Gangaur 2023: गणगौर उत्सव पर जरुर पाएं शिव-पार्वती का आशीर्वाद

गणगौर शब्द दो शब्दों से बना है जिसमें 'गण' का अर्थ है 'भगवान शिव' और 'गौर' का अर्थ है 'देवी पार्वती'। इस त्योहार को गौरी तृतीया, गौरी तीज, सौभाग्य तीज के नामों से भी जाना जाता है।

हिंदू धर्म की महिलाओं के बीच ये उत्सव काफी लोकप्रिय है। गणगौर पूजा की धूम गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा में देखने को मिलती है। जानते हैं कि इस साल गणगौर पूजा की तिथि, समय, पूजा अनुष्ठान और महत्व के बारे में।

गणगौर पूजा की तिथि

गणगौर पूजा की तिथि

गणगौर पूजा का उत्सव होली के साथ ही शुरू हो जाता है। यह त्योहार 18 दिनों तक मनाया जाता है जिसकी शुरुआत होली के साथ होने वाली है।

हिंदू कैलेंडर के मुताबिक, इस साल गौरी तृतीया या गणगौर उत्सव चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाएगा। साल 2023 में गणगौर पूजा 24 मार्च की जाएगी।

चौघड़िया मुहूर्त

लाभ (उन्नति) - सुबह 07.53 से सुबह 09.24 तक

अमृत (सर्वोत्तम) - सुबह 09.24 से सुबह 10.56 तक

शुभ (उत्तम) - दोपहर 12.28 से दोपहर 01.59 तक

गणगौर/गौरी पूजा: अनुष्ठान और पूजा विधि

गणगौर/गौरी पूजा: अनुष्ठान और पूजा विधि

18 दिनों तक चलने वाले इस त्योहार में देवी पार्वती की पूजा की जाती है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार यह व्रत वैवाहिक प्रेम, ज्ञान, शक्ति, उत्कृष्टता और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

गणगौर पूजा उत्सव में महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत करती हैं और दिन में केवल एक बार भोजन कर सकती हैं।

महिलाएं सोलाह श्रृंगार करके तैयार होती हैं। माता पार्वती तथा भोलेनाथ की मूर्तियों को सजाया जाता है।

इस उत्सव के अंतिम दिनों में पूरे शहर में धार्मिक जुलूस निकाला जाता है। इसके बाद मिट्टी की मूर्तियों को पानी में विसर्जित कर दिया जाता है।

इसके साथ ही माता पार्वती से प्रार्थना की जाती है कि घर परिवार पर कृपा बनाये रखें और वैवाहिक जीवन में अनुकूलता बनी रहे।

गणगौर पूजा का महत्व

गणगौर पूजा का महत्व

विवाहित महिलाओं के लिए ये उत्सव काफी मायने रखता है। महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती से प्रार्थना करती हैं कि उनका शादीशुदा जीवन बिना किसी कष्ट के आगे बढ़े और प्रेम बना रहे।

वहीं अविवाहित युवतियां भी इस उत्सव में भाग लेती हैं। इस व्रत को करके वो मनपसंद जीवनसाथी की कामना करती हैं।

इस दौरान कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। लोकगीतों की भी धूम रहती है।

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

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