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इस वर्ष अक्षय तृतीया की ये है तारीख, भूल से भी ये काम करके मां लक्ष्मी को न करें नाराज
हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का दिन बहुत ही शुभ माना गया है। अक्षय तृतीया एक ऐसी तिथि है जिसमें किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए पंचांग देखने की जरुरत नहीं पड़ती है। इस दिन किया गया कोई भी कार्य निष्फल नहीं होता है। इस साल अक्षय तृतीया 26 अप्रैल, रविवार को पड़ रही है। ऐसी मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन कमाया गया लाभ अक्षय रहता है अर्थात वो कभी नष्ट नहीं होता है। जानते हैं अक्षय तृतीया के दिन किस शुभ मुहूर्त पर माता लक्ष्मी की पूजा करें और कौन से कामों को करने से बचें।

अक्षय तृतीया का शुभ मुहूर्त
तृतीया तिथि प्रारंभ: 11:50 बजे (25 अप्रैल 2020, शनिवार)
तृतीया तिथि समापन: 13:21 बजे (26 अप्रैल 2020, रविवार)

अक्षय तृतीया के दिन इन कामों को करने से बचें
जिस तरह ये माना जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन कमाया गया दान पुण्य का फल कभी नष्ट नहीं होता है, ठीक उसी तरह इस दिन आपके द्वारा किये गए पापों से भी कभी मुक्ति नहीं मिलती है। अक्षय तृतीया के दिन व्यक्ति को किसी पर भी अत्याचार या दूसरों का नुकसान करने से बचना चाहिए। इस दिन व्यक्ति द्वारा किये बुरे कर्मों के कारण उसके कमाए गए पुण्य कर्म भी बेकार चले जाते हैं। ऐसी भी मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन व्यक्ति द्वारा किये गए गलत कामों का फल उसे अपने हर जन्म में भोगना पड़ता है। अक्षय तृतीया के दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को नमक के सेवन से बचना चाहिए। इस दिन सेंधा नमक का सेवन भी न करें।

अक्षय तृतीया का है खास महत्व
हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष तृतीया को स्वयंसिद्ध मुहूर्त अथवा अक्षय तृतीया के रूप में मनाया जाता है। इस दिन किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए पंचांग या विशेष मुहूर्त देखने की जरुरत नहीं पड़ती है। पौराणिक ग्रंथों की मानें तो इस दिन किए गए शुभ कार्यों का अक्षय फल मिलता है। शादी-विवाह, धार्मिक अनुष्ठान, गृह प्रवेश, व्यापार की शुरुआत, जप-तप और पूजा-पाठ करने के लिए अक्षय तृतीया का दिन बहुत ही शुभ माना गया है। इस दिन दान-दक्षिणा और गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। मनचाहे जीवनसाथी और संतान सुख के लिए अक्षय तृतीया का व्रत रखना उचित माना गया है।

अक्षय तृतीया तिथि से जुड़ी प्रसिद्ध मान्यताएं
ऐसी मान्यता है कि सतयुग और त्रेतायुग का आगाज अक्षय तृतीया के दिन हुआ था।
अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। वे विष्णुजी के छठे अवतार और सात चिरंजीवी में एक हैं।
अक्षय तृतीया के शुभ दिन पर ही मां गंगा धरती पर पधारी थीं।
वेद व्यास जी ने महाभारत ग्रंथ लिखने की शुरुआत अक्षय तृतीया के दिन ही की थी।
अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर ही बद्रीनाथ धाम के कपाट खोले जाते हैं।



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