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Shiva Temple: जानिये एक ऐसे मंदिर के बारे में जहां नंदी बैठे नहीं खड़े रहते हैं
आज तक आपने जितने भी शिव मंदिर देखे होंगे वहां नंदी जरुर मिलते हैं। वास्तव में शिव से पहले नंदी के दर्शन हो जाते हैं। नंदी शिव के वाहन हैं और शिव को बहुत प्रिय हैं।
यहां तक की कई श्रद्धालुओं का मानना है कि शिव से कुछ मांगना हो तो नंदी के कान में कहना चाहिए, फिर नंदी उनकी इच्छा शिवजी तक पहुंचाते हैं और नंदी द्वारा मांगी गयी चीज शिव इंकार नहीं करते हैं।

नंदी के बारे में एक महत्वपूर्ण बात ये हैं कि किसी भी शिव मंदिर में आपको नंदी बैठे हुए ही मिलेंगे। लेकिन मध्य प्रदेश में एक मंदिर है जहां नंदी खड़े रहते हैं। है न रोचक? तो आइये आपको बताते हैं उस मंदिर और इससे जुड़ी कथा के बारे में।
मध्यप्रदेश के उज्जैन में जहां प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर है, वहां महर्षि संदीपनी का आश्रम है। इस आश्रम के बारे में कहा जाता है कि इसी आश्रम में कृष्ण और सुदामा ने शिक्षा प्राप्त की थी। इसी आश्रम में एक शिव मंदिर है जिसे पिन्देश्वर महादेव मंदिर कहते हैं। जब आप शिव मंदिर में जायेंगे तो हैरान रह जायेंगे, ये देखकर की यहां नंदी बैठे नहीं बल्कि खड़े हुए मिलते हैं।
लोकप्रिय कथा के अनुसार, जब इस संदीपनी आश्रम में कृष्ण शिक्षा प्राप्त कर रहे थे तो उन्होंने सिर्फ 64 दिनों में 64 विद्या और 16 कलाओं में महारत हासिल कर ली थी। अब कृष्ण थे तो स्वयं श्री हरि और बाल रूप में अपनी लीला कर रहे थे। शिव को श्री हरि की लीला देखने की प्रबल इच्छा थी, सो वो संदीपनी आश्रम में कृष्ण की लीला देखने पहुंच गए। जैसे ही वे आश्रम पहुंचे तो नंदी के लिए असमंजस की स्थिति हो गयी। श्री हरि, शिव और संदीपनी ऋषि तीनों को एक साथ देख उनके सम्मान में नंदी बैठे ही नहीं, खड़े ही रहे। तभी से उस आश्रम में शिव का मंदिर बनने के बाद नंदी की मूर्ति को खड़ा ही रखा गया है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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