Latest Updates
-
सुबह खाली पेट जौ का पानी पीने से दूर होंगी ये 5 समस्याएं, जानें इसे बनाने का तरीका -
Baglamukhi Jayanti 2026: बगलामुखी जयंती कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
फैटी लिवर में कौन सा योग करें? जानें लिवर को साफ और मजबूत रखने के लिए योगासन -
May 2026 Vrat Tyohar: वट सावित्री, शनि जयंती सहित मई माह में पड़ रहे हैं कई व्रत-त्योहार, देखें पूरी लिस्ट -
Swapna Shastra: सपने में मरे हुए व्यक्ति को देखने का क्या मतलब होता है? जानें ये शुभ होता है या अशुभ -
Bael Juice Benefits: गर्मियों में रोजाना पिएं एक गिलास बेल का जूस, सेहत को मिलेंगे ये 5 फायदे -
Who Is Divyanka Sirohi: कौन हैं एक्ट्रेस दिव्यांका सिरोही? जिनका 30 साल की उम्र में हार्ट अटैक से हुआ निधन -
Kedarnath Yatra 2026: केदारनाथ यात्रा आज से शुरू, रजिस्ट्रेशन से हेलीकॉप्टर बुकिंग तक जानें सभी जरूरी नियम -
बालों की ग्रोथ के लिए इस तरह करें केले के छिलके का इस्तेमाल, कुछ ही दिनों में घुटनों तक लंबे हो सकते हैं बाल -
दीपिका कक्कड़ की MRI रिपोर्ट में मिले 2 नए सिस्ट, अब होगी इम्यूनोथेरेपी, जानें क्या है ये ट्रीटमेंट
Shardiya Navratri 2023: इन 5 चीजों के बिना अधूरी है नवरात्रि पूजा, मां दुर्गा की कृपा के लिए जरूरी हैं ये काम
Shardiya Navratri 2023: जिन त्योहारों का इंतज़ार पूरे साल रहता है, उनका आगमन हो चुका है। अक्टूबर और नवम्बर माह में हिन्दू धर्म के सभी ख़ास त्योहारों की झड़ी लग जाती है। इसकी शुरुआत शारदीय नवरात्रों से होगी फिर दशहरा, दिवाली, छठ जैसे पर्व आयेंगे।
शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 15 अक्टूबर से हो रही है। शारदीय नवरात्रों में नौ दिन मां दुर्गा के नौ अलग अलग रूपों की पूजा की जाती है। कई भक्त मां दुर्गा की अराधना में अखंड जोत जलाते हैं और इस अवधि में उपवास भी रखते हैं। नवरात्रि की पूजा के दौरान कुछ ख़ास बातों का ख्याल अवश्य रखना चाहिए, जानते हैं आगे -

हवन
किसी भी पूजा या उपवास को तब तक पूर्ण नहीं माना जाता है जब तक हवन ना किया जाएँ। नवरात्रि की नौ दिनों की पूजा और व्रत का अंत हवन के साथ किया जाना चाहिए। नवमी के दिन मां दुर्गा के नाम का हवन करना चाहिए, इससे घर में सकारात्मकता और अच्छी ऊर्जा का प्रसार होता है।
घट स्थापना
नवरात्रि की पूजा में कलश की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कलश यानी घट स्थापना नवरात्रि के पहले दिन की जाती है। इसे देवी मां की शक्ति के प्रतीक के तौर पर स्थापित किया जाता है। कलश में गंगाजल डालकर उसे केले के पत्तों से ढके, और उसके ऊपर नारियल व फूल रखें। नारियल पर एक लाल वस्त्र या चुनरी को बांधें।

मां की आरती
नवरात्रि के हर दिन की शुरुआत मां की आरती से ही करें। इसके साथ ही उपवास रखने से पहले भी मां कीई आरती ज़रूर करें। मां दुर्गा की विधिवत पूजा और आरती करके नवरात्रि को सफ़ल बनाएं।
मां का शृंगार
मां दुर्गा की पूजा में उनका 16 श्रृंगार बहुत ज़रूरी होता है। मां के श्रृंगार में बिंदी, सिन्दूर, लाल चूड़ियाँ, मेहंदी, बाजूबंद, मांग टीका, काजल, नथ, झुमके, लाल चुनरी, कुमकुम, पायल, बिछिया, और मंगल सूत्र ज़रूर शामिल करें।
कन्या पूजन
नवरात्रि की पूजा कन्या पूजन के साथ समाप्त होती है। कन्याओं को देवी का रूप माना जाता है, इसलिए नवरात्रि के आखिरी दिन उनका पूजन और उनको खाना खिलाया जाता है। अष्टमी या नवमी के दिन छोटी कन्याओं का पूजन किया जाता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications