने ध्यान मुद्रा को ना भंग करते हुए अपने पत्नी चित्ररथ की ओर नहीं देखा।
चित्ररथ को यह व्यवहार अपना अपमान लगा। इस अपमान के कारण उन्होंने शनिदेव को श्राप दे दिया और कहा कि आज के बाद आप जिसकी ओर देखोगे वह तुरंत ही नष्ट हो जाएगा। अपनी पत्नी की बातों को सुनकर शनि देव का ध्यान भंग हुआ और शनि देव को अपनी गलती पर बहुत ही पश्चाताप भी हुआ, लेकिन चित्ररथ के पास श्राप का कोई समाधान नहीं था। इसी कारण शनि देव हमेशा सर झुका कर चलते हैं। ताकि उनकी नजर किसी पर न पड़े और किसी को क्षति न हो।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications