नृसिंह जयंती 2019: जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और चमत्कारिक मंत्र

हर साल नृसिंह जयंती वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। हिंदू धर्म को मानने वाले लोगों के लिए ये जयंती बहुत महत्व रखती है। इस साल नृसिंह जयंती 17 मई, शुक्रवार को है।

Narasimha Jayanti 2019

भगवान विष्णु ने अपने परम भक्त प्रह्राद की रक्षा के लिए नृसिंह अवतार लिया था। यदि आपको लगता है कि आप में साहस की कमी है, आप अकेले और असहाय हैं और आपको उस स्थिति से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिल पा रहा है तो आपको नृसिंह जयंती पर पूजा जरूर करनी चाहिए। आपको संकट से छुटकारा मिल सकेगा।

नृसिंह है भगवान विष्णु का रूप

नृसिंह है भगवान विष्णु का रूप

पौराणिक धार्मिक कथाओं के अनुसार दैत्यों के राजा हिरण्यकश्यप का अत्याचार प्रह्लाद पर बढ़ता ही जा रहा था। अपने अनन्य भक्त की रक्षा के लिए विष्णु भगवान ने आधे नर और आधे सिंह के रूप में नृसिंह का अवतार लिया था।

नृसिंह भगवान विष्णु के पांचवे अवतार माने जाते हैं। विष्णु जी का ये रूप उग्र, पराक्रमी और शक्तिशाली समझा जाता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

पूजा का शुभ मुहूर्त

इस साल नृसिंह जयंती में भक्तों को पूजा के लिए सिर्फ 2 घंटे 37 मिनट का समय ही मिल सकेगा।

शुभ मुहूर्त: शाम 4:20 से 6:58 तक

ऐसे करें नृसिंह जयंती पर पूजा

ऐसे करें नृसिंह जयंती पर पूजा

सुबह उठकर घर की सफाई करके माहौल स्वच्छ बनाएं।

दोपहर के समय तिल, गोमूत्र, मिट्टी और आंवले को अपने शरीर पर मलें और फिर शुद्ध जल से स्नान करें।

स्नान के पश्चात् भगवान नृसिंह के चित्र के सामने दीपक जलाएं।

उन्हें प्रसाद और लाल फूल अर्पित करें।

अब अपनी मनोकामना का ध्यान करके भगवान नृसिंह के मंत्रों का जाप करें।

भगवान के मंत्रों का जाप मध्य रात्रि में भी करना सबसे उत्तम होगा।

यदि आपने उपवास रखा है तो व्रत के दिन जलाहार या फलाहार करना उचित रहेगा।

अगले दिन जरूरतमंदों को अनाज और वस्त्रों का दान करके अपने व्रत का समापन करें।

नृसिंह जयंती पर करें इन मंत्रों का जाप

नृसिंह जयंती पर करें इन मंत्रों का जाप

इस दिन प्रभु की उपासना करने से जीवन की कठिनाइयां कम हो जाती हैं और उन उतार चढ़ाव का सामना करने का साहस मिलता है। आप प्रभु के इस खास दिन पर उनके मंत्रों का जाप करके अपनी इच्छाओं को पूरा करने की प्रार्थना कर सकते हैं।

भगवान नृसिंह के सिद्ध मंत्र

-एकाक्षर नृसिंह मंत्र: ''क्ष्रौं''

-त्र्यक्षरी नृसिंह मंत्र: ''ॐ क्ष्रौं ॐ''

-षडक्षर नृसिंह मंत्र: ''आं ह्रीं क्ष्रौं क्रौं हुं फट्''

-अष्टाक्षर नृसिंह: ''जय-जय श्रीनृसिंह''

-आठ अक्षरी लक्ष्मी नृसिंह मन्त्र: ''ॐ श्री लक्ष्मी-नृसिंहाय''

-दस अक्षरी नृसिंह मन्त्र: ''ॐ क्ष्रौं महा-नृसिंहाय नम:''

-तेरह अक्षरी नृसिंह मन्त्र: ''ॐ क्ष्रौं नमो भगवते नरसिंहाय''

-नृसिंह गायत्री - 1: ''ॐ उग्र नृसिंहाय विद्महे, वज्र-नखाय धीमहि। तन्नो नृसिंह: प्रचोदयात्।

-नृसिंह गायत्री - 2: ''ॐ वज्र-नखाय विद्महे, तीक्ष्ण-द्रंष्टाय धीमहि। तन्नो नारसिंह: प्रचोदयात्।।''

Desktop Bottom Promotion