Latest Updates
-
Sawan First Somwar 2026: सावन का पहला सोमवार आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और व्रत के जरूरी नियम -
Happy Sawan Somwar 2026 Wishes: शिव का नाम...सावन के पहले सोमवार पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामनाए संदेश -
बारिश के मौसम में तेजी से बढ़ रहा है वायरल फीवर का खतरा, जानिए लक्षण और बचाव के उपाय -
Friendship Day Wishes For Best Friend: इन संदेशों के जरिए बेस्ट फ्रेंड को दें फ्रेंडशिप डे की बधाई -
Happy Friendship Day 2026 Wishes: तेरी मेरी यारी...इन संदेशों के साथ दोस्तों को दें फ्रेंडशिप डे की शुभकामनाएं -
आगरा की अवनी गुप्ता ने Miss Supranational 2026 में बढ़ाया भारत का मान, कॉर्पोरेट जॉब छोड़ बनाई टॉप 12 में जगह -
सावन में भूलकर भी न करें इन चीजों का सेवन, एक्सपर्ट से जानें सावन में क्या खाएं और क्या नहीं -
Sawan Somwar Vrat 2026: क्या पीरियड्स में सावन सोमवार का व्रत रखा जा सकता है? जानें क्या कहते हैं शास्त्र -
World Lung Cancer Day 2026: स्मोकिंग न करने वालों को भी हो सकता है लंग कैंसर, जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव -
August 2026 Vrat Tyohar: सावन शिवरात्रि से लेकर रक्षाबंधन तक, देखें अगस्त में आने वाले व्रत-त्योहारों की लिस्ट
क्या मूर्ती के माध्यम से पूजा करना सही है?
क्या मूर्ती के माध्यम से पूजा करना सही है? क्यूं कुछ धार्मिक ग्रंथ मूर्ती की पूजा करने का विरोध करते हैं?
अगर सीधे तौर पर देखा जाए तो हम मूर्ती की पूजा नहीं करते हैं। मूर्ती, छवि या चित्र के माध्यम से हम भगवान की पूजा करते हैं, जो कि सर्वव्यापी है।
छवि भगवान का प्रतीक है, यह हमारे दिमाग में भगवान की एक छवि बनाने में मदद करता है, जिससे हम उनकी मन लगा कर पूजा कर सकें।

उदाहरण के तौर पर एक मां अपने छोटे से बच्चे को तोते का चित्र दिखा कर उसे यह बताती है कि "यह एक तोता है"। जिससे कि वह बच्चा जान सके कि असल में तोता कैसा दिखाई देता है। एक बार बडे़ हो जाने के बाद बच्चे को पक्षियों को पहचानने के लिये चित्रों की जरुरत नहीं पड़ती।
READ: क्या भगवान खाने को भोग लगाते हैं?

इसी तहर से शुरुआत में मन को मदद करने के लिये कुछ उपकरणों की आवश्यकता होती है। एक बार जब इंसान आध्यात्मिक अभ्यास कर लेता है, तब उसके मन को मूर्ती या चित्र की आवश्यकता नहीं पड़ती। एक छवि पर फोकस कर के आप अपने दिमाग को केंद्रित करने में प्रशिक्षित करते हैं, जो कि एक अच्छा तरीका है।

हांलाकि हम यह नहीं कह सकते हैं कि भगवान मूर्ती या छवि में मौजूद नहीं हैं। भगवान हर जीव-जन्तु तथा निर्जीव चीजों में प्रकट हैं इसलिये वह छवि में भी मौजूद हैं।
READ: क्या भगवान का अस्तित्व है? एक अंतिम सवाल
छवि की पूजा करने से यह भी मतलब निकाला जा सकता है कि हर इंसान को हर जीव-जंतु से प्यार करना आना चाहिये और दुनिया में शांति फैलानी चाहिये।

कुछ धर्म जो छवि पूजा का विरोध करते हैं वास्तव में, वह भी किसी न किस रूप में मूर्ती पूजा जरूर करते हैं। एक ईसाई यीशु की पूजा क्रॉस के माध्यम से करता है या फिर एक मुस्लिम अपनी नमाज़ काबा की ओर मुंह कर के पढ़ता है।

छवि पूजा के नकारात्मक पक्ष यह होते हैं कि लोग यह समझने लगते हैं कि भगवान केवल मूर्ती में ही समाए हुए हैं। वह उसके पीछे के सिद्धांत को भूल जाता है। वह बार बार गल्तियां करता जाता है और मूर्ती के सामने माथा टेक कर छमा मांग लेता है।



Click it and Unblock the Notifications