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Gudi Padwa 2023: इस दिशा में गुड़ी लगाना माना जाता है शुभ, जानें मुहूर्त और पूजा विधि
हिन्दू कैलेन्डर के नववर्ष और चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन गुड़ी पड़वा का उत्सव मनाया जाता है। यह पर्व नये साल की शुरुआत, नई फसल की ख़ुशी और ब्रह्मा द्वारा इस सृष्टि की रचना के दिन के रूप में बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने द्वार पर गुड़ी यानी विजय पताका फरहाते हैं, घरों के सामने रंग बिरंगी रंगोलियां बनाते हैं और पूरी आस्था से पूजा की जाती है व तरह तरह के पकवान तैयार करते हैं। इस वर्ष गुड़ी पड़वा 22 मार्च को मनाई जायेगी। जानते हैं गुड़ी पड़वा की पूजा मुहूर्त और विधि -

गुड़ी पड़वा 2023 पूजा मुहूर्त
प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 21 मार्च को रात 10:52 बजे होगा और 22 मार्च की रात 08:20 बजे समापन होगा। उदया तिथि को मानते हुए 22 मार्च को गुड़ी पड़वा मनाया जाएगा। पूजा मुहूर्त 22 मार्च को सुबह 06:29 बजे से सुबह 07:39 तक रहने वाला है।

गुड़ी पड़वा की पूजा विधि
ब्रह्म मुहूर्त में सुगन्धित तेल लगाकर स्नान करें। इसके बाद भगवान ब्रह्मा की पूजा करें। पौराणिक कथाओं में मिलता है कि ब्रह्मा ने इसी दिन इस सृष्टि की रचना की थी। घर के सभी सदस्यों को मुहूर्त के समय ब्रह्मा की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद घर के मुख्य द्वार को आम या अशोक के पत्तों और फूलों से सजाया जाता है। मुख्य द्वार और घर के प्रांगण में रंगोली बनाई जाती है।
इस दिन गुड़ी बनाने का बहुत महत्व होता है। घर के मुख्य द्वार पर एक खम्भे में पीतल के बर्तन या किसी पात्र को उल्टा करके टांगा जाता है और उसमें रेशम के लाल, पीले, केसरिया रंग के कपड़ों को बांधा जाता है। गुड़ी पड़वा को द्वार के दाहिने हिस्से में लगाने की कोशिश करें। इस गुड़ी की भी पूजा करना शुभ माना जाता है। बांस की छड़ी पर उल्टा कलश रखने और पताका लहराने की परंपरा विजय का प्रतीक मानी जाती है।
इस दिन भगवान को पुरणपोली, मीठी रोटी और गुड़ का भोग लगाया जाता है। गुड़ी पड़वा के दिन घर के सभी सदस्यों को साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करना चाहिए और भगवान का धन्यवाद करना चाहिए।

गुड़ी पड़वा पूजा सामग्री
इस दिन पूजा के लिए ताजे फूल, फूलों की माला, पान के पत्ते, बताशे की माला, हल्दी, कुमकुम, चंदन, अक्षत, चंदन, धुप, दीपक, मौली, चांदी का सिक्का और पानी वाले नारियल की जरूरत होती है।

गुड़ी पड़वा मंत्र
ॐ विष्णुः विष्णुः विष्णुः, अद्य ब्रह्मणो वयसः परार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे अमुकनामसंवत्सरे चैत्रशुक्ल प्रतिपदि अमुकवासरे अमुकगोत्रः अमुकनामाऽहं प्रारभमाणस्य नववर्षस्यास्य प्रथमदिवसे विश्वसृजः श्रीब्रह्मणः प्रसादाय व्रतं करिष्ये।

गुड़ी पड़वा है शुभ दिन
पंचांग के अनुसार, चैत्र माह की प्रतिपदा तिथि के साथ हिंदू नववर्ष का शुभारंभ होता है। इस तिथि के साथ चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है तो वहीं महाराष्ट्र व कोंकण में ये दिन गुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है। आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में ये उत्स्व उगादि के नाम से मनाया जाता है। यह तिथि नए कार्य के आरंभ, नए घर में प्रवेश, धार्मिक कार्यों के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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