मोकूजैन का लबादा और कटोरा

The robe and the bow
मोकूजैन के चेहरे पर कभी मुस्‍कराहट नहीं आयी जबकि उसका धरती पर आख्रिरी दिन था । जब उसकी आत्‍मा का शरीर को छोड़ने का समय आ गया तो मोकूजैन ने अपने शिष्‍यों से पूछा: तुम लोगों ने मेरे सानिध्‍य में दस साल जैन के बारे में सीखा।

मुझे जैन की सही व्‍याख्‍या बताओ। जो इसे सही तरीके से बता पाएगा वो मेरा उत्‍तराधिकारी होगा और उसे मैं अपना लबादा और कटोरा भी दे दूंगा। शिष्‍यों ने मोकूजैन के अलग हाव-भाव को देखा लेकिन चुप रहे।

एनको, जिसने मोकूजैन के साथ काफी लम्‍बा समय बिताया था, वह उसके बिस्‍तर के निकट आया और दवा के कप को थोडा खिसकाया। कुछ इस तरह हिला जैसे जबाब देने जा रहा हो। मोकूजैन के चेहरे के भाव बदलने लगे उसने पूछा- क्‍या तुम्‍हे कुछ समझ में आया।

एनको वापस आया और दवा के कप को उसकी पुरानी जगह पर रख दिया। मोकूजैन के चेहरे पर एक प्‍यारी सी मुस्‍कराहट उभरी। उसने कहा- बेबकूफ, तुमने मेरे साथ 10 साल काम किया लेकिन कभी मेरे शरीर को नहीं देखा। लबादा और कटोरा ले लो अब यह तुम्‍हारा है।

गूढ रहस्‍यों को समझना प्रत्‍येक के बस की बात नहीं है।

Story first published: Tuesday, July 10, 2012, 11:06 [IST]
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