Latest Updates
-
World Cerebral Palsy Day 2026: बच्चों को विकलांग बना देती है यह बीमारी, जानें इसके कारण, लक्षण और इलाज -
Indira Ekadashi Vrat Katha: इंदिरा एकादशी के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, पितरों को मिलता है मोक्ष -
Indira Ekadashi 2026: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय...इंदिरा एकादशी पर प्रियजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Navratri Vrat Recipes: नवरात्रि के लिए पहले ही बना लें ये स्वादिष्ट फलाहारी नमकीन, नौ दिन तक नहीं होगी खराब -
प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की हेमोरेजिक शॉक से हुई थी मौत, जानें क्या है यह गंभीर मेडिकल कंडीशन -
कौन थे मैड संधू? सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर जिनकी गोली मारकर हुई हत्या, बिग बॉस में होनी थी एंट्री -
कौन हैं अविनाश मिश्रा? जो बने 'खतरों के खिलाड़ी 15' के विनर, ऋत्विक धनजानी और ओरी को हराकर जीते 20 लाख रुपए -
डायबिटीज में एक दिन में कितनी चीनी खाना है सुरक्षित? जानिए क्या है एक्सपर्ट की राय -
World Teachers Day 2026: 5 अक्टूबर को क्यों मनाया जाता है विश्व शिक्षक दिवस? जानें इतिहास, महत्व और थीम -
कहीं आप भी तो नहीं पी रहे डिटर्जेंट वाला दूध? FSSAI के बताए इस सिंपल टेस्ट से मिनटों में करें चेक
Sawan Kanwar Yatra 2022: कांवड़ यात्रा में भूलकर भी न करें ये गलतियां, अधूरी रह जाएगी आपकी पूजा
सावन का महीना भगवान भोलेनाथ को समर्पित है। इस दौरान लोग पूरे विधि विधान से शिवजी की पूजा अर्चना करते हैं, खासतौर पर सावन में पड़ने वाले सोमवार का बहुत ही ज्यादा महत्व होता है। इसके अलावा शंकर जी के भक्तों के लिए कांवड़ यात्रा भी बहुत ही खास होती है। इस यात्रा में लोग नंगे पांव शिव जी के प्रसिद्ध मंदिरों तक जाते हैं और उन्हें जल अर्पित करते हैं।
हालांकि इस यात्रा से जुड़े कुछ नियम भी है जिनका पालन करना बहुत जरूरी होता है। चलिए जानते हैं कि क्या है वो नियम और इस यात्रा का महत्व।

कब से शुरू है सावन?
इस बार सावन का महीना 14 जुलाई से शुरू होगा जो 12 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा को समाप्त होगा। यानी 14 जुलाई से कांवड़ यात्रा भी शुरू हो जाएगी।

कैसे होती है कांवड़ यात्रा?
कांवड़ यानी एक बांस के दोनों ओर दो मटके होते हैं जिनमें भक्त गंगा जल भरकर ले जाते हैं और शिव जी को चढ़ाते हैं। लोग कांवड़ को खूब अच्छी तरह से सजाते भी है। घर वापस आने के बाद लोग शंकर जी के मंदिर में जाकर भी गंगा जल से उनका अभिषेक करते हैं। अपनी पूरी यात्रा के दौरान वे बोल बम बोल बम जपते हुए आगे बढ़ते हैं। इससे पूरा वातावरण शिवमय हो जाता है।

कांवड़ यात्रा में गेरुआ वस्त्र
इस यात्रा के दौरान भक्त गेरुआ वस्त्र पहनते हैं। इसके अलावा वे कमर में अंगोछा और सिर पर पटका भी बांधते हैं।
3 तरह की होती है कांवड़ यात्रा
यह यात्रा 3 तरह की होती है खड़ी कांवड़ यात्रा, डाक कांवड़ यात्रा और झूला कांवड़ यात्रा। खड़ी कांवड़ यात्रा में कांवड़ को नीचे नहीं रखा जाता है। जब यात्री आराम करता है तो वह अपना कांवड़ अपने सहयोगी को दे देता है जो उसे पकड़कर खड़ा रहता है। डाक कांवड़ यात्रा में भक्त एक निश्चित समय में अपनी यात्रा पूरी करते हैं जैसे 12,16,18 या 20 घंटे। इस यात्रा में यदि व्यक्ति रुक जाता है या उसका कांवड़ गिर जाता है तो उसकी यात्रा खंडित हो जाती है। झूला कांवड़ यात्रा कुछ आसान होती है। इससे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं भी कर सकती हैं। इस यात्रा में कांवड़ को कांवड़ को किसी स्टैंड पर रखकर आराम किया जा सकता है। हालांकि आराम और भोजन के बाद आपको फिर से शुद्ध होना पड़ेगा।

इन नियमों का करें पालन
कांवड़ यात्रा करने से पहले और यात्रा के दौरान व्यक्ति को कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। यात्रा शुरू करने से पहले मांस, मछली, मदिरा आदि के सेवन से बचना चाहिए। यह यात्रा भक्त नंगे पांव ही करते हैं। इसके अलावा कांवड़ को सिर के ऊपर से ले जाना भी वर्जित माना जाता है। भूलकर भी कांवड़ को जमीन पर न रखें।
कांवड़ यात्रा का महत्व
सावन के महीने में भगवान शिव को जल चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है। जो भक्त सारे नियमों का पालन करते हैं और कांवड़ यात्रा करते हैं उन्हें भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त होता है, साथ ही उनकी मनोकामना भी पूरी होती है।



Click it and Unblock the Notifications
