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Parikrama Benefits: मंदिर की परिक्रमा के समय भूल से बचने के लिए जरूर जानें इसके नियम, वैज्ञानिक महत्व और फायदे
जब हम मंदिर में पूजा के लिए जाते हैं तो विशेष पद्धति का पालन करते हैं। पूजा में कई तरह की क्रियाएं सम्मिलित होती हैं। इन्ही में से एक क्रिया है मंदिर की परिक्रमा करना। आपने कई बार लोगों को पूजा के दौरान मंदिर में प्रतिमा की परिक्रमा करते देखा होगा। माना जाता है ऐसा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। सकारात्मक विचार बढ़ते हैं। जानते हैं कि मंदिर में परिक्रमा अथवा प्रदक्षिणा का क्या महत्व है, इसका वैज्ञानिक महत्व क्या है, इससे जुड़े नियम। साथ ही जानते हैं कि किस देवी और देवता की कितनी परिक्रमा की जाती है।

मंदिर की परिक्रमा का वैज्ञानिक महत्व
ध्वनि एक उर्जा है और विज्ञान के हिसाब से ऊर्जा का ना तो निर्माण होता है और ना ही विनाश, इसका सिर्फ रूपांतरण होता है। जब हम बोलते हैं तो उसकी एक ख़ास फ्रीक्वेंसी होती है। हर फ्रीक्वेंसी का मानव अंतर्मन पर एक विशेष प्रभाव पड़ता है। बच्चे की किलकारी मन प्रसन्न कर देती है तो बादल का गरजना डरा देती है। एक लिमिट से ज्यादा डेसिबल की ध्वनि सुनने से कान फट भी सकते हैं। साउंड थेरेपी से तो इलाज भी होने लगे हैं। कहने का मतलब ये है कि ध्वनि का हम पर प्रभाव पड़ता है।

मंदिर में होता है सकारात्मक ऊर्जा का आवरण
मंदिर एक ऐसी जगह है जहां मंत्रों का जाप होता रहता है। मंत्रो में शक्ति निहित है और जब ये ध्वनि ऊर्जा के रूप में निकलती है तो विशेष प्रकार का प्रभाव उत्पन्न करने योग्य हो जाती है। जहां भी घंटी, शंख बजाये जाते हैं और निरंतर मंत्रोचारण होता है वहां विशेष प्रकार की सकारात्मक ऊर्जा का आवरण बन जाता है। जब हम मंदिर जाते हैं तो इस ऊर्जा को सोखते हैं और जिससे हम प्रभावित होते हैं। इसी वजह से मंदिर में सकारात्मकता और सुकून मिलता है।

परिक्रमा है ऊर्जा सोखने की विधि
आप जितनी ज्यादा से ज्यादा ऊर्जा सोख पाएं, उतना बेहतर है। शास्त्रों में इसके लिए एक विधि बतायी गयी है। इसके अनुसार मंदिर का एक पूरा चक्कर लगाया जाए तो ज्यादा से ज्यादा ऊर्जा क्षेत्र से हम गुजर सकते हैं, इसलिए मंदिर में परिक्रमा का बहुत महत्व है।

परिक्रमा करते समय रखें इन बातों का ध्यान
मंदिर में परिक्रमा हमेशा घड़ी के सुई के घुमने की दिशा में किया जाना चाहिए। ऐसा शास्त्र बताते हैं। परिक्रमा या प्रदक्षिणा 3, 5, 7, 9, 11 या 21 बार करनी चाहिए।
प्रदक्षिणा करते समय या तो चुप रहें और मन में देवता का ध्यान करें या मंत्र का उच्चारण करें।
गीले कपड़ो में या कम से कम भीगे पैरों से परिक्रमा करें तो और अधिक लाभदायक होता है।

किस भगवान की कितनी परिक्रमा करें?
शिव की परिक्रमा सिर्फ आधी ही करें क्योंकि शिवलिंग पर चढ़े जल को लांघना नहीं चाहिए।
सूर्य देव की परिक्रमा सात बार करें।
श्रीगणेश की परिक्रमा एक अथवा तीन बार करें।
भगवान श्री विष्णु और उनके सभी अवतारों की चार बार परिक्रमा करें।
देवी दुर्गा सहित सभी देवियों की एक बार परिक्रमा की जाती है।
हनुमानजी की परिक्रमा तीन बार की जाती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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