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आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2022, छठें दिन होती है मां कात्यायनी की आराधना
नवरात्रि के छठें दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि मां कात्यायनी की पूजा करने से, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। तो यहां हम आपको मां कात्यायनी की उत्पत्ति से जुड़े कुछ रोचक तथ्य बताने के साथ ही नवरात्रि के छठें दिन के पूजा-विधान, भोग, मंत्र और आरती के बारे में बताने वाले है।

कात्यायनी नाम का औचित्य
माता के नौ रूपों में छठां अवतार देवी कात्यायनी का है। आषाढ़ सुदी नवरात्रि 2022 का छठां दिन 5 जुलाई, सोमवार को है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय में काता नाम ऋषि थे। जिनका एक पुत्र था जिसका नाम था कात्या। कात्या ने साधु बनकर खूब प्रसिद्धि प्राप्त की। उसने मां शक्ति को प्रसन्न करने के लिए कई वर्षों तक तपस्या की। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर जब माता ने प्रकट होकर उसकी मनोकामना पूछी तो उसने माता को अपनी पुत्री के रूप में जन्म लेने के लिए अनुरोध किया। माता ने अपने इस भक्त की इच्छा पर खुशी जताते हुए उसके अनुरोध को स्वीकार किया। जिसके बाद, जब दैत्य महिषाषुर क्रूरता की सारी हदें पार करने लगा तो ब्रह्मा, विष्णु और शिव इन तीन देवों की त्रिमूर्ति ने अपनी ताकत को एककर दुष्ट महिषाषुर का संहार करने के लिए देवी की उत्पति की। कात्यायन वो पहला व्यक्ति था, जिसने देवी की सबसे पहले पूजा की थी। इसलिए इस देवी का नाम कात्यायनी पड़ा।
मां कात्यायनी ने महिषाषुर दैत्य का संहार किया था
इसके बाद मां कात्यायनी ने महिषाषुर का वध कर तीनों लोकों को इसके आतंक से मुक्त कराया। मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत चमकीला और भव्य है। इनकी चार भुजाएँ हैं। मां कात्यायनी का दाहिनी तरफ का ऊपरवाला हाथ अभयमुद्रा में तथा नीचे वाला वरमुद्रा में है। बाईं तरफ के ऊपरवाले हाथ में तलवार और नीचे वाले हाथ में कमल-पुष्प सुशोभित है। इनका वाहन सिंह है।

मां कात्यायनी अपने भक्तों को वरदान और आशीर्वाद प्रदान करती है
मां कात्यायनी शत्रुहंता है इसलिए इनकी पूजा करने से शत्रु पराजित होते हैं और जीवन सुखमय बनता है। जबकि मां कात्यायनी की पूजा करने से कुंवारी कन्याओं का विवाह होता है। भगवान कृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने कालिन्दी यानि यमुना के तट पर मां कात्यायनी की ही आराधना की थी। इसलिए मां कात्यायनी ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में भी जानी जाती है। नवरात्रि के छठे दिन भक्त का मन आग्नेय चक्र पर केन्द्रित होना चाहिए। अगर भक्त खुद को पूरी तरह से मां कात्यायनी को समर्पित कर दें, तो मां कात्यायनी उसे अपना असीम आशीर्वाद प्रदान करती है। साथ ही अगर भक्त पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ मां कात्यायनी की पूजा करता है तो उसे बड़ी आसानी से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मां कात्यायनी की पूजा का शुभ मूहुर्त
अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:04 से दोपहर 12:58 तक।
मां कात्यायनी का मंत्रः ॐ कात्यायिनी देव्ये नमः , इस मंत्र का 108 बार जाप करें।
छठें दिन का रंग: लाल या केसर का रंग
छठें दिन का प्रसादः सूजी का हलवा और ड्राई फ्रूट
मां कात्यायनी की आरती
जय जय अंबे जय कात्यायनी । जय जगमाता जग की महारानी ।।
बैजनाथ स्थान तुम्हारा। वहां वरदाती नाम पुकारा ।।
कई नाम हैं कई धाम हैं। यह स्थान भी तो सुखधाम है।।
हर मंदिर में जोत तुम्हारी। कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी।।
हर जगह उत्सव होते रहते। हर मंदिर में भक्त हैं कहते।।
कात्यायनी रक्षक काया की। ग्रंथि काटे मोह माया की ।।
झूठे मोह से छुड़ानेवाली। अपना नाम जपानेवाली।।
बृहस्पतिवार को पूजा करियो। ध्यान कात्यायनी का धरियो।।
हर संकट को दूर करेगी। भंडारे भरपूर करेगी ।।
जो भी मां को भक्त पुकारे। कात्यायनी सब कष्ट निवारे।।



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