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समुद्र मंथन से जुड़ी है कांवड़ यात्रा की शुरुआत, जानें यात्रा की अहम तारीखें और नियम
सावन माह की शुरुआत 17 जुलाई से होने वाली है, इसके साथ ही कांवड़ यात्रा की भी शुरुआत हो जाएगी। सावन में कांवड़ यात्रा का बहुत महत्व है। लाखों की तादाद में श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लिए इस यात्रा के लिए निकलते हैं। शिव भक्तों के लिए सावन का महीना बेहद खास होता है और वो पूरे साल इसका इंतजार करते हैं। शिव भक्त इस दौरान हरिद्वार और गंगोत्री सहित अनेक धामों की यात्रा करते हैं। अलग अलग जगह से आए कांवड़िये अपने कांवड़ में पवित्र जलभरकर पैदल यात्रा शुरू करते हैं।

भगवान विष्णु के स्थान पर भगवान शिव संभालते हैं सृष्टि की बागडोर
सावन के महीने में लाखों शिवभक्त अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए कांवड़ यात्रा करते हैं और हरिद्वार से जल भर कर शिवलिंग पर चढ़ाते हैं। दरअसल ये मान्यता है कि सावन माह में भगवान शिव अपने ससुराल दक्ष की नगरी हरिद्वार के कनखल में निवास करते हैं। इस कारण शिवभक्त कांवड़ यात्रा के दौरान गंगाजल लेने हरिद्वार जाते हैं।
देवशयनी एकादशी से लेकर अगले चार महीने तक भगवान विष्णु निद्रा अवस्था में रहते हैं। ऐसा माना जाता है कि वो आराम करने के लिए क्षीर सागर में चले जाते हैं। उनकी अनुपस्थिति में संसार के पालनकर्ता भगवान शिव माने जाते हैं जो तीनों लोकों की कमान संभालते हैं।

कैसे शुरू हुई थी कांवड़ यात्रा?
कांवड़ यात्रा का संबंध कहीं ना कहीं समुद्र मंथन की घटना के समय से जुड़ा हुआ है। गौरतलब है कि समुद्र मंथन में जो विष निकला था उसे भगवान शिव ने पी लिया था। उस विष के कारण शिवजी का शरीर जलने लगा था। इस जलन को शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर जल अर्पित करना शुरू किया था। इस मान्यता की वजह से ही कांवड़ यात्रा की शुरुआत हुई। कांवड़िये अपने कांवड़ में भरकर लाए जल से सावन की चतुर्दशी पर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं।

जल भरने का शुभ समय
कांवड़ियों के लिए कांवड़ में जल भरने का शुभ समय 18 जुलाई, गुरुवार को द्वितीया तिथि के दौरान सुबह सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक है।

कांवड यात्रा पर निकलने से पहले भगवान शिव का हर भक्त इस बात का संकल्प लेता है कि वह इस विशेष यात्रा के दौरान किसी भी तरह का कोई नशा नहीं करेगा। वह धूम्रपान, शराब, मांसाहार भोजन ग्रहण नहीं करेगा और इनसे दूर रहेगा। वह कांवड को बिना स्नान किये हाथ नहीं लगाएगा और उसके लिए किसी वाहन-साधन का इस्तेमाल नहीं करेगा। वह इस पूरी यात्रा के समय में चारपाई पर नहीं सोएगा और ना ही कांवड जमीन पर रखेगा। कांवड़ियों के लिए कांवड़ अपने सिर पर उठा कर ले जाना भी मना होता है।

इस साल कांवड़ यात्रा की अहम तारीखें
सावन की शुरुआत: 17 जुलाई
पहला सोमवार: 22 जुलाई
दूसरा सोमवार: 29 जुलाई
शिवरात्रि: 30 जुलाई (मंगलवार)
तीसरा सोमवार: 5 अगस्त
चौथा सोमवार: 12 अगस्त
सावन का अंतिम दिन और रक्षा बंधन: 15 अगस्त



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