तुलना से परे

Two Trees
एक प्रसिद्ध और स्वाभिमानी समुराई एक ज़ेन गुरु के पास गया। गुरु की सुन्दरता और उस पल का आकर्षण देख कर उसे असुरक्षा का एहसास हुआ। योद्धा ने गुरु से जानना चाहा की उन्हें देखते ही उसे असुरक्षा का एहसास क्यों हुआ, जो उसे तब भी नहीं लगा जब वह मौत के मुंह में था।

गुरु ने कहा, "रुको। में जवाब दूंगा जब सब जा चुके होंगे" अनंत सभाकाल और मिलने वाले लोगों के तांते से योद्धा थक गया। शाम के समय जब कमरा खाली हो गया, उसने पूछा "क्या अब आप मेरे सवाल का जवाब देंगे?"

गुरु ने कहा, "बाहर आओ।" बाहर वह एक पूर्णिमा की रात थी और चाँद क्षितिज तक उभरा हुआ था। गुरु ने कहा, "इन पेड़ों को देखो। यह पेड़ आसमान तक गया है और वह छोटा पेड़ उसके पीछे है। ये मेरी खिड़की के पास बरसों से हैं और कोई दिक्कत नहीं आई है। छोटे पेड़ ने कभी बड़े पेड़ से नहीं कहा की वह उसके सामने तुच्छ महसूस करता है। ये पेड़ छोटा है, और वह पेड़ बड़ा। ऐसा क्यूँ है की मैंने उसकी फुसफुसाहट भी नहीं सुनी?"

"क्योंकि वह तुलना नहीं कर सकते", समुराई ने कहा। गुरु ने जवाब दिया "फिर तुमको मुझे पूछने की ज़रुरत नहीं। तुमको जवाब पता है "

Story first published: Wednesday, October 10, 2012, 15:26 [IST]
Desktop Bottom Promotion