Shiva Puja: शिवलिंग पर इन चीजों को चढ़ाने की है मनाही, इस महापाप से बचने के लिए जरूर जानें शिव पुराण का नियम

Shivling Par Kya Nahi Chadhana Chahiye: सावन का पवित्र महीना जारी है और इस वर्ष दो माह लंबा श्रावण चल रहा है, जिसमें से एक महीना खत्म हो चुका है। 31 अगस्त तक सावन माह जारी रहेगा।

सावन की पूरी अवधि महादेव शिव को समर्पित होती है। सभी पूजा, व्रत और अनुष्ठान उन्हीं के लिए किये जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं में शिव को शिप्रा प्रसादी कहा गया है जिसका अर्थ होता है आसानी से प्रसन्न होने वाले देव।

Shivling Abhishek: Never Offer These Things to lord Shiva according to Shiva Puran

शिव की भक्ति में बहुत शक्ति होती है, और सच्चे मन से व्रत और आराधना से ही शिव कृपा प्राप्त हो जाती है। लेकिन शिव का क्रोध भी अत्यधिक तेज़ होता है, और ऐसा कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए जो उनको क्रोधित कर दे।

शिवलिंग पर किन चीज़ों का अभिषेक करें इसका बेहद ख़ास ख्याल रखना चाहिए। जानते हैं शिव पुराण के अनुसार शिव अभिषेक के समय ध्यान रखने वाली महत्वपूर्ण चीज़ें -

गलती से भी ना चढ़ाएं तुलसी

तुलसी के वृंदा रूप के पति जालंधर की हत्या महादेव शिव ने की थी। दरअसल जालंधर एक असुर था जिसकी शक्ति उसकी वृंदा के पतिव्रता धर्म में निहित थी और उसने इस शक्ति का गलत फायदा उठाकर तीनों लोकों पर राज करने के उद्देश्य से आक्रमण किया था। ऐसे में महादेव शिव ने जालंधर का वध किया था। तभी से तुलसी को शिव से नाराज़ माना जाता है और शिव पूजन में तुलसी का प्रयोग नहीं किया जाता है।

हल्दी

शिवलिंग पर हल्दी का अभिषेक या पूजन में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। हल्दी को स्त्रीत्व प्रकृति का माना जाता है। साथ ही यह सौन्दर्य बढ़ाने के लिए भी उपयोग में लायी जाती है। वहीं शिवलिंग को पौरुषत्व का प्रतीक माना जाता है, इसलिए हल्दी जैसी चीज़ को शिवलिंग पर नहीं चढ़ाया जाना चाहिए।

सिन्दूर और कुमकुम

सिन्दूर को सोलह श्रृंगार का सबसे अहम हिस्सा माना गया है। यह सौन्दर्य के साथ साथ शगुन (शुभता) का भी प्रतीक होती है। वहीं शिव एक वैरागी की तरह भी पूजे जाते हैं। उन्हें शक्ति, रौद्र रूप और पौरुषता का संकेत माना जाता है। इसलिए महादेव शिव स्वयं पर भस्म लगाते हैं, और कई मंदिरों में महाकाल की भस्मारती भी की जाती है।

केतकी फूल

एक बार ब्रह्मा और विष्णु के बीच इस बात को लेकर लड़ाई हुई कि कौन सर्वोत्तम है। इसके मुकाबले में केतकी के फूल ने ब्रह्मा के झूठ में साथ दिया था। तभी से भगवान शिव केतकी से नाराज़ हो गए और अपने पूजन में कभी भी केतकी का फूल शामिल करने से इनकार कर दिया।

पूरी परिक्रमा ना लें

शिव पुराण के अनुसार शिवलिंग की पूजा के बाद कभी भी पूर्ण परिक्रमा नहीं करनी चाहिए। हमेशा आधी परिक्रमा लेकर वापस से अपने शुरूआती स्थान पर जाकर खड़े हो जाना चाहिए। शिवलिंग की पूरी परिक्रमा अशुभ मानी जाती है।

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

Story first published: Saturday, August 5, 2023, 18:00 [IST]
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