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क्यों भरा जाता है मांग में सिंदूर, जानिए कब और कैसे हुई थी इसकी शुरुआत

आपने अक्सर अपने घरों में और दूसरी सुहागिन महिलाओं को मांग में सिंदूर भरते जरूर देखा होगा। वैसे तो महिलाएं सोलह श्रंगार करती है पर सिंदूर का एक अलग ही महत्व होता है।
बहुत कम महिलाएं होगी जो ये जानती होंगी कि आखिर मांग में सिंदूर क्यों भरा जाता है। सिंदूर को आखिर सुहागिनें ही क्यों लगाती है? इन सब बातों के जवाब जानने के लिए आगे पढ़िए.....

इन लोगों से शुरु हुई ये प्रथा
मान्यता है कि भगवान ने वीरा और धीरा नाम के दो युवक और युवती को बनाया और उनको सुंदरता सबसे अधिक दी गई।
धीरा दिखने में बहुत ही सुंदर थी और वीरा तो वीरता कि मिशाल था। भगवान ने इन दोनो का विवाह करवाने का फैसला किया था।

दोनो का हुआ विवाह
विवाह के बाद दोनों एक दूसरे के साथ काफी खुश थे। इन दोनो कि बातें पूरे देश में फैल गई और चर्चे भी होने लगे।
कहा जाता है कि वीरा और धीरा दोनो ही शिकार खेलने जाते थे कि तभी कालिया नाम के एक डाकू ने धीरा को देख लिया और उसपर मोहित हो गया।
धीरा को पाने के लिए डाकी ने वीरा को मारने का प्लान बनाने लगा।

एक दिन हो गया ये हादसा
शिकार पर गए दोनो पति पत्नी को वापस लौटने में जंगल में ही रात हो गई तो उन दोनों ने एक पहाड़ी पर रात गुजारने का फैसला कर लिया।
धीरा को अचानक प्यास लगी तो उसने वीरा को बताया और वीरा रात में ही पानी लेने के लिए निकल गया।

ऐसे हुई सिंदूर लगाने कि प्रथा की शुरुआत
पानी लेने जा रहे वीरा पर अचानक कालिया डाकू ने हमला कर दिया जिससे वीरा घायल हो गया और धरती में गिर के तड़पने लगा।
ये देखकर डाकू जोर जोर से हसने लगा जिसकी आवाज धीरा ने सुन ली। जब धीरी भागती हुई उस जगह पर पहुंची तो वीरा की हालत देखकर क्रोधित होकर पीछे से डाकू पर हमला कर दिया।
धीरा के वार से घायल डाकू जब आखिरी सांसे गिर रहा था तभी वीरा को होश आया और उसने धीरा की वीरता से खुश होकर उसके मांग में अपने रक्त भर दिया।
उसी दिन से सिंदूर भरने की ये प्रथा की शुरुआत हुई थी।



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