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गणेश चतुर्थी 2017: इस शुभ मूहूर्त पर घर में विराजमान करिए गणपति बप्पा को
गणेशोत्सव पर्व के दौरान भक्त घरों में गणेश जी को स्थापित करते है, और 10 दिन के बाद गंगा या किसी तालाब, सरोवर में मूर्ति में शुभ मूहूर्त में विर्सजन कर देते हैं। किसी भी नए या अच्छे काम की शुरूआत करने से पहले भगवान गणेश का पूजन किया जाना शुभ माना जाता है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार गणेश चतुर्थी का पर्व भद्रा महीने में आता है यानि के हर साल यह त्योहार अगस्त या सितंबर के महीने पड़ता है।
कहा जाता है कि इस मौके पर भगवान गणेश जी का स्मरण करने या व्रत करने से सभी दुख दूर हो जाते हैं। कहा जाता है कि गणेश जी का जन्म दोपहर के समय हुआ था इसलिए दोपहर के मध्यांह के आस पास ही गणेश जी को घर में स्थापित करना चाहिए,
आइए जानते है किस गणेश जी को घर मे स्थापित करने का शुभ मूहूर्त।

10 दिन के बाद लौट जाते है
गणेश चतुर्थी का त्योहार 10 दिनों तक चलता है, ऐसा माना जाता है विर्सजन के बाद वह अपने माता-पिता देवी पार्वती और भगवान शिव के पास लौट जाते हैं।

5 सितम्बर को होगा विसर्जन
इस साल गणेश चतुर्थी का यह पर्व 25 अगस्त से शुरू होकर 5 सितंबर तक चलेगा। इन दिनों भगवान गणेश भक्त उन्हें हर रोज नए-नए पकवान और मिठाईयों का भोग लगाते हैं। हालांकि भगवान गणेश को मिठाई में मोदक का भोग जरूर लगाया जाता है।

व्रत करने से दूर हो जाते है सारी मुश्किलें
विनायक चतुर्थी व्रत करने से कहा जाता है कि सारी विघ्न दूर हो जाते है। कहते हैं चंद्र मास में दो चतुर्थी आती है, चतुर्थी तिथि भगवान गणेश जी को समर्पित होती है। अमावस्या के बाद जो शुक्ल पक्ष की चतुर्थी आती है, उसे ही विनायक चतुर्थी कहा जाता है। वहीं पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। कहा जाता है कि इन दोनों दिनों पर जो लोग व्रत करते हैं और भगवान गणेश जी का स्मरण करते हैं उनके सभी दुख दूर हो जाते हैं।

भगवान गणेश को घर लाने का समय:
- मध्याह्न के समय को गणेश पूजा: सुबह 11:25 से 1 बजकर 57 मिनट
- 24 अगस्त को, चंद्रमा को नहीं देखने का समय- 20: 27 बजे से शाम 21:02 बजे तक
- 25 अगस्त को, चंद्रमा को नहीं देखने का समय- 09: 00 बजे से 21: 41 बजे तक
- अनंत चतुर्दशी दिवस पर गणेश विसर्जन
- गणेश विसर्जन के लिए शुभ चोघडिया मुहूर्त
- सुबह का मुहूर्त (चार, लाभ, अमृत) - 09:32 बजे- 14:11 अपराह्न
- दोपहर का मुहूर्त (शुभ) = 15: 44 बजे- 17:17 बजे
- शाम का मुहूर्त(प्रयोग) = 20:17 अपराह्न - 21: 44 बजे
- रात का मुहूर्त (शुभ, अमृत, चार) = 23:11 बजे



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