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Muharram Ki Namaz 2025: कैसे पढ़ें मुहर्रम की खास नमाज और दुआ-ए-आशूरा?
Muharram Ki Namaz: मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना होता है और यह पूरे साल में सबसे पाक महीनों में गिना जाता है। इसी महीने की 10वीं तारीख को यौम-ए-आशूरा कहा जाता है, जो शहादत और सब्र का प्रतीक है। इस दिन इमाम हुसैन और उनके साथियों ने करबला के मैदान में अपने प्राणों की आहुति दी थी।
इस मौके पर मुसलमान इबादत, रोजा, नमाज और दुआ के जरिए खुदा का शुक्र अदा करते हैं और इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करते हैं और मातम मनाते हैं। आइए जानते हैं मुहर्रम की नमाज कैसे पढ़ी जाती है और दुआ-ए-आशूरा कौन सी है।

मुहर्रम की नमाज का तरीका
1. नियत करें - मुहर्रम की विशेष नफ्ल नमाज पढ़ने से पहले नियत करें कि आप आशूरा के दिन इबादत के लिए नफ्ल नमाज अदा कर रहे हैं।
2. रकअतें - इस दिन आप 4 रकअत नफ्ल नमाज पढ़ सकते हैं, दो-दो रकअत करके।
3. हर रकअत में: सुरह फातिहा के बाद 10 बार सुरह इखलास (कुल हुवल्लाहु अहद) पढ़ें।
4. नमाज के बाद दुआ करें - शहीद-ए-कर्बला के सब्र, ईमान और कुर्बानी को याद करते हुए दुआ करें।
अरबी में मुहर्रम की दुआ (10 Muharram Dua In Hindi)
اللَّهُمَّ اجْعَلْ هَذَا الْعَامَ عَامَ سَلَامَةٍ وَإِيمَانٍ، وَعَامَ خَيْرٍ وَبَرَكَةٍ، وَعَامَ نَصْرٍ وَتَمْكِينٍ، وَعَافِيَةٍ وَغُفْرَانٍ، وَارْزُقْنَا فِيهِ التَّوْفِيقَ لِمَا تُحِبُّ وَتَرْضَى.

हिंदी में कैसे पढ़ें मुहर्रम की दुआ
सुब्हानल्लाही मिलअलमिज़ानी व् मुन्तहलइल्मी व् मबलग़ र्रेरदा व ज़िन तल अर्शी लामल जाअ वला मन जाअ मिनल्लाही इल्ला इलैहि । सुब्हानल्लाही अददश शफई वल वितरि व अदद कलीमातिल्लाहित्तामती कुल्लीहा नसअलुकस्सलामत बिरहमतिक या अरहमर्राहिमीन । व हुवा हसबुन व नेमल वकील । नेमल मौला व नैमन्नसिर । वलाहौला वला कुव्वत इल्ला बिल्लाहिल अलियिल अज़ीम । व सल्लल्लाहु तआला अला सय्येदेना मुहम्मदिंव व्अला आलिहि वसहबिहि वअलल मुअमिनीना वल मुअमिनाती वल मुस्लिमीन वल मुस्लिमाति अदद ज़ररातील वुजुदी व् अदद मालुमातील्लाही वलहम्दुलिल्लाही रब्बिल आलमीन । आमीन । सुम्मा आमीन ।
मुहर्रम की दुआ का हिंदी अनुवाद
"हे अल्लाह! इस साल को सलामती और ईमान का साल बना दे। इसे भलाई और बरकत का साल बना दे। इसे नुसरत और ताक़त का साल बना दे। हमें आफ़ियत और मग़फिरत अता फ़रमा और इस साल में हमें उन कामों की तौफ़ीक़ दे जो तुझे पसंद हैं और जिनसे तू राज़ी होता है।"
दुआ-ए-आशूरा (Dua-e-Ashoora)
यह दुआ खासतौर पर आशूरा के दिन पढ़ी जाती है। इसमें अल्लाह से रहमत, हिदायत और इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद कर नेकियां मांगने की गुजारिश की जाती है।

दुआ-ए-आशूरा (अरबी)
اللّهُمَّ اجْعَلْنِي فِي هَذَا الْيَوْمِ مِنَ الْمُسْتَغْفِرِينَ، وَاجْعَلْنِي فِيهِ مِنْ عِبَادِكَ الصَّالِحِينَ الْقَانِتِينَ، وَاجْعَلْنِي فِيهِ مِنْ أَوْلِيَائِكَ الْمُقَرَّبِينَ، بِرَأْفَتِكَ يَا أَرْحَمَ الرَّاحِمِينَ
हिंदी में कैसे पढ़ें
या रहमान नददुनिया वल आखिरती व् रहिमहुमा सल्ली अला सय्येदेना मुहम्मदिंव व् अला आली सय्येदेना मुहम्मदिंव व सल्ली अला जमीईल अम्बियाई वल मुरसलीन वक़ज़ी हाजातीना फिददुनिया वल आखिरती व अतिल उम रना फी ताअतीक व मुहब्बतिक व रेदाक व अहयेना हयातन तैय्यबतओं वतवफ़्फ़ना अललईमानी वल इस्लामी बिरहमतिक या अरहमर्राहिमीन। अल्लाहुम्मा बीइज़्ज़िल हसनी व् अखीही व उम्मीही व् अबिहि व जद्दीही व् बनिहि फर्रीज अन्ना मानहनू फ़ीहि ।
हिंदी अनुवाद
"ऐ अल्लाह! मुझे इस दिन अपने उन बंदों में शामिल कर ले जो तुझसे तौबा और माफी मांगते हैं, और उन्हें जो तेरे नेक, आज्ञाकारी और करीब हैं। ऐ सबसे ज्यादा रहम करने वाले, मुझे अपने करम से नवा दे।"



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