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जानें, महाभारत की खूबसूरत महिलाओं के बारे में
भारत के सबसे प्रसिद्ध महाकाव्यों में से एक है महाभारत। जहाँ नैतिकता, अच्छे और बुरे कर्म करने और उनके परिणामों के बीच अंतर का असाधारण उदाहरण देखने को मिलता है। महाभारत में सिर्फ पुरुषों ने ही नहीं महिलाओं ने भी साहस, प्रांजलता, सौंदर्य और अपनी बुद्धि का परिचय दिया है।
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यहाँ तक आज के ज़माने में भी इन महिलाओं से हमे यह सिखने को मिलता है कि कैसे निर्भीकता से ज़िन्दगी जीनी चाहिए। यह महिलाएं अपने समय से बहुत आगे थीं जो पुरुषसत्तावादी समाज के खिलाफ अपनी आवाज़ उठना जानती थी।
किस प्रकार हुआ था महाभारत की द्रोपदी का जन्म?
इन महिलाओं से हमें यह सीखने को मिलता है कि मुखर, साहसी, वफादार, और समर्पित होकर हम अपनी ज़िन्दगी कैसे जी सकते हैं। आज हम इन्ही कुछ खास और बेहद खूबसूरत महिलाओं की बात करने जा रहें हैं।

द्रौपदी
द्रौपदी पंचाल नरेश राजा द्रुपद की बेटी थी, द्रौपदी महाभारत की सबसे खूबसूरत महिलाओं में से एक थी। अर्जुन ने द्रौपदी को स्वयंवर जीत था जिसके बाद उनका विवाह पांचों पांडवों से हुआ था। द्रौपदी श्री कृष्ण पूजा करती थी जिन्हों ने उसे कौरवों की सभा हुए अपमान से बचाया था।

उर्वशी
उर्वशी इंद्र के 'दरबार' बेहद खूबसूरत युवती थी। उर्वशी अर्जुन को पसंद करती थी और उसे अपने प्यार का इज़हार भी करती हैं। लेकिन अर्जुन ने उनके प्यार को ठुकरा दिया जिसके चलते गुस्से में उन्हों ने अर्जुन को श्राप दिया कि औरत बन जाएंगे। उर्वशी उस महाभारत काल की सबसे निडर युवती थी जिसने एक आदमी से से अपने प्यार का इज़हार किया था।

कुंती
कुंती महाभारत के प्रमुख पात्रों में से एक है। यह कर्ण की माँ थी, जो उन्हें सूर्य भगवान से मिले थे। कुंती को ऋर्षि दुर्वासा एक मंत्र बताया था जिससे इस मंत्र को पढ़कर तुम जिस किसी भी देवता का ध्यान करेंगी वह उनके सामने प्रकट हो जाएंगे, और वह उन्हें अपने जैसा ही तेजस्वी पुत्र प्रदान करेंगे। उस मंत्र की सचाई को जाने के लिए उन्होंने सूर्यदेव का स्मरण किया।
भगवान सूर्य, कुंती के सामने आ गए। उनके सुंदर रूप को देखकर, कुंती आकर्षित हो गईं। और उन्हें कर्ण जैसा पुत्र दिया। क्योंकि उस वक़्त उनका विवाह नहीं हुआ था इस लिए उन्होंने कर्ण को टोकरी में रख कर गंगा में बहा दिया था।

गंगा
गंगा शांतनु की पहली पत्नी थी। गंगा की खूबसूरती से आकर्षण हो कर शांतनु के गंगा से शादी करने को कहा जिसे गंगा ने स्वीकार कर लिया। लेकिन गंगा ने उनसे थीं वचन लिए पहला कि वह उनसे कभी भी सवाल नहीं करेंगे। दूसरा वे गंगा को कभी भी किसी कार्य को करने से नहीं रोकेंगे फिर चाहे वह अच्छा हो या बुरा और वह हमेशा उनका साथ देंगे फिर चाहे कुछ भी हो जाये। तीसरा कि अगर किसी भी दो शर्तों को उन्होंने तोड़ा तो वह उन्हें हमेशा के लिए छोड़ कर चली जाएंगी।

उलूपी
उलूपी नागों की राजकुमारी थी जो अर्जुन से विवाह करना चाहती थी। इसीलिए उलूपी ने अर्जुन को नशीली दवा पिला कर अपहरण किया और फिर उनसे शादी का प्रस्ताव रखा।

सुभद्रा
सुभद्रा श्री कृष्ण और बलराम की बहन थी। अर्जुन सुभद्रा की खूबसूरती पर फ़िदा थे और उसे शादी करना चाहते थे। इसलिए कृष्ण ने अर्जुन को सलाह दी कि वे सुभद्रा को ले कर भाग जाएँ क्योंकि बलराम अपने पसंदीदा शिष्य दुर्योधन से उसकी शादी करना चाहते थे।

सत्यवती
सत्यवती राजा शांतनु की दूसरी पत्नी थी जो की मत्स्य कन्या थी। राजा उनकी खूबसूरती पर आकर्षित हो गए, और उनसे शादी करने को कहा। सत्यवती ने उनका शांतनु का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया लेकिन उनकी एक शर्त थी कि उनका पुत्र ही सिंहासन पर बैठेगा।

गांधारी
गांधारी गांधार देश के 'सुबल' नामक राजा की कन्या थीं। क्योंकि वह गांधार की राजकुमारी थीं, इसीलिए उनका नाम गांधारी पड़ा। यह हस्तिनापुर के महाराज धृतराष्ट्र की पत्नी और दुर्योधन आदि कौरवों की माता थीं। गांधारी की भगवान शिव में विशेष आस्था थी, और ये शिव की परम भक्त थीं। एक पतिव्रता के रूप में गांधारी आदर्श नारी सिद्ध हुई थीं। अपने पति धृतराष्ट्र के अन्धा होने के कारण विवाहोपरांत ही गांधारी ने भी आँखों पर पट्टी बाँध ली तथा उसे आजन्म बाँधे रहीं।

चित्रांगदा
चित्रांगदा मणिपुर नरेश चित्रवाहन की पुत्री थी। जब वनवासी अर्जुन मणिपुर पहुंचे तो उसके रूप पर मुग्ध हो गये। उन्होंने नरेश से उसकी कन्या मांगी। राजा चित्रवाहन ने अर्जुन से चित्रांगदा का विवाह करना इस शर्त पर स्वीकार कर लिया कि उसका पुत्र चित्रवाहन के पास ही रहेगा क्योंकि पूर्व युग में उसके पूर्वजों में प्रभंजन नामक राजा हुए थे। उन्होंने पुत्र की कामना से तपस्या की थी तो शिव ने उन्हें पुत्र प्राप्त करने का वरदान देते हुए यह भी कहा था कि हर पीढ़ी में एक ही संतान हुआ करेगी अत: चित्रवाहन की संतान वह कन्या ही थी। अर्जुन ने शर्त स्वीकार करके उससे विवाह कर लिया। चित्रांगदा के पुत्र का नाम 'बभ्रुवाहन' रखा गया। पुत्र-जन्म के उपरांत उसके पालन का भार चित्रांगदा पर छोड़ अर्जुन ने विदा ली।



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