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ये है भारत के 10 अद्भूत मंदिर
आज हम आपको भारत के ऐसे ही 10 मंदिरों की सैर पर ले चलते हैं जो लोगों की आस्था का केंद्र तो है ही, इसी के साथ-साथ भारत के गौरवशाली इतिहास को भी समेटे हुए है।
कहा जाता है कि भारत की भूमि विद्वानों की भूमि है, जिसके पीछे भारत का गौरवशाली इतिहास गवाह रहा है। जिसमें आस्था भी एक अहम भूमिका निभाती है, जो इस देश को इतनी विविधता होने के बावजूद एक धागे में बांधे रखता है। इस आस्था को बनाये रखने में यहां मौजूद मंदिरों की भूमिका को भी नकारा नहीं जा सकता। चलिए आज हम आपको भारत के ऐसे ही 10 मंदिरों की सैर पर ले चलते हैं जो लोगों की आस्था का केंद्र तो है ही, इसी के साथ-साथ भारत के गौरवशाली इतिहास को भी समेटे हुए है।

1. एकाम्बरेश्वर, कांचीपुरम
कांचीपुरम में स्थिति एकाम्बरेश्वर मंदिर के शिव धरती स्वरुप का प्रतिनिधित्व करते है। इस मंदिर का शिवलिंग मिट्टी से बना हुआ है। माना जाता है कि एकाम्बरेश्वर मंदिर के शिवलिंग का निर्माण माता पारवती ने किया था।

2. विरुपाक्ष मंदिर, हम्पी
हम्पी के कई आकर्षणों में से विरुपाक्ष मन्दिर मुख्य है। 1509 में अपने अभिषेक के समय कृष्णदेव राय ने यहँ के गोपुड़ा का निर्माण करवाया था। विरुपाक्ष मंदिर हंपी के उन गिने-चुने मंदिरों में से है, जिनमें आज भी विधिवत पूजा होती है।

3. दुलादेव मंदिर, खजुराहो
मध्य प्रदेश राज्य के खजुराहो स्थान में बना एक हिन्दू मन्दिर है। यह मूलतः शिव मंदिर है। इसको कुछ इतिहासकार कुंवरनाथ मंदिर भी कहते हैं। इसे 10 वीं और 12 वीं शताब्दियों के बीच चंदेल के वंशजों ने बनवाया था। मंदिर की दीवारों पर नतकियों की मूर्तियां खुदी हुईं हैं जो कामुख मुद्रा और अन्य मुद्राओं में हैं।

4. कोणार्क मंदिर उड़ीसा
कोणार्क का सूर्य मंदिर कामुकता को एक नयी परिभाषा देता है। यहां बनी मूर्तियों में बड़ी ही खूबसूरती के साथ काम और सेक्स को दर्शाया गया है। यहां बनी मूर्तियां पूर्ण रूप से यौन सुख का आनंद लेती दिखाई गयी हैं। यह मंदिर विशेष रूप से सूरज भगवान के रथ के आकार में बनाया गया है। सुपरिष्कृत रूप से इस रथ में धातुओ से बने चक्कों की 12 जोड़िया है जो 3 मीटर चौड़ी है और जिसके सामने कुल 7 घोड़े (4 दाई तरफ और 3 बायीं तरह) है। यह 13 वीं शताब्दी में राजा नरसिंहदेव प्रथम द्वारा बनाया गया था।

5. एलिफेंटा की गुफाएं, महाराष्ट्र
एलिफेंटा की गुफ़ाएं 7 गुफ़ाओं का सम्मिश्रण हैं, जिनमें से सबसे महत्वपूर्ण है महेश मूर्ति गुफ़ा। एलिफेन्टा के गुहा मन्दिर राष्ट्रकूटों के समय में बने द्वीप अरेबियन सागर की टुकड़ी में बसा हुआ है, जहां गुफाओ के दो समूह है। पहले समूह में पांच हिन्दू गुफाएं और दूसरे समूह में दो बुद्धिज्म से जुड़ी गुफाएं है। हिन्दू गुफाओ में पत्थरो की मूर्तियाँ भी बनायी गयी है और जो हिन्दू भगवान शिव को दर्शाती है।

6. शोर मंदिर, महाबलीपुरम
शोर मंदिर तमिलनाडु के महाबलीपुरम में स्थित है। यह मंदिर द्रविड वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है और ग्रेनाइट के ब्लॉक के साथ बनाया गया है। शोर मंदिर को दक्षिण भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है जिसका संबंध आठवीं शताब्दी से है। शोर मंदिर के भीतर तीन मंदिर हैं। बीच में भगवान विष्णु का मंदिर है इसके दोनों तरफ शिव मंदिर हैं। यह पाँच मंज़िला मंदिर है, इसका पिरामिड संरचना 60 फुट ऊंची है और एक 50 फुट वर्ग में फैला हुआ है। इसी मंदिर परिसर में देवी दुर्गा का भी छोटा सा मंदिर है जिसमें उनकी मूर्ति के साथ एक शेर की मूर्ति भी बनी हुई है।

7. एलोरा, महाराष्ट्र
एलोरा का कैलाश मन्दिर महाराष्ट्र के औरंगाबाद ज़िले में प्रसिद्ध 'एलोरा की गुफ़ाओं' में स्थित है। यह मंदिर दुनिया भर में एक ही पत्थर की शिला से बनी हुई सबसे बड़ी मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर एलोरा की गुफ़ा संख्या 16 में स्थित है। इस मन्दिर में कैलाश पर्वत की अनुकृति निर्मित की गई है। मंदिर का निर्माण राष्ट्रकूट शासक कृष्ण प्रथम ने करवया था।

8. बृहदेश्वर मंदिर, तमिलनाडु
बृहदेश्वर अथवा बृहदीश्वर मन्दिर विश्व के प्रमुख ग्रेनाइट मंदिरों मे से एक है। यह मंदिर तमिलनाडु के तंजौर ज़िले में स्थित प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है। तमिल भाषा में इसे बृहदीश्वर के नाम से संबोधीत किया जाता है। ग्यारहवीं सदी के आरम्भ में बनाया गया था। यह मंदिर चोल शासकों की महान कला केन्द्र रहा है। यह भव्य मंदिर विश्व धरोहर के रूप में जाना जाता है। भगवान शिव को समर्पित बृहदीश्वर मंदिर शैव धर्म के अनुयायियों के लिए पवित्र स्थल रहा है।

9. मीनाक्षी मंदिर, मदुरई
हिंदू देवी मां मीनाक्षी हैं,मां मीनाक्षी भगवान शिव की पत्नी पार्वती का अवतार और भगवान विष्णु की बहन भी है। मां का यह विशाल भव्य मंदिर तमिलनाडू के मदुरई शहर में है। यह मंदिर मीनाक्षी अम्मन मंदिर प्राचीन भारत के सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है।

10. विरुक्ष्क्ष मंदिर, पट्टडकल
विरुक्ष्क्ष मंदिर चालुक्य के वंशजों ने 8 वीं सदी में बनवाया था। यह पट्टडकल गांव में स्थित है। इस मंदिर में दक्षिण और उत्तर भारतीय मंदिर का मिली जुली वास्तुकला देखने को मिलती है।



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