महाकाल के दर्शन के बाद पलटी विराट कोहली की किस्मत, जानें उज्जैन मंदिर की खासियत

क्रिकेटर विराट कोहली द्वारा इंदौर टेस्ट के दौरान आतिशी पारी खेलकर शतक जड़ने और इसके ठीक पहले महाकाल का दर्शन करने के बीच लोग कनेक्शन जोड़ रहे हैं। सोशल मीडिया पर कोहली द्वारा उज्जैन महाकाल बाबा के दर्शन को लेकर खूब चर्चा हो रही हैं।

Interesting Facts Of Ujjain Mahakal Temple Where Virat Kohli And Anushka Sharma Visited In Hindi

दरअसल हुआ ये है कि बहुत दिनों से कोहली अपने प्रदर्शन को लेकर असंतुष्ट थे। वैसे टी-20 और वनडे क्रिकेट में इनका फॉर्म वापस लौट आया है लेकिन टेस्ट में प्रदर्शन खास नहीं रहा था। फिर इंदौर में चल रहे ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट के दौरान कोहली ने उज्जैन के महाकालेश्वर बाबा के दर्शन किए, भस्म आरती में भाग लिया और गर्भ गृह में पूजा की। उसके अगले दिन कोहली का फॉर्म वापस आ गया और इन्होने शतक जड़ दिया। ऐसे में फैन्स ये कह रहे हैं कि कोहली के ऊपर बाबा महाकाल की कृपा हो गयी है। कोहली के अलावा कई नेताओं और सेलेब्रिटीज ने भी बाबा महाकाल के दर्शन करने के बाद सकारात्मक परिवर्तन अनुभव किये हैं। आइये उज्जैन बाबा महाकाल के बारे में कुछ दिलचस्प बातें जानते हैं।

शिव बसते हैं स्वयंभू रूप में

शिव बसते हैं स्वयंभू रूप में

उज्जैन स्थित महाकाल ज्योतिर्लिंग शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मंदिर रूद्र सागर सरोवर के पास स्थित है। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव इस लिंग में स्वयंभू के रूप में बसते है। महाकालेश्वर में बनी मूर्ति दक्षिणामूर्ति है क्योकि यह मूर्ति दक्षिण दिशा में है।

उज्जैन था प्राचीन केंद्रीय मेरिडियन

उज्जैन था प्राचीन केंद्रीय मेरिडियन

1884 में ग्रीनविच को सर्वमान्य प्राइम मेरिडियन स्वीकार किया गया मतलब ये कि दुनिया में समय की गणना करने लिए ग्रीनविच को जीरो डिग्री लोंगीट्युड मान लिया गया। लेकिन इसके पहले भारत में समय की गणना करने के लिए उज्जैन ही केंद्रीय मेरीडियन माना जाता था। सूर्य सिद्धांत किताब के अनुसार जीरो डिग्री लोंगीट्युड अवन्ती (उज्जैन) और रोहितका (रोहतक) से गुजरती थी। काल मतलब समय और शायद इसीलिए उज्जैन में शिव मंदिर को महाकालेश्वर कहा जाता है।

तीन खंड हैं ज्योतिर्लिंग के

तीन खंड हैं ज्योतिर्लिंग के

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के तीन खंड हैं। पहला जो सबसे निचले स्तर पर है उसे महाकालेश्वर खंड कहते हैं। दूसरा मध्य में है जिसे ओंकारेश्वर खंड कहा जाता है और तीसरा सबसे ऊपर श्री नागचन्द्रेश्वर खंड कहलाता है। नागचन्द्रेश्वर शिवलिंग के दर्शन सिर्फ नागपंचमी के दिन ही किए जा सकते हैं।

वर्तमान स्वरुप को पेशवा ने बनवाया

वर्तमान स्वरुप को पेशवा ने बनवाया

वैसे तो मंदिर बहुत प्राचीन है लेकिन वर्तमान मंदिर का जो स्वरुप है उसे पेशवा बाजीराव और छत्रपति शाहू महाराज के जनरल श्रीमान रानाजिराव शिंदे महाराज ने 1736 में बनवाया था।

शक्ति पीठ है महाकाल मंदिर

शक्ति पीठ है महाकाल मंदिर

हिन्दू मान्यता के अनुसार कुल 18 शक्ति पीठ हैं। शक्ति पीठ वैसे स्थल को कहते हैं जहां मनुष्यों को ईश्वर की दैविक शक्ति का अनुभव होता है। इन 18 शक्ति स्थलों में महाकालेश्वर मंदिर भी शामिल है। कहते हैं कि मंदिर के गर्भ गृह में शिवलिंग की वजह से ऊपर उर्जा का प्रभाव है।

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

Story first published: Monday, March 13, 2023, 17:35 [IST]
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