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छिपी हुई करुणा
Short Story
oi-Staff

उन्होंने कहा कि गुरु ने आपको हर बार शिष्य बनाने से मना कर दिया था फिर भी आप उनका जन्मदिन मना रहें हैं। उनका जन्मदिन तो उन शिष्यों को मानना चाहिए जिनको उन्होंने शिष्य के रूप में स्वीकार किया था।
गुरूजी हँसे और कहा, "मैं जश्न मना रहा हूँ क्योंकि उन्होंने मुझे मना कर दिया था। मैंने अब उनकी दया को समझा है। अगर वह मुझे स्वीकार करते को मैं केवल एक नकलची बन जाता। उन्होंने मुझे छोड़ दिया इसलिए मैंने अपने पैरों पर खड़ा होना शुरू किया।
धीरे-धीरे मेरी हताशा ने मुझे किसी गिरे हुए को उठाने के लिए प्रेरित किया। इस प्रकार उन्होंने मेरी मदद की। इसलिए वो मेरे गुरु हैं जिन्होंने वास्तव में मुझे अपनी अस्वीकृति में भी स्वीकार किया।
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English summary
The Camouflaged Compassion | छिपी हुई करुणा
Story first published: Wednesday, September 5, 2012, 16:53 [IST]
Other articles published on Sep 5, 2012



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