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30 साल बाद बन रहा है अद्भुत संयोग, सुहागिनों के लिए वरदान है 2023 का सोमवती अमावस्या
सोमवार के दिन जब अमावस्या की तिथि पड़े तो उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं। इस तिथि का काफी महत्व है। एक तो सोमवार होने की वजह से शिव की कृपा होती है। वहीं अमावस्या होने की वजह से सूर्य और चन्द्रमा काफी करीब होते हैं जिसे शास्त्रों के अनुसार पितृ योग माना जाता है। चन्द्रमा की शक्ति जल में समाहित होती है। सोमवती अमास्या काफी ख़ास है और इस दिन शिव की पूजा अर्चना की जाए तो कष्ट दूर होते हैं और सुख समृधि का आगमन होता है।

कब है सोमवती अमावस्या 2023
सोमवती अमावस्या वैसे तो साल में एक या दो बार आती है। इस बार यानी 2023 में सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या यानी सोमवती अमावस्या 20 फ़रवरी को मनाई जायेगी।

क्यों ख़ास है सोमवती अमावस्या
जैसा की पहले बताया गया कि इस दिन अमावस्या होती है जिसकी वजह से इसे पितरों का दिन माना जाता है। सूर्य और चन्द्रमा काफी निकट होते हैं और चन्द्रमा की शक्ति जल में समाहित होती है। साथ ही साथ राहू केतु को इस दिन विशेष शक्ति प्राप्त होती है। इन सबके अलावा, सोमवार का दिन भगवान शिव को बहुत प्रिय है इसलिए सोमवती अमावस्या का काफी महत्व है।

2023 में क्या है ख़ास संयोग
इस बार का सोमवती अमावस्या है काफी ख़ास। इस बार गुरु, शुक्र और शनि स्वराशिगत अपने पथ पर गतिमान हैं। साथ ही शिव योग बन रहा है जिसमें शिव की विशेष कृपा प्राप्त हो सकेगी। इस तिथि के स्वामी पितृ होते हैं इसलिए ये दिन पितृ दोष निवारण के लिए भी उत्तम माना जाता है। ऐसा योग 30 वर्ष पश्चात बन रहा है। लेकिन जो सबसे ख़ास बात है वो ये की यह तिथि सुहागिनों के लिए काफी महत्वपूर्ण है।

सुहागिनों के लिए क्या है ख़ास
एक तो सोमवार जो शिव का प्रिय दिन है, दूसरा अमावस्या जो पितरों का प्रिय दिन है, तीसरा इस दिन गुरु, शुक्र और शनि की दशा ऐसी है की शिव योग बन रहा है। ऐसे में पूजा अर्चना और तर्पण करने से कई गुना ज्यादा फल प्राप्त होता है। सुहागिन अगर पूजा और तर्पण करें तो शिव की कृपा होगी। साथ ही साथ पितरों के आशीर्वाद से पति दीर्घायु होंगे। इसलिए 30 साल बाद बन रहे इस शिव योग वाले सोमवती अमावस्या का भरपूर फायदा उठाएं।

क्या करें सोमवती अमावस्या के दिन
सुहागिन महिलाएं अपने पति की लम्बी उम्र के लिए व्रत करें। शिव की पूजा अर्चना करें। पितरों का तर्पण करें। पीपल के पेड़ की परिक्रमा करें। इस दिन स्नान दान और तर्पण करने से पितृ प्रसन्न होते हैं, पितृ दोष हटता है और कालसर्प से राहत मिलती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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