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क्यों चांद देखने के बाद ही मनायी जाती है ईद?
धर्म और त्योहार हम लोगों को एकजुट कर देते हैं। धर्म का होना बहुत ज़रूरी है क्योंकि ये हमें सच्चाई और निष्ठा का मार्ग दिखाता है। धार्मिक रीतियों को लेकर हर व्यक्ति अपनी सहनशक्ति के अनुसार इनका पालन करता है। किसी भी धर्म में रीतियों को मानने के लिए मजबूर नहीं किया गया है और ये हमारी मर्ज़ी है कि हमें अपने धर्म की रीतियों को मानना है या नहीं। सभी धर्म एक जैसे ही हैं बस उनके रिवाज़ अलग हैं।
दुनियाभर में मनाए जाने वाले त्योहारों में मुस्लिमों के भी कुछ त्योहार हैं जो वो बड़ी धूमधाम और उत्साह से मनाते हैं। मुस्लिम धर्म के लोगों की भी अपनी कुछ रीतियां है जिनका वो पालन करते हैं। मुस्लिमों का सबसे प्रमुख त्योहार ईद-उल-फितर है जो हर साल मनाया जाता है। इस साल इसका जश्न 16 जून यानि आज पूरे देशभर में मनाया जा रहा है।

ये त्योहार चांद से जुड़ा हुआ है इसीलिए ईद के दिन चांद का बहुत महत्व होता है। अाप मुस्लिम हैं या नहीं, इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है लेकिन आपको ईद के चांद के महत्व के बारे में पता होना चाहिए। मुस्लिमों के लिए चंद्रमा बहुत ज़्यादा महत्व रखता है और ये उनकी जिंदगी का अभिन्न हिस्सा है क्योंकि इससे उनकी ज़िंदगी के सबसे महत्वपूर्ण दिन की शुरुआत होती है। तो चलिए जानते हैं ईद के चांद के बारे में –
चंद्र मास का महत्व
मुस्लिम धर्म के अनुयायी विशेष पंचांग को मानते हैं जो कि चंद्रमा की उपस्थिति और अवलोकन द्वारा निर्धारित किया गया है। रमादान के 29 दिनों के बाद ईद का चांद नज़र आता है। इस महीने की शुरुआत और अंत में चांद को देखा जाता है।
रमादान का अंत
रमदान के महीने का खत्म होना भी मुस्लिमों के लिए बहुत महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। मुस्लिम धर्म के लोग इस दिन बड़ी बेसब्री से आसमान में चांद के निकलने का इंतज़ार करते हैं। 29 दिन के रमज़ान महीने के पूरा होने के बाद चांद दिखाई देता है। अगर बादल हो तो उस दिन पृथ्वी के कुछ हिस्सों में चांद दिखाई नहीं दे सकता है लेकिन इससे इस दिन का महत्व कम नहीं होता है।
इस दिन मुस्लिम अनुयायी चाहे दुनिया के किसी भी कोने में क्यों ना हो वो चांद का दीदार ज़रूर करते हैं। पहले दिन से रमज़ान के 29वें दिन के बाद ईद का त्योहार मनाया जाता है।
रोज़ा खत्म होना
रमादान के महीने में मुस्लिम धर्म के लोग 29 दिन तक रोज़ा रखते हैं और ये बहुत मुश्किल होता है। लोग रोज़ा रखने से सेहत को होने वाले फायदों पर यकीन रखते हैं और मुस्लिमों में इस परंपरा को बहुत शुभ माना जाता है। रमादान के महीने में 29वें दिन चांद देखकर रोज़ा तोड़ा जाता है।
सबसे शुभ धार्मिक त्योहार को मनाना
दुनियाभर के मुसलमान ईद का त्योहार बहुत हर्ष और उल्लास के साथ मनाते हैं। रमादान के महीने में रोज़ा रखने के बाद मुसलमान ईद का त्योहार बहुत हर्ष और उल्लास के साथ मनाते हैं।
ईद पर चांद देखने का महत्व बढ़ता जा रहा है और इस दिन त्योहार रात को मनाया जाता है। रमादान की शुरुआत से ही मुस्लिम लोग 29वें दिन चांद के निकलने का इंतज़ार करने लगते हैं।
इस्लाम में चांद के दीदार को बहुत महत्व दिया गया है और ये इस्लामिक महीने रमज़ान के अंत और शव्वाल के शुरु होने का प्रतीक है। चंद्रमास की शुरुआत में नया चांद देखा जाता है और ईद का चांद मुसलमानों में बहुत महत्व रखता है।



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