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Sheetala Saptami 2022: देवी शीतला की पूजा में भूलकर भी न करें यह गलती, जानें असली विधि यहां
हिंदू धर्म में देवी शीतला की पूजा का बड़ा ही महत्व है। इस पूजा को करने से व्यक्ति हर प्रकार के रोग बला से दूर रहता है, विशेष रूप से चेचक जैसे संक्रामक रोग से भी देवी मां अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। इसके अलावा माता की कृपा से अन्न और धन की भी कमी नहीं होती है। यही वजह है कि हर साल लोग शीतल सप्तमी के दिन शीतला माता की पूजा अर्चना करते हैं। शीतला सप्तमी के दिन माता को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा इस दिन घर में चुल्हा नहीं जलता है। घर के सभी लोग बासी भोजन ही खाते हैं। आइए इस पूजा से जुड़ी और महत्वपूर्ण जानकारियां आपको देते हैं।

साल 2022 में कब है शीतला सप्तमी?
इस बार शीतला सप्तमी 24 मार्च, गुरुवार को मनाई जाएगी। इस दिन लोग पूजा पाठ के साथ व्रत भी करते हैं। शीतला सप्तमी के दिन लोग तरह तरह के पकवान बनाते हैं जैसे, मीठा, नमकीन आदि। फिर अष्टमी के दिन उस बासी भोजन को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं और बांटते भी है। कई जगहों पर शीतला सप्तमी को बसौड़ा के नाम से भी जाना जाता है।

ऐसे होती है शीतला सप्तमी पर पूजा
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। रसोईघर की अच्छी तरह से सफाई करके पूजा की सामग्री वहीं इकट्ठा कर लें। ऐसी मान्यता है कि शीतला माता की पूजा करने से देवी अन्नपूर्णा की कृपा हमेशा बनी रहती है। देवी शीतला को आटे का दिया बनाकर चढ़ाया जाता है। इस दिए को जलाते नहीं है। आप मिट्टी के दीपक जला सकते हैं। इसके बाद लौटे में ठंडा पानी जरूर रखें। फिर फूल, धूप, टिका, चंदन आदि करें। फिर माता को ठंडे खाने का भोग लगाएं। भोग में आप पुआ, पकौड़े, चावल आदि बना सकते हैं। कई जगहों पर लोग रात भर जागकर माता की पूजा, भजन आदि करते हैं।

क्यों लगता है ठंडे खाने का भोग
कहते हैं शीतला सप्तमी से गर्मियों की शुरुआत हो जाती है। अपने नाम के अनुसार देवी शीतला शीतलता प्रदान करती हैं। माना जाता है देवी मां को ठंडी चीजें अत्यधिक प्रिय है, इसलिए सप्तमी को तैयार किए भोजन को लोग अष्टमी के दिन प्रसाद के रूप में खाते हैं। हालांकि शीतला सप्तमी के बाद बासी भोजन से परहेज करना चाहिए। एक पौराणिक कथा के अनुसार विराट नामक राजा ने शीतला माता को अपने राज्य में रहने से मना कर दिया था जिससे माता बहुत क्रोधित हुई थी। उनके गुस्से के कारण लोगों को लाल रंग के दाने निकालने लगे थे और गर्मी से लोग मरने लगे थे। इसके बाद राजा ने देवी मां से माफी मांगी, साथ ही ठंडे दूध और कच्ची लस्सी उन पर चढ़ाया। इसके बाद मां का क्रोध शांत हुआ।

शीतला सप्तमी के व्रत और पूजा का महत्व
शीतला माता की पूजा करने से गर्मियों में होने वाली कई गंभीर बीमारियों जैसे खसरा, चेचक, हैजा, आंखों से जुड़े रोग आदि से मनुष्य दूर रहता है। माता की कृपा से घर के सभी लोग निरोगी रहते हैं। साथ ही घर में सुख शांति बनी रहती है। पैसों की किल्लत नहीं होती है और खाने की भी कभी कमी नहीं होती है।

भूलकर भी न करें यह काम
जैसे कि आप जानते हैं कि शीतला अष्टमी के दिन माता को ठंडे खाने का भोग लगता है, इसलिए भूलकर भी इस दिन गर्म खाने का प्रसाद माता को न चढ़ाएं, साथ ही गर्म खाना खाने से भी बचें। इसके अलावा आपको इस बात का भी ध्यान रखना जरूरी है कि इस दिन आपके घर में चूल्हा न जले। स्नान करने के लिए भी आप ठंडे पानी का इस्तेमाल करें।
साल 2022 में पूजा का शुभ मुहूर्त
24 मार्च 2022, गुरुवार को रात्रि 12 बजकर 09 मिनट पर पूजा की शुरुआत होगी। 25 मार्च 2022, शुक्रवार को खत्म होगी।



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