Latest Updates
-
Sharad Purnima Vrat Katha: शरद पूर्णिमा के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, धन-धान्य से भरा रहेगा घर -
Sharad Purnima 2026 Wishes: धन की कभी न कमी हो...शरद पूर्णिमा पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Sharad Purnima 2026 Wishes In Sanskrit: इन संस्कृत श्लोकों से प्रियजनों को दें शरद पूर्णिमा की शुभकामनाएं -
Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा पर बन रहा दुर्लभ लक्ष्मी नारायण योग, इन 3 राशियों के शुरू होंगे अच्छे दिन -
Karwa Chauth Mehndi Designs 2026: करवा चौथ पर लगवाएं ये खूबसूरत मेहंदी डिजाइन, हर कोई करेगा तारीफ -
Kojagara Puja 2026: कोजागरी पूजा कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और मां लक्ष्मी की पूजा विधि -
White Ghee Vs Yellow Ghee: सफेद या पीला घी, सेहत के लिए क्या है ज्यादा फायदेमंद? जानिए डायटीशियन की राय -
World Polio Day 2026: पोलियो कैसे होता है? जानिए इसके शुरुआती लक्षण और बचाव के उपाय -
Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा की रात शारीरिक संबंध बना सकते हैं या नहीं? जानें क्या है नियम -
शरद पूर्णिमा की रात चांद की रोशनी में क्यों रखी जाती है खीर? जानें धार्मिक और वैज्ञानिक कारण
Sawan Kanwar Yatra 2022: कांवड़ यात्रा में भूलकर भी न करें ये गलतियां, अधूरी रह जाएगी आपकी पूजा
सावन का महीना भगवान भोलेनाथ को समर्पित है। इस दौरान लोग पूरे विधि विधान से शिवजी की पूजा अर्चना करते हैं, खासतौर पर सावन में पड़ने वाले सोमवार का बहुत ही ज्यादा महत्व होता है। इसके अलावा शंकर जी के भक्तों के लिए कांवड़ यात्रा भी बहुत ही खास होती है। इस यात्रा में लोग नंगे पांव शिव जी के प्रसिद्ध मंदिरों तक जाते हैं और उन्हें जल अर्पित करते हैं।
हालांकि इस यात्रा से जुड़े कुछ नियम भी है जिनका पालन करना बहुत जरूरी होता है। चलिए जानते हैं कि क्या है वो नियम और इस यात्रा का महत्व।

कब से शुरू है सावन?
इस बार सावन का महीना 14 जुलाई से शुरू होगा जो 12 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा को समाप्त होगा। यानी 14 जुलाई से कांवड़ यात्रा भी शुरू हो जाएगी।

कैसे होती है कांवड़ यात्रा?
कांवड़ यानी एक बांस के दोनों ओर दो मटके होते हैं जिनमें भक्त गंगा जल भरकर ले जाते हैं और शिव जी को चढ़ाते हैं। लोग कांवड़ को खूब अच्छी तरह से सजाते भी है। घर वापस आने के बाद लोग शंकर जी के मंदिर में जाकर भी गंगा जल से उनका अभिषेक करते हैं। अपनी पूरी यात्रा के दौरान वे बोल बम बोल बम जपते हुए आगे बढ़ते हैं। इससे पूरा वातावरण शिवमय हो जाता है।

कांवड़ यात्रा में गेरुआ वस्त्र
इस यात्रा के दौरान भक्त गेरुआ वस्त्र पहनते हैं। इसके अलावा वे कमर में अंगोछा और सिर पर पटका भी बांधते हैं।
3 तरह की होती है कांवड़ यात्रा
यह यात्रा 3 तरह की होती है खड़ी कांवड़ यात्रा, डाक कांवड़ यात्रा और झूला कांवड़ यात्रा। खड़ी कांवड़ यात्रा में कांवड़ को नीचे नहीं रखा जाता है। जब यात्री आराम करता है तो वह अपना कांवड़ अपने सहयोगी को दे देता है जो उसे पकड़कर खड़ा रहता है। डाक कांवड़ यात्रा में भक्त एक निश्चित समय में अपनी यात्रा पूरी करते हैं जैसे 12,16,18 या 20 घंटे। इस यात्रा में यदि व्यक्ति रुक जाता है या उसका कांवड़ गिर जाता है तो उसकी यात्रा खंडित हो जाती है। झूला कांवड़ यात्रा कुछ आसान होती है। इससे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं भी कर सकती हैं। इस यात्रा में कांवड़ को कांवड़ को किसी स्टैंड पर रखकर आराम किया जा सकता है। हालांकि आराम और भोजन के बाद आपको फिर से शुद्ध होना पड़ेगा।

इन नियमों का करें पालन
कांवड़ यात्रा करने से पहले और यात्रा के दौरान व्यक्ति को कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। यात्रा शुरू करने से पहले मांस, मछली, मदिरा आदि के सेवन से बचना चाहिए। यह यात्रा भक्त नंगे पांव ही करते हैं। इसके अलावा कांवड़ को सिर के ऊपर से ले जाना भी वर्जित माना जाता है। भूलकर भी कांवड़ को जमीन पर न रखें।
कांवड़ यात्रा का महत्व
सावन के महीने में भगवान शिव को जल चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है। जो भक्त सारे नियमों का पालन करते हैं और कांवड़ यात्रा करते हैं उन्हें भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त होता है, साथ ही उनकी मनोकामना भी पूरी होती है।



Click it and Unblock the Notifications
