Latest Updates
-
Papankusha Ekadashi 2026 Wishes: विष्णु जी की कृपा...पापांकुशा एकादशी पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
पार्टी में जल्दी बिगड़ जाता है मेकअप? केकी और पैची लुक से बचने के लिए अपनाएं ये 5 टिप्स -
दशहरा के बाद दिल्ली की हवा हुई जहरीली, 200 के पार पहुंचा AQI, प्रदूषण से बचाव के लिए फॉलो करें ये टिप्स -
कुल्लू दशहरा में नहीं जलता रावण का पुतला, देवलोक से आते हैं देवी-देवता, जानिए क्या है सदियों पुरानी परंपरा -
Papankusha Ekadashi 2026: कब है पापांकुशा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
Navratri Ke Baad Jau Ka Kya Kare: नवरात्रि समाप्त होने के बाद उगे हुए जौ का क्या करें? जानें सही नियम और उपाय -
दीपिका पादुकोण-रणवीर सिंह ने किया दूसरी बेटी के नाम का खुलासा, दशहरे पर दिखाई पहली झलक -
Shardiya Navratri 2026 Day 8: नवरात्रि के आठवें दिन करें मां महागौरी की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग और आरती -
Durga Ashtami 2026 Wishes: महागौरी की कृपा...इन संदेशों के साथ अपनों को दें दुर्गा अष्टमी की शुभकामनाएं -
सिर्फ गांठ ही नहीं, ये 5 संकेत भी हो सकते हैं ब्रेस्ट कैंसर का लक्षण, साधारण समझकर इग्नोर करने की न करें भूल
महिषासुर-वध के बाद मिला था मां को 'दुर्गा' नाम, आइए जानते है देवी से जुड़े ऐसे 10 रोचक तथ्य को
शाक्त परंपरा में माँ दुर्गा को सबसे सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यहां देवी का स्थान सवोच्च होता है। शाक्त सम्प्रदाय में देवी को शक्ति का रुप माना जाता है।
मां दुर्गा को ये नाम उनको यह नाम राक्षस महिषासुर को मारने के बाद मिला था। आइये जानते हैं इसी तरह की और कुछ रोचक बातें।

प्रजनन क्षमता और ताकत
माँ दुर्गा को शक्ति का अवतार माना गया है, उन्हें भौतिक दुनिया में प्रजनन क्षमता और ताकत का प्रतीक भी माना जाता है।

8 दिशाएं
माँ दुर्गा के 8 हाथ हैं जिन्हें हिंदू धर्म में 8 दिशाओं प्रतीक माना जाता है। इसका यह अर्थ है कि माँ आठों दिशाओं से अपने भक्तों की रक्षा करती है।

शक्ति रुप
माँ दुर्गा को 'शक्ति' के रूप में पूजा जाता है। इन्हें दिव्य ऊर्जा भी कहा जाता है क्योंकि इसमें ब्रह्मांड को बचाने के लिए देवताओं की शक्ति भी है।

शेर की सवारी
माँ दुर्गा की सवारी शेर है जिसे शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इससे यह भी पता चलता है कि उनके पास सबसे अधिक शक्ति है जिसे वे दुनिया की रक्षा करती हैं।

क्यों है हाथ में त्रिशूल
उनके हाथ में त्रिशूल तीन गुणों का प्रतीक है पहला सतवा (मन की स्थिरता), दूसरा राजस(महत्वाकांक्षा ) और तीसरी तमों (आलस और तनाव)। माँ दुर्गा इन तीनों ऊर्जाओं को संतुलित करती हैं।

शिव अर्धांग्नी
माँ दुर्गा को शिव की अर्धांग्नी माना गया है। शिव रूप हैं तो वे अनुसरण हैं। शिव ब्रह्मांड के पिता है और वे माता है।

त्र्यम्बके नाम
माँ दुर्गा की तीसरी आंख की वजह से उनका नाम त्र्यम्बके पड़ा, जो अग्नि, सूर्य और चंद्र का प्रतीक है।

गरबा डांडिया
नवरात्री को पश्चिम में गरबा-डांडिया के रूप में मनाया जाता है, उत्तर में रामलीला और दक्षिण में गोलू या बोनलु के रूप में मनाया जाता है जबकि पूर्वी में यह दुर्गा पूजा के रूप में जाना जाता है।

महिषासुर का वधा किया था
माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध कर दिया, भले ही उसने विभिन्न प्रकार की चालों से उन्हें अपने वश में करने की कोशिश की थी।

अकल-बोधन
शुरुआती दौरान में दुर्गा पूजा को बसंत पूजा के रूप में मनाया जाता था। वहीँ शरद ऋतु में इसे अलग तरीके से मनाया जाता है और इसे अकल-बोधन' के नाम जाना जाता है।



Click it and Unblock the Notifications
