Latest Updates
-
Devshayani Ekadashi 2026 Niyam: देवशयनी एकादशी के दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं? जान लें व्रत के नियम -
कुदरत का अनोखा करिश्मा! महिला ने एक जैसी दिखने वाली चार जुड़वां बच्चियों को दिया जन्म, डॉक्टर भी हैरान -
Chaturmas 2026: चातुर्मास कब से शुरू होगा? इस दौरान क्या करें और क्या न करें? जानें सभी जरूरी नियम -
International Self Care Day: अच्छी सेहत के लिए सेल्फ-केयर है जरूरी, रोजाना अपनाएं ये 5 सेल्फ केयर हैबिट्स -
रात में राजमा भिगोना भूल गए? इन आसान ट्रिक्स से बिना भिगोए भी बन जाएगा एकदम नरम राजमा -
National Cousins Day 2026 Wishes: नेशनल कजिन्स डे पर अपने भाई-बहन भेजें ये खास मैसेज, यादगार बन जाएगा दिन -
CJP Protest Delhi: आलिया भट्ट से लेकर सलमान खान तक, छात्रों के समर्थन में उतरे ये बॉलीवुड सितारे -
Chia Seeds Vs Sabja Seeds: चिया सीड्स या सब्जा के बीज, जानिए आपकी सेहत के लिए क्या बेहतर? -
टूटते-झड़ते बालों से हैं परेशान? ट्राई करें गुड़हल और नारियल तेल से बना हेयर ऑयल, रुक जाएगा Hair Fall -
6 महीने के बच्चे को सॉलिड फूड देते समय न करें ये 5 गलतियां, 'बच्चों की डॉक्टर' ने बताई सही शुरुआत
Amalaki Ekadashi 2023: इस दिन आंवला वृक्ष की पूजा से पाएं साक्षात् भगवान विष्णु की कृपा, नोट करें तिथि
साल की सभी एकादशी तिथियां भगवान विष्णु को समर्पित हैं। सभी एकादशी तिथि में से आमलकी एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। आमलकी एकादशी फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पड़ती है। इस दिन को आंवला एकादशी, आमली ग्यारस, रंगभरनी एकादशी और कई स्थानों पर कुंज एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु और आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु को आंवले का वृक्ष बहुत प्रिय है। इस एकादशी का संबंध भगवान श्रीहरि के अलावा भगवान शिव से भी है। जानते हैं साल 2023 में आमलकी एकादशी व्रत की तिथि, पूजा मुहूर्त, पारण का समय और महत्व के बारे में।

आमलकी एकादशी 2023 तिथि और मुहूर्त
इस साल आमलकी एकादशी का व्रत 3 मार्च 2023 को शुक्रवार के दिन रखा जाएगा।
पंचांग के अनुसार फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुभारंभ 2 मार्च 2023 को सुबह 6 बजकर 39 मिनट से होगा और इसका समापन 3 मार्च 2023 को सुबह 9 बजकर 12 मिनट पर होगा। हालांकि उदयातिथि के अनुसार, आमलकी एकादशी का व्रत 3 मार्च को रखा जाएगा।
आमलकी ए्कादशी व्रत पारण अगले दिन यानी 4 मार्च 2023 को सुबह 06 बजकर 48 से सुबह 09 बजकर 09 मिनट तक किया जा सकेगा।

आमलकी एकादशी महत्व
आमलकी एकादशी व्रत को बेहद शुभ और फलदायी माना गया है। ऐसी मान्यता है भगवान विष्णु ने स्वयं आंवले को वृक्ष के रूप में प्रतिष्ठित किया था। इस वृक्ष के हर भाग में ईश्वर का वास माना गया है। इस दिन जो व्यक्ति आमलकी एकादशी का व्रत करता है, वह जीवन-मरण के चक्र से छूट जाता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु के आशीर्वाद से धन-धान्य की कमी नहीं रहती है। संभव हो तो किसी मंदिर में आंवले का वृक्ष लगाएं।

आमलकी एकादशी के दिन भगवान शिव का आशीर्वाद
पूरे साल में यह एकमात्र ऐसी एकादशी है जिस दिन भगवान विष्णु के अलावा भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन भी किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन शिव और पार्वती रंग-गुलाल खेलते हैं। इस वजह से आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन बनारस में बाबा विश्वनाथ की विशेष पूजा की जाती है।

इस दिन क्यों करते हैं आंवले वृक्ष की पूजा
आमलकी एकादशी से संबंधित पौराणिक कथा के अनुसार, ब्रह्मा जी की उत्पत्ति भगवान विष्णु की नाभि से हुई थी। एक बार ब्रह्मा जी ने स्वयं को जानने की चेष्टा से परब्रह्म की तपस्या शुरू की। उनकी तपस्या से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और उन्हें दर्शन दिए। भगवान श्री हरि को देखते ही ब्रह्मा जी अपनी भावनाओं पर नियंत्रण न रख सकें और उनके नेत्रों से अश्रुओं की धारा निकल पड़ी। कहा जाता है वो आंसू विष्णु जी के चरणों पर गिरने के बाद आंवले के वृक्ष में बदल गए थे। भगवान विष्णु ने कहा कि आज से आंवले का वृक्ष और इसका फल मुझे अत्यंत प्रिय है। जो भी भक्त आमलकी एकादशी के मौके पर इस वृक्ष का पूजन पूरे विधि विधान से करेगा, उसे अपने पापों से मुक्ति प्राप्त होगी और उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications