Latest Updates
-
Karwa Chauth 2026: क्या होता है बायना? जानिए करवा चौथ पर बहू अपनी सास को क्या दे -
Bank Holidays November 2026: नवंबर में 16 दिन बंद रहेंगे बैंक, शाखा जाने से पहले देखें छुट्टियों की पूरी लिस्ट -
अकेले में हार्ट अटैक आने पर तुरंत करें ये 3 काम, बच सकती है जान, डॉक्टर ने बताए इमरजेंसी टिप्स -
Kartik Month 2026: कब से शुरू होगा कार्तिक मास? जानें सही तारीख, तुलसी पूजा का धार्मिक महत्व, नियम और विधि -
Valmiki Jayanti 2026 Wishes: रामायण की रचना...इन संदेशों के जरिए अपनों को दें वाल्मीकि जयंती की शुभकामनाएं -
Sharad Purnima Vrat Katha: शरद पूर्णिमा के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, धन-धान्य से भरा रहेगा घर -
Sharad Purnima 2026 Wishes: धन की कभी न कमी हो...शरद पूर्णिमा पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Sharad Purnima 2026 Wishes In Sanskrit: इन संस्कृत श्लोकों से प्रियजनों को दें शरद पूर्णिमा की शुभकामनाएं -
Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा पर बन रहा दुर्लभ लक्ष्मी नारायण योग, इन 3 राशियों के शुरू होंगे अच्छे दिन -
Karwa Chauth Mehndi Designs 2026: करवा चौथ पर लगवाएं ये खूबसूरत मेहंदी डिजाइन, हर कोई करेगा तारीफ
केदारनाथ के बंद कपाट भक्तों के लिए खुले, दूर दूर से पहुंच रहे हैं शिव भक्त
हिंदू धर्म में चार धाम की यात्रा को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है और इसमें से एक है केदारनाथ। हर्ष की बात ये है कि केदारनाथ के कपाट भक्तों के लिए आज खोल दिए गए हैं। भक्तों के दर्शन के लिए केदारनाथ के कपाट आज (9 मई) सुबह 5 बजकर 35 मिनट पर खोले गए। अब आने वाले छह महीनों तक भोले बाबा की पूजा के लिए ये कपाट खुले रहेंगे। साथ ही अब देश दुनिया से भोले बाबा के भक्तों का जत्था दर्शन के लिए यहां पहुंचेगा।

हर हर महादेव के जयकारों से गूंज उठी घाटी
उत्तराखंड में स्थित इस पावन धाम में ठंड के बावजूद भक्तों की बड़ी संख्या पहुंची। एक तरफ पंडित और पुजारी मंत्रों का उच्चारण कर रहे थे तो भक्त भोले बाबा के दर्शन पाने के लिए उनके जयकारे लगा रहे थे। प्रातः शुभ मुहूर्त पर मंदिर का गर्भ गृह खोल दिया गया। ये समय शिव शंकर के दर्शन के लिए उपयुक्त माना जाता है।

केदारनाथ में है बर्फ
इस इलाके में अभी भी बर्फ है लेकिन भक्तों को इसकी कोई परवाह नहीं है। उनके लिए तो प्रभु के दर्शन के बाद बर्फ से ढकी पहाड़ियों का नजारा देखने का एहसास स्वर्ग की सैर से कम नहीं है।
इस इलाके में अभी तकरीबन पांच से छह फुट बर्फ की चादर मौजूद है और उसे पिघलने में लगभग एक महीने का समय लग सकता है। ऐसा बताया जा रहा है कि बीती सर्दी में 15 से 20 फुट की बर्फ की चादर केदारनाथ में जमी जो पिछले कई दशकों में सबसे ज्यादा है।

चमत्कारों के लिए मशहूर है ये स्थान
लोगों के लिए ये आज भी आश्चर्य की बात है कि 3593 फ़ीट की ऊंचाई पर आखिर ये मंदिर कैसे तैयार हुआ। 2013 में आए जल प्रलय के बावजूद भक्तों की आस्था में कोई कमी नहीं आयी है। भोले बाबा के आशीर्वाद और भक्तों की अकीदत का ही ये नतीजा था कि उस प्रलय में जहां सब कुछ बर्बाद हो गया था, वहीं दूसरी तरफ इस मंदिर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।



Click it and Unblock the Notifications
