पितृपक्ष: गया में ही पिंडदान क्यों करना चाहते हैं लोग

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Pitru Paksha: Pind Daan Vidhi at Gaya | जानिए गया में ही क्यों होता है पिंडदान? | Boldsky

हिंदू धर्म में पितृपक्ष के दौरान अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए लोग श्राद्ध करते हैं। कहते हैं पितृपक्ष में हमारे पूर्वजों की आत्माएं धरती पर हमें आशीर्वाद देने आती हैं इसलिए उनकी तृप्ति के लिए पिंडदान किया जाता है। लोग पिंडदान करने के लिए अलग अलग स्थानों पर जाते हैं लेकिन इन सब जगहों में सबसे महत्वपूर्ण स्थान है बिहार का गया।

जी हां, अपने पितरों की मोक्ष प्राप्ति के लिए लोग देश के कोने कोने से यहां आते हैं। वो यहां अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पूरी श्रद्धा से पूजा पाठ सम्पन्न करते हैं और उनके आशीर्वाद के लिए प्रार्थना करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस स्थान का इतना महत्त्व क्यों है तो चलिए मालूम करते हैं गया में पिंडदान का आखिर क्या रहस्य है। 

सबसे पहले श्री राम ने किया था गया में पिंडदान

सबसे पहले श्री राम ने किया था गया में पिंडदान

कहा जाता है प्रभु श्री राम और माता सीता ने सबसे पहले यहां आकर राजा दशरथ का पिंडदान किया था। तब से हर साल हज़ारों की संख्या में लोग इस पवित्र स्थान पर पहुंच कर अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करते हैं। माना जाता है कि यहां पितृ देवता के रूप में स्वयं भगवान विष्णु विराजमान हैं और यहां पिंडदान करने से मृत व्यक्ति को स्वर्ग लोक में स्थान प्राप्त होता है।

राक्षस के कारण मिलती है गया में मृत लोगों को मुक्ति

राक्षस के कारण मिलती है गया में मृत लोगों को मुक्ति

एक कथा के अनुसार भस्मासुर के वंशज गयासुर ने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी और वरदान स्वरुप उसने ब्रह्मदेव से मांगा कि उसका शरीर भी देवताओं की तरह पवित्र हो जाए जिसके दर्शन मात्र से ही लोगों के समस्त पाप धुल जाएं। इस प्रकार गयासुर के कारण धीरे धीरे गया मोक्ष प्राप्ति की जगह बन गया और यहां आने वाले लोगों की संख्या में भी इज़ाफ़ा होता चला गया।

ऐसा कहा जाने लगा कि गयासुर के दर्शन से ही लोगों को मुक्ति मिल जाती और उन्हें स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती।

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विष्णु जी ने दिया गयासुर को वरदान

विष्णु जी ने दिया गयासुर को वरदान

चूंकि सभी लोगों को स्वर्गलोक में स्थान मिल रहा था इस वजह से यमलोक बिल्कुल खाली पड़ता जा रहा था यह बात यमदेव को चिंतित करने लगी थी। चिंतित यमदेव अपनी समस्या का समाधान ढूंढने ब्रह्मा जी के पास गए। तब ब्रह्मदेव ने गयासुर से कहा कि सभी देवता उसकी पीठ पर यज्ञ करना चाहते हैं क्योंकि वह एक पवित्र आत्मा है। गयासुर फौरन इस बात के लिए मान गया। सभी देवताओं ने गयासुर की पीठ पर यज्ञ करने के लिए एक भारी पत्थर उस पर रख दिया। गयासुर की भावनाओं को देखते हुए विष्णु जी अत्यन्त प्रसन्न हुए और उसे आशीर्वाद दिया कि यह स्थान मोक्ष प्राप्ति का स्थान बनेगा जो गया के नाम से जाना जाएगा।

इतना ही नहीं विष्णु जी ने यह भी कहा कि जो भी यहां पर आकर अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध और पिंडदान करेगा उनके पितरों की आत्मा को शांति प्राप्त होगी। इस तरह गयासुर के समर्पण के कारण गया मृत लोगों की मुक्ति का धाम बन गया।

पिंडदान के लिए दूसरे स्थान

पिंडदान के लिए दूसरे स्थान

बिहार के गया के अतिरिक्त दूसरे स्थान भी हैं जहां लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करते हैं। बद्रीनाथ, इलाहबाद, मध्य प्रदेश का सिद्धनाथ, पिण्डारक गुजरात और काशी में भी पितृपक्ष के समय पर बड़ी संख्या में लोग अपने पूर्वजों को श्राद्ध देने आते हैं।

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    English summary

    Significance Of Pind daan In Gaya Bihar during Pitru Paksha

    Pind Daan is performed after the death of a person or during the Shradh days. Read to know why Pind Daan is performed only in Gaya.
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