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हैप्पी वासु बरस 2022: आज से शुरू हो गया है दिवाली का उत्सव, धूमधाम से मनाई जा रही गोवत्स द्वादशी
दिवाली का त्योहार आ गया है। दीपों का पर्व दीपावली की शुरूआत हो गई है। दिवाली लक्ष्मी पूजा के बगैर अधूरी है। माना जाता है कि देवी लक्ष्मी की प्रार्थना करने से जीवन में अधिक समृद्धि और समृद्धि आती है। दीपावली पांच दिनों का त्योहार है, जिसके दौरान धनतेरस पूजा और गोवत्स द्वादशी भी होती है। वासु बरस भी एक प्रमुख हिंदू त्योहार है, ये दिवाली उत्सव के साथ शुरू होता है, इसके बाद धनतेरस, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजन, पड़वा या बलिप्रतिपदा और भाई दूज का त्योहार होगा। अश्विन कैलेंडर माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को वासु बरस सेलिब्रेट किया जाता है। ये त्योहार गायों और बछड़ों के सम्मान में होता है। 'वसु' का अर्थ है गाय और 'बारस' का अर्थ है बारहवां दिन।

गोवत्स द्वादशी
गोवत्स द्वादशी धनतेरस से एक दिन पहले मनाई जाती है, इसे दिवाली का पहला दिन माना जाता है। इस वर्ष गोवत्स द्वादशी 21 अक्टूबर को मनाई जा रही है। द्वादशी तिथि 21 अक्टूबर को शाम 5:22 बजे से शुरू होगी और 21 अक्टूबर को शाम 6:02 बजे खत्म होगी।

इस त्योहार का इतिहास:
इतिहास और पौराणिक कहानी के अनुसार, दिवाली के पहले दिन गाय और बछड़ों की पूजा की जाती है और उन्हें भोजन कराया जाता है। इस दिन लोग गायों और बछड़ों को सम्मान देने के लिए दुग्ध उत्पादों का सेवन करने से भी परहेज किया जाता है।

गोवत्स द्वादशी को वासु बरस के रूप में मनाते हैं
ये त्योहार विशेष रूप से महाराष्ट्र में काफी उत्साह के साथ मनाया जाता है, लोग गोवत्स द्वादशी को वासु बरस के रूप में बताते है। इस त्योहार में महिलाएं व्रत रखती हैं और गायों की पूजा करती हैं। वे भगवान कृष्ण की पूजा भी करते हैं। साथ ही लोग नए कपड़े पहनते हैं और अपने घरों को रंगोली डिजाइन, रोशनी और रंगों में सजाते हैं और पवित्र गायों की पूजा की जाती है। गायों को हिंदू धर्म में पवित्र माना जाता है । वहीं गुजरात गोवत्स द्वादशी को वाघ बरस के रूप में सेलिब्रेट करते हैं।



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